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सोशल मीडिया पर फैल रही अराजकता पुलिस के लिए बनी सिर दर्द, रोकथाम में नाकाम

Thu, 28 Mar 2019 10:58 PM IST
Amulya Rastogi न्यूज डेस्क, अमर उजाला लखनऊ
न्यूज डेस्क, अमर उजाला लखनऊ Published by: Amulya Rastogi Updated Thu, 28 Mar 2019 10:58 PM IST
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chaos on social media becoming headache for police, unable to cure
फेसबुक फेक न्यूज
डीजीपी मुख्यालय ने सोशल मडिया पर होने वाली अराजकता से निपटने के लिए सोशल मीडिया कंप्लेंट सेल का गठन किया गया है। लेकिन सोशल मीडिया पर फैली अराजकता रोकना पुलिस के लिए किसी चुनौती से कम नहीं है। ट्विटर हो या फेसबुक या फिर व्हाट्स एप ग्रुप। 
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हर जगह न सिर्फ धार्मिक उन्माद फैलाने की कोशिश हो रही है बल्कि जातीय आधार पर लोगों को अपने-अपने पक्ष में करने की कोशिश कर रही है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि पुलिस सिर्फ उसी पर कार्रवाई करेगी जहां से शिकायत मिलेगी।
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फेसबुक पर प्रदेश के मौजूदा मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नाम से दो दर्जन भर से अधिक प्रोफाइल सक्रिय है। इसी तरह अखिलेश यादव के नाम से डेढ़ दर्जन से अधिक प्रोफाइल सक्रिय है। वहीं मायावती की फेसबुक प्रोफाइल की संख्या भी इसी के आसपास है। जाहिर है इन नेताओं की एक ही प्रोफाइल वास्तविक प्रोफाइल होगी। ऐसे में बाकी फर्जी प्रोफाइल को बंद करा पाना पुलिस के लिए आसान नहीं है। 
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इसी तरह ट्विटर पर भी कई बड़े नेताओं की एक से अधिक प्राफाइल बनी हुई। यह बात अलग है कि ट्विटर प्रतिष्ठित व्यक्तियों की प्रोफाइल को सत्यापित करता है और उस पर ब्लू टिक लग जाता है। लेकिन नेताओं की तस्वीरों का इस्तेमाल करके सैकड़ों की संख्या में फर्जी प्रोफाइल बनी हुई है, जिसके माध्यम से अनाप-शनाप मैसेज भेजे जा रहे हैं। इनकी रोकथाम के लिए कोई कारगर व्यवस्था पुलिस के पास फिलहाल नहीं है।

सबसे पहले किसने भेजा मैसेज, पता करना मुश्किल

वहीं व्हाट्स एप पुलिस के लिए सबसे बड़ा सिर दर्द है। मैसेज की चेन तलाशना किसी भी एजेंसी के लिए आसान नहीं है। चुनाव के मौसम में इस तरह के मैसेज जमकर फारवर्ड किए जा रहे हैं। व्हाट्स एप पर अफवाह फैलाना, धार्मिक उन्माद वाले वीडिया या संदेश और अपत्तिजनक टिप्पणियों की भरमार है। 

यहां तक कि कई महीने पुराने वीडियो को भी ताजा वीडियो बताकर फारवर्ड किया जा रहा है। इस तरह की शिकायतें सोशल मीडिया के माध्यम से पुलिस के पास पहुंचने भी लगी हैं। इन पर कितनी कार्रवाई हुई, फिलहाल इसका आंकड़ा डीजीपी मुख्यालय ने नहीं दिया है। 

डीआईजी अपराध केबी सिंह का इस बारे में कहना है कि उनके पास अत्याधुनिक उपकरण हैं और उनके बेहतर इस्तेमाल के लिए विशेषज्ञ हैं जो इसी तरह की शिकायतों पर काम करेंगे और उसका निस्तारण करेंगे।
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