टीम का गठन व निकाय चुनाव होंगे महेन्द्रनाथ पांडेय की पहली परीक्षा
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प्रदेश भाजपा की नई कार्यकारिणी का गठन और नवंबर में होने वाले निकाय चुनाव में नए प्रदेश अध्यक्ष डॉ. महेन्द्रनाथ पांडेय के राजनीतिक कौशल की असली परीक्षा होगी।
उन्हें केंद्रीय मंत्रिमंडल में शामिल प्रदेश के भारी-भरकम मंत्रियों व राष्ट्रीय नेताओं के साथ ही सीएम योगी आदित्यनाथ व संगठन के ओहदेदारों से बेहतर समन्वय बनाना होगा।
राष्ट्रीय नेतृत्व की उम्मीद पर खरा उतरना और कार्यकर्ताओं की अपेक्षाओं को पूरा करना उनके लिए किसी चुनौती से कम नहीं है।
डॉ. पांडेय की प्रदेश अध्यक्ष पद पर ताजपोशी ऐसे समय हुई है जब पार्टी ने मिशन 2019 को लेकर अपनी तैयारी शुरू कर दी है।
पीएम नरेन्द्र मोदी और राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह ने 2019 में 2014 से भी बड़े आंकड़े के साथ इतिहास दोहराने का लक्ष्य रखा है। इसे पूरा करने के लिए मोदी व शाह को सबसे ज्यादा उम्मीदें उत्तर प्रदेश से हैं।
र्टी 2014 में 73 सीटों पर जीत के मुकाबले 2019 में सभी 80 सीटों पर जीत का लक्ष्य लेकर आगे बढ़ रही है। राष्ट्रीय नेतृत्व की उम्मीदों पर खरा उतरने के लिए पहले दौर में पांडेय को संगठन में नई टीम का गठन करना होगा।
इसके लिए केंद्रीय मंत्रियों, राष्ट्रीय पदाधिकारियों, मुख्यमंत्री, प्रदेश सरकार के मंत्रियों, विधायकों और सांसदों को संतुष्ट करने के साथ ही जातिगत समीकरण भी साधने होंगे।
नवंबर में निकाय चुनाव में शत प्रतिशत सीटों पर कमल खिलाने का लक्ष्य पूरा करने के लिए टिकट वितरण में सभी को खुश करने के लिए फूंक-फूंक कर कदम रखना होगा। मिशन 2019 की कामयाबी के लिए उन पर दबाव भी रहेगा।
योगी-बंसल से बनाना होगा समन्वय
पांडेय के पदभार ग्रहण से पहले ही केशव ने यह कहते हुए बंसल की भूमिका का संकेत दे दिया था कि जिसके साथ सुनील बंसल जैसा महामंत्री हो उस अध्यक्ष का सफल होना निश्चित है। पांडेय ने पदभार ग्रहण करने से पहले कहा था कि सामंजस्य और समन्वय बनाना उनका स्वभाव है।
लोगों को मनाते हुए वे कई बार थक जाते हैं। इस नाते कार्यकारिणी गठन से लेकर निकाय चुनाव में टिकट वितरण में उनके इस स्वभाव की परीक्षा भी होगी।
केंद्रीय मंत्रियों, राष्ट्रीय नेताओं को करना होगा संतुष्ट
डॉ. महेन्द्रनाथ पांडेय को प्रदेश से जुड़े अहम फैसलों में केंद्रीय गृहमंत्री राजनाथ सिंह, उमा भारती, मनोज सिन्हा, संतोष गंगवार, डॉ. महेश शर्मा, राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग के अध्यक्ष रामशंकर कठेरिया जैसे नेताओं को संतुष्ट करना होगा।
इनके अलावा राष्ट्रीय महामंत्री अनिल जैन, पूर्व केंद्रीय मंत्री कलराज मिश्र व अन्य नेताओं को भी संतुष्ट करना होगा। सबसे बड़ी चुनौती लखनऊ, गोरखपुर, इलाहाबाद, कानपुर और आगरा नगर निगम में महापौर के टिकट को लेकर होगी। इन जगहों पर संगठन, संघ और केंद्र व राज्य सरकार के मंत्रियों और सांसदों के अपने-अपने दावेदार मैदान में हैं।