{"_id":"ef717120d664399e9010ddbd6c6aea4b","slug":"child-death-in-kgmu","type":"story","status":"publish","title_hn":"...और आखिरकार चली गई बेगुनाह बच्ची की जान","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
...और आखिरकार चली गई बेगुनाह बच्ची की जान
लखनऊ/इंटरनेट डेस्क
Updated Wed, 31 Jul 2013 10:29 AM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
समय से इलाज न मिलना मासूम राशि के लिए जानलेवा साबित हुआ।
विज्ञापन
केजीएमयू से दो दिन पहले लौटाई गई और सिविल अस्पताल में भर्ती बच्ची की मंगलवार को मौत हो गई।
नाराज परिवारीजनों ने डॉक्टरों पर लापरवाही का आरोप लगाते हुए सिविल अस्पताल में हंगामा किया।
परिवारीजनों का आरोप था कि डॉक्टरों ने उनकी बेटी का ठीक से इलाज नहीं किया। उन्हें इधर से उधर भटकाया गया।
घरवालों ने कहा कि मौत हो जाने के बाद डॉक्टर बच्ची की हालत गंभीर होने की बात कह रहे हैं। इतना ही नहीं डॉक्टरों ने बच्ची की जांच कराना भी जरूरी नहीं समझा।
विज्ञापन
मौत से दस मिनट पहले सिर्फ एक्सरे कराने को कहा गया। रविवार को अमेठी जिले के बहेंगी गांव की रहने वाली रजनी अपनी बच्ची राशि का इलाज कराने के लिए केजीएमयू पहुंची थी।
विज्ञापन
यहां रजनी को केजीएमयू के पीडियाट्रिक सर्जरी विभाग की एक महिला डाक्टर ने थप्पड़ मारकर वार्ड से बाहर निकाल दिया था।
बेटी को नाजुक हालत में लेकर परिवारीजन रविवार को ही सिविल अस्पताल लेकर पहुंचे थे।
यहां इमरजेंसी में मौजूद डॉक्टर ने उन पर केजीएमयू से भागने का आरोप लगाते हुए भर्ती करने से मना कर दिया।
KGMU: मरीज ने मांगा इलाज, डॉक्टर ने दिया थप्पड़
बाद में मीडिया के हस्तक्षेप पर बच्ची को भर्ती किया गया। पिता संतोष कुमार का कहना है कि अस्पताल में दो दिन भर्ती रहने के बावजूद उसे ठीक से इलाज नहीं दिया गया।
इलाज के नाम पर सिर्फ ग्लूकोज की बोतल चढा़ई जा रही थी। बच्ची का इलाज डॉ. अर्चना श्रीवास्तव कर रही थीं।
पैथोलॉजी ले जाते समय उसकी रास्ते में मौत हुई। अस्पताल प्रशासन की तरफ से कोई सहयोग नहीं मिलने पर परिवारीजन बच्ची के शव को ले गए।