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गोमा की खातिर केंद्र-राज्य ने मिलाया हाथ
ब्यूरो/अमर उजाला, लखनऊ
Updated Sat, 28 Jun 2014 02:46 AM IST
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केंद्र की मदद से अब गोमती को निर्मल बनाने का अभियान नए सिरे से शुरू होगा। इसके लिए सबसे पहले गोमा में प्रदूषण को दोबारा परखा जाएगा।
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गोमती को स्वच्छ और निर्मल बनाने की कोशिशों को केंद्र सरकार अमली जामा पहनाएगी।
इसको लेकर केंद्र के जल संसाधन मंत्रालय की टीम ने शुक्रवार को महापौर से मुलाकात की।
भारत सरकार के उपक्रम वाप्कोस लिमिटेड को गोमती के लिए एक नई विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (डीपीआर) बनाने के लिए कहा गया है।
नगर निगम, जल निगम, जल संस्थान, सिंचाई विभाग, पर्यावरण निदेशालय और प्रदूषण नियंत्रण विभाग के अधिकारी इस डीपीआर को बनाने में वाप्कोस के वैज्ञानिकों की मदद करेंगे।
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इस संबंध में वाप्कोस और केंद्र जल संसाधन मंत्रालय के अधिकारियों, महापौर, नगर निगम, जल संस्थान, जल निगम और सिंचाई विभाग के अलावा गोमती स्वच्छता अभियान में जुड़ी संस्था लोकभारती के पदाधिकारियों ने बैठक की।
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बैठक में गोमती नदी की वर्तमान स्थिति और उसे प्रदूषण मुक्त करने के विभिन्न पहलुओं को परखा गया।
पिछले दिनों गृहमंत्री राजनाथ सिंह अपने लोकसभा क्षेत्र में आए हुए थे, तब उनको राजधानी के विकास का पांचसूत्रीय कार्यक्रम दिया गया था।
प्राधिकरण के पूर्व वीसी दिवाकर त्रिपाठी ने इस संबंध में एक रूपरेखा राजनाथ सिंह के समक्ष प्रस्तुत की थी, जिसमें गोमती में प्रवाहित होने वाले कचरे को लेकर दोबारा सर्वे करवाया जाना चाहिए।
दरअसल गोमती की स्वच्छता के लिए कई परियोजनाएं होने के बावजूद कई बड़े नाले सीधे नदी में मिल रहे हैं।
इससे गोमती दिन का पानी हर दिन प्रदूषित हो रहा है। इसके लिए केंद्रीय जल संसाधन मंत्रालय के सहयोग से स्कीम लाई जा सकती है।
नए एसटीपी की जरूरत पर दिया गया बल
बैठक में विशेषज्ञों ने नए सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट बनाए जाने पर बल दिया। इसके साथ ही गोमती में जल बढ़ाने के लिए शारदा नहर के जरिए पानी लाने की भी तैयारी करने को कहा गया।
कानपुर रोड की कॉलोनियों के डिस्चार्ज से निपटने के लिए बिजनौर रोड के पास एसटीपी बनाने का प्रस्ताव बनाया जाएगा।
जिसके डिस्चार्ज का इस्तेमाल कृषि कार्यों के लिए होगा। उसको गोमती में नहीं छोड़ा जाएगा। इसी तरह से कई और बिंदु भी चुने जाएंगे।
कहां गए गोमती में पानी लाने के 18 करोड़
केंद्र सरकार ने गोमा में शारदा से पानी लाने की एक स्कीम के लिए जल निगम को पूर्व में 18 करोड़ रुपये उपलब्ध करवाए थे।
मगर इस धन का अब तक इस्तेमाल ही नहीं किया गया है। एक साल से भी अधिक समय बीत चुका है, जब ये धन उपलब्ध करा दिया गया था।
इस मामले को दिवाकर त्रिपाठी ने उठाया तो अधिकारियों ने कहा कि अब इस बजट का इस्तेमाल होगा।
बैठक में महापौर डॉ. दिनेश शर्मा, पूर्व वीसी एलडीए दिवाकर त्रिपाठी, पूर्व निदेशक नगर निकाय रेखा गुप्ता, अतिरिक्त मुख्य वैज्ञानिक, वाप्कोस लि. डॉ. आरके सिंह व अन्य मौजूद रहे।