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केंद्र ने खड़े किये हाथ, गहराएगा बिजली संकट

Sun, 31 Aug 2014 04:04 PM IST
अनिल श्रीवास्तव/अमर उजाला, लखनऊ
अनिल श्रीवास्तव/अमर उजाला, लखनऊ Updated Sun, 31 Aug 2014 04:04 PM IST
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Central is unable to help in power crisis.

उत्तरी ग्रिड से जुड़े यूपी समेत सभी नौ राज्यों में बिजली संकट और गहराने के आसार हैं। मांग में लगातार हो रही वृद्धि और उपलब्धता में कमी को देखते हुए उत्तरी क्षेत्र लोड डिस्पैच सेंटर (एनआरएलडीसी) ने राज्यों को अलर्ट जारी करके सतर्कता बरतने की सलाह दी है।

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बिजली की भारी कमी को देखते हुए राज्यों को खपत में कमी लाने के उपाय करने को कहा गया है। प्रदेश में भी बिजली संकट खत्म होता नहीं दिखाई दे रहा है। उद्योगों से लेकर गांवों और महानगरों तक जबरदस्त कटौती से जनजीवन प्रभावित है।
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बिजली को लेकर जिलों में लोग सड़कों पर उतर रहे हैं। कानून-व्यवस्था के लिए भी बिजली चुनौती बनती जा रही है।

पर्याप्त बारिश न होने और गर्मी के चलते उत्तरी ग्रिड से जुड़े राज्यों में बिजली की मांग 50,000 मेगावाट से ऊपर पहुंच गई है जबकि उपलब्धता 45,000 मेगावाट के आसपास ही है।
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केंद्र के पास भी बिजली की कमी

Central is unable to help in power crisis.

केंद्रीय और राज्यों के बिजलीघरों के उत्पादन में गिरावट के कारण ग्रिड पर दबाव काफी बढ़ गया है। खतरे को भांपते हुए एनआरएलडीसी ने संबंधित राज्यों को अलर्ट जारी करके हालात पर नजर रखने की हिदायत दी है।

एनआरडीसी ने राज्यों को भेजे संदेश में कहा है कि उत्तरी ग्रिड में बिजली ज्यादा मांग बनी हुई है जबकि उपलब्धता कम हो गई है। ऐसे में स्टेट लोड डिस्पैच सेंटर (एसएलडीसी) अपने स्तर पर पूरी सतर्कता बरतें और खपत को नियंत्रित रखें जिससे ग्रिड को सुरक्षित रखा जा सके।

बिजली की किल्लत का अंदाजा केवल इससे लगाया जा सकता है कि केंद्र के 11,297 मेगावाट क्षमता के ताप बिजलीघरों से 8,000 मेगावाट के आसपास ही बिजली का उत्पादन हो है।

कोयला मिलने बाद भी‌ दिक्कत

Central is unable to help in power crisis.

केंद्रीय जल विद्युत गृहों की इकाइयां भी पूरी क्षमता से नहीं चल पा रही हैं। कमोवेश यही हालात प्रदेश के बिजलीघरों का भी है। 10,037 मेगावाट क्षमता के बिजलीघरों से अधिकतम 5400 मेगावाट बिजली ही मिल पा रही है।

उत्तरी ग्रिड से जुड़े अन्य राज्यों के बिजलीघरों में भी उत्पादन घट गया है। शक्ति भवन स्थित नियंत्रण कक्ष के अभियंताओं का कहना है कि उत्पादन प्रभावित होने की मुख्य वजह बिजलीघरों में पर्याप्त कोयले की उपलब्धता न होना है।

अव्वल तो परियोजनाओं को जरूरत भर कोयले की आपूर्ति नहीं हो पा रही है और जो थोड़ा-बहुत कोयला पहुंच भी रहा है उसकी गुणवत्ता इतनी खराब है कि इकाइयों को सुचारू रूप से चलाना संभव नहीं हो पा रहा है।

केंद्र से जिस तरह के  संकेत मिल रहे हैं उसे देखते हुए अगले कुछ दिनों तक बिजली संकट बना रह सकता है।

प्रदेश में हालात जस के तस

Central is unable to help in power crisis.

प्रदेश में बिजली संकट जस का तस बना हुआ है। हालांकि शनिवार को भी एनर्जी एक्सचेंज से 15 मिलियन यूनिट बिजली खरीदी गई लेकिन उपलब्धता के मुकाबले मांग काफी ज्यादा होने से शेड्यूल के अनुसार आपूर्ति नहीं हो पा रही है।

प्रदेश में बिजली की कुल मांग अब भी 14,000 मेगावाट के आसपास बनी है, जबकि शिड्यूल के अनुसार आपूर्ति के लिए करीब 12,000 मेगावाट बिजली की जरूरत है लेकिन सारी कोशिशों के बावजूद उपलब्धता 11,000 मेगावाट से ऊपर नहीं पहुंच पा रही है।

उद्योगों की बिजली कटौती करके गांवों को छह से आठ घंटे की आपूर्ति की कोशिश की जा रही है फिर भी गांवों को पर्याप्त बिजनी नहीं मिल पा रही है। शहरी क्षेत्रों में भी स्थिति खराब है।

जिलों में 12-13 घंटे तक कटौती होने से लोगों का धैर्य जवाब दे रहा है। अभियंताओं का कहना है कि रविवार को छुट्टी से लोड में थोड़ी कमी होने की उम्मीद है। उपलब्धता रहती है तो गांवों से लेकर शहरों तक ज्यादा आपूर्ति की जा सकती है।

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