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पत्रकारों से नाराज सीएचसी अधीक्षिका का तुगलकी फरमान, गेट पर चस्पा किया नोटिस

Mon, 18 Jun 2018 01:44 PM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ Updated Mon, 18 Jun 2018 01:44 PM IST
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chc Superintendent ban journalist to enter in hospital
सीएचसी काकोरी में चस्पा किया गया नोटिस

काकोरी सीएचसी में फालतू व्यक्ति बहुत आते हैं। सीएचसी प्रभारी परेशान हैं। इस कदर कि उन्होंने जगह-जगह नोटिस चस्पा करवा दिया कि फालतू और पत्रकार बगैर उनकी इजाजत के अस्पताल परिसर में प्रवेश नहीं कर सकते। पर फालतू कौन, इसे सीएचसी अधीक्षक डॉ. ज्योति कामले ने साफ नहीं किया।

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नोटिस चौंकाने वाली है। इसके पहले दो शब्द ‘फालतू व्यक्ति’ चौंकाते हैं। ऐसे लोगों का प्रवेश तो वैसे भी अस्पताल में नहीं होना चाहिए। अगर ऐसा हो रहा है तो किसकी शह पर। यह शह देने वाला कोई अंदर का ही तो होगा।
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फिर ऐसे लोगों का प्रवेश नोटिस से तो रुकेगा नहीं। ऐसे लोग सुरक्षा के लिए घातक हो सकते हैं। पर उनकी रोक के लिए तो सख्त कदम उठाए जाने चाहिए थे। बहरहाल समस्या ये भी है कि फालतू व्यक्ति की पहचान क्या है, जिसे नोटिस में साफ नहीं किया गया।

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ये वर्गीकरण कुछ खास है...सब एक कतार में

आगे लिखा है- संवाददाता (संवादाता), संवाद सूत्र, रिपोर्टर और पत्रकारों का बिना अधीक्षक, अनुमति के चिकित्सालय परिसर में प्रवेश वर्जित है। यहां जो वर्गीकरण है उससे साफ हो जाता है कि सीएचसी प्रभारी को असली पीड़ा पत्रकारों से है।

कभी इन पर भी तो नोटिस चस्पा किया होता
सीएचसी में डॉक्टरों और दवाओं की कमी है। प्रसूता के इलाज में लापरवाही के मामले आते रहते हैं। मरीजों के खाने में अनियमितताएं, साफ-सफाई व्यवस्था बदहाल है। पर, इन सब पर सीएचसी प्रभारी नोटिस नहीं चस्पा करातीं।

कहीं पर निगाहें...कहीं पर निशाना, नोटिस तो सिर्फ बहाना
जाहिर है कि समस्याओं का समाधान करने के बजाय सीएचसी अधीक्षक  उन्हें छिपाने का प्रयास करती हैं। इसलिए सीधे पत्रकारों का प्रवेश वर्जित करतीं तो सवाल उठता, इसलिए पहले दो शब्द जोड़े-फालतू व्यक्ति।
 

कभी इनको भी तो रोका होता...

नोटिस पर लोग सवाल कर रहे हैं। उनका कहना है कि अधीक्षक ने कभी निजी अस्पतालों के दलालों पर भी तो शिकंजा कसा होता। कर्मचारी भी इसे दबी जुबान में मानते हैं कि निजी अस्पतालों के दलालों की पहुंच अस्पताल परिसर तक है। ये दलाल फार्मासिस्ट रूम, अल्ट्रासाउंड, एक्स-रे रूम समेत वार्डों में घूमा करते हैं। अब ये कथा सुनाने तो आते नहीं होंगे। 

हमारा पक्ष नहीं लिया, इसलिए लगाई रोक
मेरा पक्ष जाने बगैर एक जून को खबर प्रकाशित हुई थी। इसलिए यह नोटिस चस्पा कराया गया।
डॉ. ज्योति कामले, अधीक्षिका, सीएचसी काकोरी

प्रभारी से जवाब तलब किया है
मामले की शिकायत आई थी। सीएचसी प्रभारी से नोटिस हटाने के निर्देश दिए गए हैं। वहीं सीएचसी प्रभारी को इस तरह का नोटिस चस्पा कराने पर जवाब मांगा गया है।
डॉ. नरेंद्र अग्रवाल,सीएमओ 

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