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सूचना अधिकारी को जानकारी न देना पड़ेगा महंगा, वेतन से होगी जुर्माने की वसूली
ब्यूरो/अमर उजाला, लखनऊ
Updated Tue, 24 Oct 2017 12:29 PM IST
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जावेद उस्मानी
- फोटो : डेमो
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आरटीआई के तहत सरकारी कार्यालयों से मांगी गई किसी भी तरह की सूचना देने में बहानेबाजी नहीं चलेगी। कुछ अपवादों को छोड़कर सूचना देना सूचना का अधिकार अधिनियम का मुख्य मकसद है। जानबूझकर तथ्य छिपाकर सूचना न देना जिम्मेदारों को भारी पड़ेगा। दोष साबित होने पर इनके खिलाफ भारी जुर्माना लगाया जाएगा।
यह चेतावनी सोमवार को प्रदेश के मुख्य सूचना आयुक्त जावेद उस्मानी ने दी। वह कलेक्ट्रेट सभागार में जिले के जन सूचना तथा प्रथम अपीलीय अधिकारियों के लिए आयोजित प्रशिक्षण कार्यक्रम में बोल रहे थे। उन्होंने कहा, सूचना का अधिकार अधिनियम सरकारी कार्यालयों के कामकाज में पारदर्शिता लाने व भ्रष्टाचार दूर करने का एक अचूक कदम है। गुड गवर्नेंस की अवधारणा बिना इसके संभव नहीं हो सकती।
इसलिए जन सूचना अधिकारियों व प्रथम अपीलीय अधिकारियों की मंशा हरसंभव सूचना उपलब्ध कराने की होनी चाहिए। इसमें बहानेबाजी बर्दाश्त नहीं होगी। अधिनियम में उल्लिखित ठोस एवं विधिक कारणों के आधार पर ही सूचना देने से इन्कार किया जा सकता है। इसके इतर बाकी सभी सूचनाएं आवेदक को देना जरूरी है। इसमें जानबूझकर लेटलतीफी या सूचना न देने पर जिम्मेदार को जुर्माना झेलना पड़ेगा।
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उन्होंने कहा कि पूरे प्रदेश में प्रशिक्षण का पहला चरण जनवरी 2016 से शुरू हुआ था, जो पूरा हो गया है। दूसरे चरण में लखनऊ, आगरा एवं मेरठ मंडल के जिलों में विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रम किए जा रहे हैं। कार्यक्रम में सूचना आयुक्त अरविंद सिंह बिष्, मंडलायुक्त अनिल गर्ग, आयोग के सचिव उदयवीर सिंह यादव, जिलाधिकारी कौशल राज शर्मा व सीडीओ प्रशांत शर्मा मौजूद रहे।
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यह चेतावनी सोमवार को प्रदेश के मुख्य सूचना आयुक्त जावेद उस्मानी ने दी। वह कलेक्ट्रेट सभागार में जिले के जन सूचना तथा प्रथम अपीलीय अधिकारियों के लिए आयोजित प्रशिक्षण कार्यक्रम में बोल रहे थे। उन्होंने कहा, सूचना का अधिकार अधिनियम सरकारी कार्यालयों के कामकाज में पारदर्शिता लाने व भ्रष्टाचार दूर करने का एक अचूक कदम है। गुड गवर्नेंस की अवधारणा बिना इसके संभव नहीं हो सकती।
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इसलिए जन सूचना अधिकारियों व प्रथम अपीलीय अधिकारियों की मंशा हरसंभव सूचना उपलब्ध कराने की होनी चाहिए। इसमें बहानेबाजी बर्दाश्त नहीं होगी। अधिनियम में उल्लिखित ठोस एवं विधिक कारणों के आधार पर ही सूचना देने से इन्कार किया जा सकता है। इसके इतर बाकी सभी सूचनाएं आवेदक को देना जरूरी है। इसमें जानबूझकर लेटलतीफी या सूचना न देने पर जिम्मेदार को जुर्माना झेलना पड़ेगा।
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उन्होंने कहा कि पूरे प्रदेश में प्रशिक्षण का पहला चरण जनवरी 2016 से शुरू हुआ था, जो पूरा हो गया है। दूसरे चरण में लखनऊ, आगरा एवं मेरठ मंडल के जिलों में विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रम किए जा रहे हैं। कार्यक्रम में सूचना आयुक्त अरविंद सिंह बिष्, मंडलायुक्त अनिल गर्ग, आयोग के सचिव उदयवीर सिंह यादव, जिलाधिकारी कौशल राज शर्मा व सीडीओ प्रशांत शर्मा मौजूद रहे।
आयोग में 37 हजार प्रकरण लंबित
जावेद उस्मानी
- फोटो : डेमो
उस्मानी ने कहा, प्रथम अपीलीय अधिकारी दोनों पक्षों को तय समय पर सूचित कर विवेकपूर्ण ढंग से आदेश पारित करें ताकि सूचना आयोग को निर्णय करने में अनावश्यक देरी न हो। प्रथम अपीलीय अधिकारी पर जुर्माने का प्रावधान नहीं है लेकिन लापरवाह एवं जिम्मेदारी से बचने वाले अपीलीय जन सूचना अधिकारियों के खिलाफ जुर्माने के साथ ही कड़ी कार्रवाई का प्रावधान अधिनियम में है।
सूचना अधिकारी द्वारा सूचना न देने पर लगी जुर्माना राशि उसके वेतन से कटेगी। शासन स्तर पर इसकी समीक्षा कर विभागीय कार्रवाई भी तय होगी। जुर्माना लगने के बाद भी प्रकरण समाप्त नहीं होगा। आवेदक को सूचना देने का मामला चलता रहेगा। मुख्य सूचना आयुक्त ने कहा कि आयोग में इस समय 37 हजार प्रकरण लंबित हैं। अगले एक वर्ष में इसे 20 हजार पर लाया जाएगा।
आयोग के पास हर साल करीब 30 हजार मामले आते हैं। आयोग ने अब उसी वर्ष मामले निस्तारित कराने का लक्ष्य रखा है। आयोग के प्रशिक्षक राजेश मेहतानी ने प्रोजेक्टर के जरिये प्रथम अपीलीय एवं जन सूचना अधिकारियों को अधिनियम व नियमावली से जुड़ी जरूरी बातों की जानकारी दी।
सूचना अधिकारी द्वारा सूचना न देने पर लगी जुर्माना राशि उसके वेतन से कटेगी। शासन स्तर पर इसकी समीक्षा कर विभागीय कार्रवाई भी तय होगी। जुर्माना लगने के बाद भी प्रकरण समाप्त नहीं होगा। आवेदक को सूचना देने का मामला चलता रहेगा। मुख्य सूचना आयुक्त ने कहा कि आयोग में इस समय 37 हजार प्रकरण लंबित हैं। अगले एक वर्ष में इसे 20 हजार पर लाया जाएगा।
आयोग के पास हर साल करीब 30 हजार मामले आते हैं। आयोग ने अब उसी वर्ष मामले निस्तारित कराने का लक्ष्य रखा है। आयोग के प्रशिक्षक राजेश मेहतानी ने प्रोजेक्टर के जरिये प्रथम अपीलीय एवं जन सूचना अधिकारियों को अधिनियम व नियमावली से जुड़ी जरूरी बातों की जानकारी दी।