{"_id":"610c223160c80820ea2a3b17","slug":"check-cloning-and-bank-fraudster-arrested-search-for-two-including-mastermind-three-have-already-been-caught","type":"story","status":"publish","title_hn":"चेक क्लोनिंग व बैंकों से जालसाजी करने वाला गिरफ्तार, मास्टरमाइंड सहित दो की तलाश, तीन को पहले ही दबोचा जा चुका","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
चेक क्लोनिंग व बैंकों से जालसाजी करने वाला गिरफ्तार, मास्टरमाइंड सहित दो की तलाश, तीन को पहले ही दबोचा जा चुका
Thu, 05 Aug 2021 11:08 PM IST
पंकज श्रीवास्तव
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ
Published by: पंकज श्रीवास्तव
Updated Thu, 05 Aug 2021 11:08 PM IST
सार
कुछ दिन पहले यूपीडा, डॉ. शकुंतला मिश्रा राष्ट्रीय पुर्नवास विश्वविद्यालय और उत्तर प्रदेश राज्य आयुष सोसायटी के कैंसिल चेक का क्लोन बनाकर खाते से नकदी साफ करने का मामला सामने आया था। क्लोन चेक के जरिए चार बार में 39 लाख 46 हजार 600 रुपये निकाले गए थे।
विज्ञापन
राशिद उर्फ दादा
- फोटो : अमर उजाला
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
एसटीएफ ने यूपीडा, शकुंतला मिश्रा विश्वविद्यालय और राज्य आयुष सोसायटी के खातों से चेक क्लोनिंग कर लाखों रुपये उड़ाने वाले गिरोह के सदस्य को गिरफ्तार किया है। एसटीएफ टीम ने यह गिरफ्तारी महाराष्ट्र के नालासोपारा से की है। गिरोह के मास्टरमाइंड सहित दो अन्य आरोपियों की तलाश की जा रही है।
विज्ञापन
एसटीएफ के अधिकारी के मुताबिक, कुछ दिन पहले यूपीडा, डॉ. शकुंतला मिश्रा राष्ट्रीय पुर्नवास विश्वविद्यालय और उत्तर प्रदेश राज्य आयुष सोसायटी के कैंसिल चेक का क्लोन बनाकर खाते से नकदी साफ करने का मामला सामने आया था। यूपीडा के खाते से क्लोन चेक के जरिए चार बार में 39 लाख 46 हजार 600 रुपये निकाले गए थे। इस मामले में बैंक ऑफ बड़ौदा के प्रबंधक संजय कुमार ने विभूतिखंड थाने में केस दर्ज कराया था। पुलिस ने तीन आरोपियों अरविंद तिवारी, मनीष मौर्या, शादाब अनवर शेख को गिरफ्तार किया था। इस गिरोह का सक्रिय सदस्य महाराष्ट्र के नालासोपारा के आरनेट एन्क्लेव ओस्ठवाल निवासी राशिद उर्फ दादा उर्फ गुरूजी भी शामिल था।
विज्ञापन
इसके अलावा ओमप्रकाश श्रीवास्तव उर्फ अजय और अख्तर का नाम सामने आया। इसी बीच एसटीएफ ने आरोपियों की तलाश शुरू की। निरीक्षक प्रमोद वर्मा की टीम ने राशिद उर्फ दादा को सोमवार को महाराष्ट्र के नालासोपारा से गिरफ्तार कर लिया। टीम ने उसके पास से एक मोबाइल, आधारकार्ड, सोने की अंगूठी और 20 हजार नकदी बरामद की। पुलिस उसे मीरा रोड भयंदर थाने लेकर गई। वहां से कोर्ट में पेश करने के बाद ट्रांजिट रिमांड पर विभूतिखंड थाने लेकर बृहस्पतिवार को पहुंची।
विज्ञापन
दस साल से कर रहा मनी ट्रांसफर का काम
एसटीएफ के अधिकारी के मुताबिक, पकड़ा गया आरोपी राशिद इम्तियाज खान पिछले 10 साल से महाराष्ट्र में खान इंटरप्राइजेज के नाम से दुकान खोलकर मनी ट्रांसफर व ट्रैवेल्स का काम कर रहा था। वह मूलरूप से वाराणसी का रहने वाला है। चार साल पहले उसकी मुलाकात गिरोह के मास्टरमाइंड ओमप्रकाश उर्फ अजय से हुई थी। ओमप्रकाश महाराष्ट्र के पालघर स्थित महाबीर अग्रवाल कॉम्पलेक्स नई बसई का रहने वाला है। वहीं उसके साथ पं. बंगाल के हुगली का अख्तर उर्फ राजन और भदोही के मनीष मौर्या से भी मुलाकात हुई। ओमप्रकाश ने काला धन ट्रांसफर करने के लिए कहा। राशिद के मुताबिक, अजय मूलरूप से जौनपुर का रहने वाला है। वहीं से क्लोन चेक के जरिए सरकारी व गैर सरकारी संस्थानों के खातों से रुपये उड़ाने का खेल शुरू हुआ।
गिरोह का मास्टरमाइंड है अजय
पूछताछ में राशिद ने पुलिस को बताया कि अजय इस गिरोह का मास्टरमाइंड है। वही कैंसिल चेक से क्लोन चेक तैयार करता था जिसके बाद तय खातों में उसे लगा देते थे। खाते में रकम आने के बाद सभी का पहले से तय हिस्सा अजय ही बांटता था। राशिद ने बताया कि अजय ने यूपीडा के बैंक ऑफ बड़ौदा के खाते से कैंसिल चेक जो क्रमश: 993000, 998400 को अरविंद तिवारी के नाम, 968500 का चेक शादाब अनवर शेख और 986700 का चेक अशरफ आलम खान के नाम से क्लोन चेक तैयार किया। अजय और मनीष ने इन क्लोन चेक को जौनपुर और राशिद व अख्तर ने वाराणसी और गोरखपुर के खाताधारकों के खातों में जमा किए। यूपीडा के चार चेक का भुगतान हो गया लेकिन डॉ. शकुंतला मिश्रा विश्वविद्यालय व आयुष सोसायटी का चेक से भुगतान नहीं हुआ।
भुगतान होने के बाद एटीएम से निकलवाते थे नकदी
आरोपी ने कुबूल किया कि खाते में रकम आने के बाद अजय खाताधारकों को कॉल करता था। उनसे एटीएम से नकदी निकलवाकर रुपये हासिल करता था। इसकेबाद गिरोह के सभी सदस्यों को तय काम के मुताबिक भुगतान करता था। पूरे रकम का आधा हिस्सा अजय खुद रखता था। बाकी में सभी सदस्याें को देता था। गिरोह के सदस्य 2017 में औरंगाबाद व सहानरपुर से गिरफ्तार हुए थे। वहां से जमानत मिलने के बाद दोबारा से काम शुरू कर दिया। एसटीएफ ने आरोपी राशिद को विभूतिखंड पुलिस को सुपुर्द कर दिया है। पुलिस ने देर रात तक पूछताछ किया। बृहस्पतिवार को आरोपी को कोर्ट के सामने पेश किया गया। जहां से कोर्ट ने जेल भेज दिया है।