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पशुधन विभाग में टेंडर के नाम पर करोड़ों ठगने के 10 आरोपियों के खिलाफ आरोप पत्र दाखिल

Fri, 11 Sep 2020 02:51 PM IST
पंकज श्रीवास्‍तव न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ Published by: पंकज श्रीवास्‍तव Updated Fri, 11 Sep 2020 02:51 PM IST
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charge sheet filed against ten accused of cheating crores in the name of tenders in pashudhan vibhag
- फोटो : demo pic
पशुधन विभाग में ठेका दिलाने के नाम पर इंदौर के कारोबारी से ठगी के मामले में पुलिस ने जेल में बंद सभी 10 आरोपियों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल कर दी है। लखनऊ के हजरतगंज कोतवाली में कारोबारी मंजीत की तरफ से दर्ज मुकदमे की विवेचना गोमतीनगर की एसीपी डॉ. बीनू सिंह कर रही थी। 
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एसीपी ने बताया कि पशुधन विभाग में 292 करोड़ रुपये का आटा सप्लाई का टेंडर दिलाने के नाम पर इंदौर के कारोबारी मंजीत सिंह भाटिया से ठगी की गई थी। जांच में ठगी की पुष्टि होने के बाद कारोबारी की तरफ से  11 जालसाजों के खिलाफ हजरतगंज कोतवाली में ठगी व धोखाधड़ी की धाराओं में एफआईआर दर्ज कराई गई थी।
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एसटीएफ ने इनमें से  पशुधन राज्यमंत्री जय प्रकाश निषाद के निजी सचिव धीरज कुमार देव, प्रधान सचिव रजनीश दीक्षित, कथित पत्रकार एके राजीव, पत्रकार अनिल राय, रूपक राय, उमाशंकर तिवारी और आशीष राय को पहले गिरफ्तार कर जेल भेजा था। बाद में आरोपियों के तीन मददगार त्रिपुरेश पांडेय और सचिन व होमगार्ड रघुबीर को भी पकड़ा गया था।
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एनकाउंटर तक की धमकी

जांच में सामने आया था कि कारोबारी से रुपया ऐंठने के लिए ठगों ने पशुधन राज्यमंत्री के निजी सचिव के कमरे का इस्तेमाल किया था। मंत्री की गाड़ी में बैठाकर उसे सचिवालय लाया जाता था। पशुधन राज्यमंत्री के निजी सचिव धीरज कुमार के कार्यालय को पशुपालन विभाग के उपनिदेशक एसके मित्तल का कार्यालय बनाया गया और आशीष राय को वहां अधिकारी के तौर पर बैठाकर मंजीत से मुलाकात कराई गई।

टेंडर के बारे में बातचीत के बाद मंजीत को फर्जी वर्क आर्डर देकर रुपये ऐंठे गए। मामले का खुलासा होने पर मंजीत ने अपना रुपया वापस मांगा तो उसे नाका थाना के एक सिपाही के जरिए धमकाया गया। उसे एनकाउंटर की धमकी तक दी गई।

इस मामले में आईपीएस दिनेश चंद्र दुबे और अरविंद सेन का भी नाम आया था। निलंबन के समय दिनेश चंद्र दुबे डीआईजी रूल्स एंड मैनुअल्स थे जबकि अरविंद सेन पीएसी आगरा में बतौर डीआईजी तैनात थे। जांच के बाद शासन ने दोनों को निलंबित कर दिया था। इन्हीं लोगों ने गुजरात के अहमदाबाद निवासी नीलम नरेंद्र भाई पटेल से भी नमक की आपूर्ति का ठेका दिलाने के नाम पर मोटी रकम ऐंठी थी।
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