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सड़क हादसों पर नियंत्रण के लिए विभागों को मिलकर करना होगा काम : मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ

Wed, 28 Aug 2019 08:52 PM IST
ishwar ashish न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ Published by: ishwar ashish Updated Wed, 28 Aug 2019 08:52 PM IST
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chief minister yogi adityanath in KGMU.
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ - फोटो : amar ujala

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि सड़क हादसों पर नियंत्रण के लिए सभी विभागों को मिलकर काम करना होगा। स्कूलों से लेकर समाज को भी सड़क दुर्घटना से बचाव के लिए जागरूक करना होगा। आपदा से बचाव की जानकारी स्कूलों के पाठ्यक्रम में शामिल करनी होगी।

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मुख्यमंत्री बुधवार को केजीएमयू के अटल बिहारी साइंस कन्वेंशन सेंटर में आयोजित इंडियन सोसाइटी ऑफ ट्रॉमा एंड एक्यूट केयर (आईएटीएसी) की 9वीं राष्ट्रीय और यूपी चैप्टर की पहली संगोष्ठी में बोल रहे थे।
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केजीएमयू के ट्रॉमा सर्जरी विभाग की ओर से आयोजित तीन दिवसीय संगोष्ठी के पहले दिन मुख्यमंत्री योगी ने कहा कि लोगों को यह बताना बहुत जरूरी है कि दुर्घटना में घायल व्यक्ति को कैसे जल्द से जल्द स्वास्थ्य केंद्र पहुंचाया जाए। आज इसे सिर्फ डॉक्टरों की जिम्मेदारी बना दिया गया है।
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ऐसी योजनाएं बनाने की जरूरत है जिसमें स्कूलों व समाज के बीच जाकर लोगों को घायलों की जान बचाने के लिए जागरूक किया जाए। योगी ने अपने सांसदी कार्यकाल की एक दुर्घटना का जिक्र करते हुए कहा कि दर्जनों लोग घायलों को घेरे खड़े थे लेकिन जब घायलों को अस्पताल पहुंचाने के लिए कहा तो आधे से अधिक भाग खड़े हुए।

सड़कों पर ‘ब्लैक स्पॉट’ चिह्नित करना सबसे जरूरी

मुख्यमंत्री ने कहा कि वह सड़क दुर्घटनाओं पर नियंत्रण के लिए बनी समिति की बैठक में शमिल होते हैं। इस दौरान सामने आया कि सड़कों पर ‘ब्लैक स्पॉट’ चिह्नित करना सबसे जरूरी है। सड़कों पर लगने वाले सूचना चिह्न गायब होने की जानकारी भी सामने आई। इसके बाद ‘आगे अंधा मोड़ है’, ‘आगे गांव है’ या ‘आगे स्कूल है’ जैसे सूचना पट पीडब्ल्यूडी और एनएचएआई से बात करके लगवाए गए।

यूपी रोडवेज के ड्राइवरों के स्वास्थ्य की जांच कराई तो बहुतों की आंखें कमजोर मिलीं। इसके बाद निर्देश दिए गए कि छुट्टी देकर सभी ड्राइवरों का स्वास्थ्य परीक्षण कराया जाए। ड्राइविंग लाइसेंस के नवीनीकरण के समय भी उनकी पूरी जांच हो।

उन्होंने बताया कि आपदा से निपटने के लिए एसडीआरएफ का गठन किया गया। 250 अधिकारियों को केजीएमयू से ट्रॉमा प्रबंधन का प्रशिक्षण दिलाया गया। लोगों को हेलमेट और सीट बेल्ट लगाने के लिए जागरूक किया गया। चिकित्सा शिक्षा मंत्री सुरेश खन्ना, स्वास्थ्य मंत्री जयप्रताप सिंह, डीजीपी ओपी सिंह, आईएटीएसी के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. एमसी मिश्रा ने सड़क दुर्घटना से बचने के लिए जागरूकता बढ़ाने की अपील की।

एंबुलेंस का रिस्पांस टाइम 10 मिनट करेंगे

मुख्यमंत्री ने कहा कि 108, 102 और डायल 100 को एक साथ लाया गया है, जिससे सूचना मिलने के बाद घायल तक पहुंचने में एंबुलेंस का रिस्पांस टाइम 10 मिनट हो जाए। इससे घायल को ‘गोल्डन ऑवर’ के दौरान ही इलाज मिल सकेगा।

इंसेफेलाइटिस का प्रकोप हुआ कम
मुख्यमंत्री ने कहा कि हमारी सरकार के दो साल के कार्यकाल में पूर्वी उत्तर प्रदेश के जिलों में दिमागी बुखार (इंसेफेलाइटिस) के मरीजों में 35 फीसदी और इससे होने वाली मौतों में 63 फीसदी की कमी आई है। इसमें अंतर्विभागीय समन्वय और जागरूकता का बड़ा योगदान है। स्वच्छता और शुद्ध पेयजल की उपलब्धता का भी ध्यान रखा गया। हमारी सरकार बनने से पहले गोरखपुर मेडिकल कॉलेज में हर साल इंसेफेलाइटिस के 500 से 700 मरीज आते थे। इस वर्ष वहां 86 मरीज भर्ती हुए और मात्र छह की ही मौत हुई। आने वाले तीन साल में इंसेफेलाइटिस को पूरी तरह खत्म कर दिया जाएगा। 

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