यूपी के नए मुख्य सचिव के सामने चुनौतियों व अपेक्षाओं का अंबार, समय बेहद कम
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उत्तर प्रदेश के नवनियुक्त मुख्य सचिव डॉ. अनूप चंद्र पांडेय के पास समय कम है। उनका कार्यकाल फरवरी 2019 तक ही है, लेकिन उनके सामने चुनौतियों व अपेक्षाओं का अंबार है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने पांडेय को लोकसभा चुनाव की शुरू हो रही गहमागहमी के बीच कई वरिष्ठ अफसरों को नजर अंदाज कर मुख्य सचिव की कुर्सी सौंपकर सरकारी के साथ सियासी समीकरण भी साध लिए। अब पांडेय के सामने अफसरशाही को साथ लेकर मुख्यमंत्री के इस फैसले को सही साबित करने की चुनौती है।
योगी सरकार ने सत्ता में आने के बाद कई बदलाव के काम किए हैं। इसके बावजूद शासन और प्रशासन में कई स्तर पर लोग परेशान महसूस कर रहे हैं। पांडेय के सामने आम लोगों की मुश्किलों को समझना और उसे दूर करने के लिए तेजी से कदम उठाना किसी चुनौती से कम नहीं होगा। मुख्यमंत्री योगी ने मौजूदा मुख्य सचिव राजीव कुमार की विदाई के पहले ही नए मुख्य सचिव के रूप में पांडेय की नियुक्ति कर अपना काम कर दिया है। अब शनिवार से ही लोगों की निगाहें पांडेय के काम पर होंगी।
‘जन-सुनवाई’ की विश्वास बहाली सबसे बड़ी चुनौती
योगी सरकार ने आम लोगों की शिकायतों की सुनवाई के लिए ‘जन-सुनवाई’ पोर्टल को मुख्यमंत्री कार्यालय के निर्देशन में शुरू कराया। मकसद था कि इस पर लोग शिकायत करेंगे तो नीचे के अफसर उस पर गंभीरता से कार्यवाही करेंगे। पर, यह प्रयोग लोगों की सहूलियत की जगह नाराजगी का सबब बनता जा रहा है। इस सिस्टम में विश्वास बहाली सबसे बड़ी चुनौती मानी जा रही है।
इन मोर्चों पर रहेगी कड़ी चुनौती
मुख्यमंत्री योगी ने भ्रष्टाचार से जुड़े मामलों के खिलाफ कार्रवाई के लिए एंटी करप्शन पोर्टल का एलान कर दिया। इस पोर्टल पर लोग भ्रष्टाचार से जुड़ी बातचीत व घूसखोरी के ऑडियो-वीडियो खुद रिकॉर्ड कर अपलोड कर सकते हैं। तमाम लोग शिकायत भी कर रहे हैं, मगर यह पोर्टल भी निष्प्रभावी होता नजर आ रहा है।
पुलिस की कार्यशैली सबसे बड़ी मुसीबत
सरकार ने पुलिस की कार्यशैली में सुधार के तमाम कदम उठाए हैं। मगर, पुलिसिया कार्यशैली आम लोगों की नाराजगी की सबसे बड़ी वजह बनी हुई है।
निवेश के दावों को हकीकत में बदलने पर रहेगी नजर
अनूप को मुख्य सचिव की कुर्सी मिलने में कर्जमाफी योजना का सफल क्रियान्वयन और फरवरी की कामयाब इन्वेस्टर्स समिट बेहद अहम साबित हुई। समिट में हुए एमओयू जमीन पर किस हद तक उतार पाते हैं, इस पर भी नजरें होंगी।
इन्फ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट को रफ्तार मिलनी बाकी
प्रदेश सरकार पूर्वांचल एक्सप्रेस वे, बुंदेलखंड व गोरखपुर लिंक एक्सप्रेस वे, डिफेंस कॉरिडोर के अलावा तमाम इन्फ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट पर काम कर रही है। लोकसभा चुनाव से पहले इन पर रफ्तार के साथ काम नजर आने के लिए क्या रणनीति अपनाई जाती है, इस पर भी लोगों की निगाहें होंगी।
धार्मिक एजेंडे पर खास नजर
सी तरह धार्मिक स्थलों के विकास व कई शहरों में मेट्रो के काम को लेकर खूब दावे होते रहे हैं। मगर, उनके जमीनी काम को लेकर अब भी इंतजार ही है। ये प्रोजेक्ट किस तरह जमीन पर तेजी से नजर आएंगे, यह भी देखने वाली बात होगी।
कर्मचारियों की बढ़ती नाराजगी रोकने की चुनौती
लोकसभा चुनाव नजदीक है और सरकारी कर्मचारी आंदोलन का रुख दिखाते नजर आ रहे हैं। कर्मचारियों की शिकायत है कि अफसर उनकी जायज मांगों को भी नजर अंदाज कर रहे हैं। राज्य कर्मचारियों सहित कई संगठन हड़ताल की चेतावनी दे चुके हैं। नए मुख्य सचिव के सामने कर्मचारियों की नाराजगी दूर करना किसी चुनौती से कम नहीं होगा।