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लखनऊ में कमिश्नर प्रणाली लागू होने से रेंज और जोन के अफसरों का कद घटा! अब ये है हाल

Thu, 16 Jan 2020 01:41 PM IST
ishwar ashish न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ Published by: ishwar ashish Updated Thu, 16 Jan 2020 01:41 PM IST
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Changes in Police Department after execution of Police Commissioner System.
- फोटो : amar ujala

लखनऊ और नोएडा में कमिश्नर प्रणाली लागू होने से नोएडा पर भले ही कोई खास असर न पड़ा हो, लेकिन लखनऊ पर इसका असर जरूर दिख रहा है। लखनऊ रेंज कार्यालय हो या जोन कार्यालय, दोनों ही कार्यालय स्थल इन आईजी और एडीजी के कार्यक्षेत्र से बाहर रहेंगे। यानी दोनों ही पद भले ही बरकरार हों लेकिन कद काफी कम हो गया।

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लखनऊ रेंज में अब लखनऊ जिले के नाम पर ग्रामीण क्षेत्र का माल, मलिहाबाद, बख्शी का तालाब, इटौंजा और निगोहा थाना ही रहेगा। वहीं अन्य जिलों में उन्नाव, हरदोई, रायबरेली, सीतापुर और लखीमपुर खीरी आएगा। यानी पूरे रेंज में कोई भी बड़ा जिला शामिल नहीं है। अभी तक रेंज के आईजी हों या जोन के एडीजी, राजधानी में होने वाले किसी भी बड़े कार्यक्रम की कमान इन्हीं अफसरों के हाथों में होती थी।
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डीजीपी से लेकर मुख्यमंत्री कार्यालय तक इन अफसरों से ही सवाल-जवाब करते थे, लेकिन अब ऐसा नहीं होगा। लखनऊ पुलिस आयुक्त के अधीन तैनात अफसरों का रेंज के आईजी और जोन के एडीजी से कोई मतलब नहीं रहेगा। यानी राजधानी में होने वाले कार्यक्रमों की जिम्मेदारी पुलिस आयुक्त की होगी। चर्चा यह भी है कि इन अफसरों का कद भले ही घट गया हो लेकिन राजधानी की सारी सुविधाओं के साथ सबसे कम टेंशन भी इन अधिकारियों को रहेगी।
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वहीं, नोएडा में कमिश्नर प्रणाली लागू होने से रेंज और जोन की व्यवस्था पर कोई खास असर नहीं पड़ेगा। नोएडा अभी तक मेरठ रेंज में आता था, लेकिन अब उसे रेंज से बाहर कर कमिश्नर प्रणाली के तहत लाया जा चुका है। इसके बावजूद मेरठ रेंज में मेरठ के अलावा गाजियाबाद जैसा बड़ा शहर इसका हिस्सा रहेगा। इसके अलावा बुलंदशहर, बागपत, हापुड़ जिला मेरठ रेंज में शामिल है।

जॉइंट कमिश्नर और अन्य अफसरों के लिए तलाशी जा रही जगह

पुलिस कमिश्नर सुजीत पांडेय फिलहाल लखनऊ एसएसपी के बंगले और कार्यालय में बैठेंगे, लेकिन अन्य अधिकारी कहां बैठेंगे, इस पर अभी निर्णय नहीं हो सका है। लखनऊ कमिश्नरी में तैनात किए गए दो जॉइंट कमिश्नर और 10 पुलिस उपायुक्तों का कार्यालय कहां होगा, यह अभी तय नहीं है। इनके लिए लखनऊ में कार्यालय की तलाश शुरू हो गई है।

एटीएस का पुराना कार्यालय, पुलिस मॉडर्न कंट्रोल रूम और इंदिरा भवन में खाली हुए कार्यालय में से किसी एक पर विचार किया जा रहा है। एटीएस के पुराने कार्यालय की साफ-सफाई कराई जा रही है ताकि जरूरत पड़ने पर इसका इस्तेमाल किया जा सके।

कमिश्नर सिस्टम में तैनात किए गए अफसरों का होगा प्रशिक्षण

लखनऊ और नोएडा में कमिश्नर सिस्टम लागू होने के बाद अधिकारियों को किस तरह काम करना है, सिखाया जाएगा। इसके लिए एक सप्ताह का प्रशिक्षण कार्यक्रम चलाया जाएगा। हालांकि प्रशिक्षण के लिए अभी दिन और समय तय नहीं किया गया है।
सूत्रों का कहना है कि इस प्रशिक्षण कार्यक्रम में पुलिस आयुक्त प्रणाली में किस तरह काम किया जाएगा। एसीपी, एडीशनल डीसीपी, डीसीपी, जॉइंट डीसीपी और सीपी के कार्यक्षेत्र क्या होंगे। कौन-से मामले किस कोर्ट में देखे जाएंगे, इन सबकी जानकारी प्रशिक्षण के जरिए दी जाएगी।

कार्यक्षेत्र से बाहर का एसीपी करेगा जमानत पर सुनवाई
पुलिस कर्मी निरंकुश न हों और भ्रष्टाचार को बढ़ावा न मिले, इसके लिए भी व्यवस्था की जा रही है। शांति भंग की 151 जैसी धारा में चालान के बाद जमानत के लिए सुनवाई भी संबंधित थानाक्षेत्र से बाहर के सर्किल या फिर मुख्यालय का कोई एसीपी उसकी सुनवाई करेगा।

सर्वश्रेष्ठ त्रिपाठी आंध्र प्रदेश में रह चुके हैं डीसीपी
आंध्र प्रदेश काडर के 2006 बैच के आईपीएस सर्वश्रेष्ठ त्रिपाठी प्रतिनियुक्ति पर यूपी आए हैं। वह आंध्र प्रदेश के कई जिलों में पुलिस उपायुक्त के रूप में काम कर चुके हैं। उन्हें विशेष रूप से लखनऊ में तैनाती दी गई है ताकि उनके अनुभव का लाभ यहां के पुलिस अधिकारियों को मिल सके।

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