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पुलिस के लिए चुनौती बना यूपी सीएम आदित्यनाथ योगी का ये फरमान
ब्यूरो/अमर उजाला, लखनऊ
Updated Fri, 13 Oct 2017 02:10 PM IST
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सीएम आदित्यनाथ योगी
- फोटो : डेमो
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मुख्यमंत्री का निर्देश पुलिस के लिए चुनौती साबित होने जा रहा है। फिलहाल पुलिस महकमे के पास ऐसा कोई आंकड़ा नहीं है जिससे पता किया जा सके कि प्रदेश में अवैध रूप से कितने बांग्लादेशी रह रहे हैं।
खासतौर पर पश्चिमी उत्तर प्रदेश के कई जिलों में हजारों बांग्लादेशी झुग्गी-झोपड़ियों में रहते हैं।
इसमें नोएडा और गाजियाबाद के अलावा मेरठ, सहारनपुर, बागपत, बुलंदशहर जिले में इनकी संख्या काफी ज्यादा है। खास बात यह कि अधिकतर बांग्लादेशियों ने यहां का राशन कार्ड या वोटर आईडी बनवा रखी है। ऐसे में पुलिस के लिए यह साबित करना चुनौती होगा कि कौन बांग्लादेशी है और कौन भारतीय। पहले भी कुछ बांग्लादेशियों को वापस भेजने की कोशिश हो चुकी है।
लेकिन भारतीय पहचान पत्र होने के कारण न्यायालय से उन्हें राहत मिल गई थी। कहा तो यह भी जा रहा है कि राजनीतिक स्वार्थ के लिए कुछ लोगों ने इनके वोटर आईडी बनवा दिए। ऐसे बांग्लादेशियों की संख्या 10 से 15 प्रतिशत ही होगी जिनके पास भारतीय पते की कोई आईडी नहीं है। बाकी 85 से 90 प्रतिशत के पास कोई न कोई परिचयपत्र है।
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मुख्यमंत्री ने विदेशियों को प्रदेश से बाहर करने के लिए कहा है। प्रदेश की सीमावर्ती सभी राज्यों में भाजपा की सरकार है। हरियाणा, राजस्थान, बिहार, छत्तीसगढ़, मध्यप्रदेश और उत्तराखंड की सीमाएं प्रदेश से लगती हैं। इनमें अगर खदेड़े जाते हैं तो पड़ोसी राज्यों को परेशानी होगी। अगर बांग्लादेश तक इनको छोड़ने की योजना बनती है तो बांग्लादेश इन्हें बिना आईडी के क्यों स्वीकार करेगा? यही सवाल पुलिस को परेशान कर रहे हैं।
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खासतौर पर पश्चिमी उत्तर प्रदेश के कई जिलों में हजारों बांग्लादेशी झुग्गी-झोपड़ियों में रहते हैं।
इसमें नोएडा और गाजियाबाद के अलावा मेरठ, सहारनपुर, बागपत, बुलंदशहर जिले में इनकी संख्या काफी ज्यादा है। खास बात यह कि अधिकतर बांग्लादेशियों ने यहां का राशन कार्ड या वोटर आईडी बनवा रखी है। ऐसे में पुलिस के लिए यह साबित करना चुनौती होगा कि कौन बांग्लादेशी है और कौन भारतीय। पहले भी कुछ बांग्लादेशियों को वापस भेजने की कोशिश हो चुकी है।
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लेकिन भारतीय पहचान पत्र होने के कारण न्यायालय से उन्हें राहत मिल गई थी। कहा तो यह भी जा रहा है कि राजनीतिक स्वार्थ के लिए कुछ लोगों ने इनके वोटर आईडी बनवा दिए। ऐसे बांग्लादेशियों की संख्या 10 से 15 प्रतिशत ही होगी जिनके पास भारतीय पते की कोई आईडी नहीं है। बाकी 85 से 90 प्रतिशत के पास कोई न कोई परिचयपत्र है।
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मुख्यमंत्री ने विदेशियों को प्रदेश से बाहर करने के लिए कहा है। प्रदेश की सीमावर्ती सभी राज्यों में भाजपा की सरकार है। हरियाणा, राजस्थान, बिहार, छत्तीसगढ़, मध्यप्रदेश और उत्तराखंड की सीमाएं प्रदेश से लगती हैं। इनमें अगर खदेड़े जाते हैं तो पड़ोसी राज्यों को परेशानी होगी। अगर बांग्लादेश तक इनको छोड़ने की योजना बनती है तो बांग्लादेश इन्हें बिना आईडी के क्यों स्वीकार करेगा? यही सवाल पुलिस को परेशान कर रहे हैं।
एडीजे बोले, सीएम के निर्देश का होगा पालन
डेमो
- फोटो : डेमो पिक
अवैध रूप से झुग्गी झोपड़ियों में रहने वाले यह बांग्लादेशी देश और प्रदेश की सुरक्षा के लिए भी खतरा बनते रहे हैं। पिछले दिनों यूपी एटीएस ने अंसारुल्लाह बांग्ला टीम के कुछ आतंकियों को गिरफ्तार किया था जिनके पास आधार और वोटर आईडी बरामद हुआ था। वहीं लखनऊ में पड़ी कई डकैती में भी इनके शामिल होने की पुष्टि हुई थी। इसी तरह पश्चिमी उत्तर प्रदेश के एक दो जिलों में रोहंगियों के रहने की रिपोर्ट भी खुफिया एजेंसियों के पास है।
एक अधिकारी ने बताया कि बांग्लादेशियों को यूपी से बाहर करना नामुमकिन है। इनकी घुसपैठ लोगों के किचन और बेडरूम तक है। क्योंकि ज्यादातर बांग्लादेशी लोगों के घरों में साफ-सफाई, खाना बनाने और बर्तन धोने का काम करते हैं। हालांकि एडीजी कानून-व्यवस्था आनंद कुमार का कहना है कि मुख्यमंत्री के निर्देश का पालन कराया जाएगा। अवैध रूप से रह रहे विदेशियों को बाहर करने की रणनीति बन रही है।
पिछले 25 सालों में भारतीय वीजा लेकर लखनऊ आए 31 पाकिस्तानी नागरिक लापता हैं। यह सभी लखनऊ आने के बाद कहां गए इसका कोई पता नहीं है। राजधानी में विदेशियों को लोकल इंटेलीजेंस यूनिट में आमद दर्ज करानी होती है। पाकिस्तानी नागरिकों के लिए अलग रजिस्टर है। इसमें यह भी दर्ज करना होता है कि वह किसके घर आए हैं कितने दिन रुकेंगे और जाने से पहले इस कार्यालय को सूचित करेंगे। लेकिन 31 नागरिकों का कोई पता नहीं है कि वह कहां गए?
एक अधिकारी ने बताया कि बांग्लादेशियों को यूपी से बाहर करना नामुमकिन है। इनकी घुसपैठ लोगों के किचन और बेडरूम तक है। क्योंकि ज्यादातर बांग्लादेशी लोगों के घरों में साफ-सफाई, खाना बनाने और बर्तन धोने का काम करते हैं। हालांकि एडीजी कानून-व्यवस्था आनंद कुमार का कहना है कि मुख्यमंत्री के निर्देश का पालन कराया जाएगा। अवैध रूप से रह रहे विदेशियों को बाहर करने की रणनीति बन रही है।
पिछले 25 सालों में भारतीय वीजा लेकर लखनऊ आए 31 पाकिस्तानी नागरिक लापता हैं। यह सभी लखनऊ आने के बाद कहां गए इसका कोई पता नहीं है। राजधानी में विदेशियों को लोकल इंटेलीजेंस यूनिट में आमद दर्ज करानी होती है। पाकिस्तानी नागरिकों के लिए अलग रजिस्टर है। इसमें यह भी दर्ज करना होता है कि वह किसके घर आए हैं कितने दिन रुकेंगे और जाने से पहले इस कार्यालय को सूचित करेंगे। लेकिन 31 नागरिकों का कोई पता नहीं है कि वह कहां गए?