इन होनहारों की मेहनत, लगन और जज्बे को सलाम, शारीरिक और आर्थिक बाधाओं को पार कर पाई सफलता, तस्वीरें
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दोनों कोहनी से लिखकर रचा इतिहास
शहर में कुछ बच्चे 90 फीसदी नंबर न लाने का गम मना रहे थे तो वहीं राजाजीपुरम निवासी कमलेश और सोनी गुप्ता के परिवार में बेटे के 52 फीसदी नंबर लाने पर खुशी का माहौल था। दोनों हाथ और एक पैर न होने के बावजूद उनके बेटे हिमांशु ने ये नंबर हासिल किए हैं। सेंट एंजनीज स्कूल के छात्र हिमांशु ने शुरुआत में पैर से लिखने का प्रयास किया।
खास सफलता न मिलने पर उसने दोनों कुहनियों से लिखने का अभ्यास शुरू कर दिया। बेहद परेशानी के बावजूद हिमांशु ने हाईस्कूल की परीक्षा पास की। हिमांशु के पिता कमलेश कुमार गुप्ता टैक्सी चलाते हैं। तीन बहनों के भाई हिमांशु कहते हैं कि वह अपने लिखने की गति थोड़ी और बढ़ाना चाहता है। लिखने की गति न होने की वजह से कई सवालों का जवाब वह अपने मनमाफिक नहीं लिख सका, लेकिन इसकी परवाह किए बिना अगली परीक्षा के साथ ही लिखने का अभ्यास भी करना है।
सिलाई करके चलाया घर, बिटिया ने दी खुशियां
अस्थमा के अटैक की वजह से इंदिरानगर निवासी रुचि शर्मा के पति कृष्ण कुमार शर्मा पिछले चार साल से बिस्तर पर हैं। घर का खर्च चलाने के लिए उन्होंने सिलाई का सहारा लिया। इन परिस्थितयों में घर और बच्चों की पढ़ाई का खर्च निकालने वाली रुचि के लिए बुधवार का दिन खुशियों से भरा रहा।
उनकी बिटिया शांभवी शर्मा ने 10वीं की परीक्षा 90 फीसदी नंबरों के साथ पास की। शांभवी ने बताया कि अपनी मम्मी का संघर्ष देखकर उसे हमेशा मेहनत करने की प्रेरणा मिलती थी। उसके जीवन का एक ही लक्ष्य है कि मम्मी को आईपीएस बनकर दिखाना है।
आर्थिक दुश्वारियां तोड़ बेटी ने हासिल किए 94.8% अंक
इसके बाद बैंक लोन लेकर काम चल जाएगा। प्रियंका का सपना शोध करना है। फिलहाल वह 14 से 15 घंटे रोजाना पढ़ाई करती है