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UP News: छात्रवृत्ति हड़पने के दोषी पांच बाबुओं को तीन साल की कैद, 22 साल बाद आया फैसला... जुर्माना भी लगा

Sun, 15 Dec 2024 09:23 AM IST
भूपेन्द्र सिंह अमर उजाला नेटवर्क, लखनऊ
अमर उजाला नेटवर्क, लखनऊ Published by: भूपेन्द्र सिंह Updated Sun, 15 Dec 2024 09:23 AM IST
सार

छात्रवृत्ति हड़पने के दोषी पांच बाबुओं को तीन-तीन साल कैद की सजा सुनाई गई। मामले में 22 साल बाद फैसला आया है। इन पर जुर्माना भी लगाया गया है। सीबीआई की विशेष अदालत ने यह फैसला सुनाया। 

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CBI special court sentenced five clerks who embezzled scholarships to three years of imprisonment each
अदालत का फैसला। - फोटो : अमर उजाला।

विस्तार

राजधानी लखनऊ में सीबीआई की विशेष अदालत ने धोखाधड़ी कर छात्रवृत्ति हड़पने वाले माध्यमिक शिक्षा विभाग के पांच लिपिकों को तीन-तीन साल की कैद और जुर्माने की सजा सुनाई है। ये सजा कानपुर नगर के जिला विद्यालय निरीक्षक कार्यालय के तत्कालीन वरिष्ठ लिपिक कृष्ण कुमार समेत पांच लोगों को दो अलग-अलग मामलों में सुनाई गई है।

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पहले मामले में तत्कालीन वरिष्ठ लिपिक कृष्ण कुमार और मनोज कुमार द्विवेदी को तीन-तीन साल की कैद और 60 हजार रुपये जुर्माना लगाया है। वहीं दूसरे मामले में मनोज कुमार द्विवेदी, विनोद कुमार मिश्रा, सुलेमान और प्रेम सिंह उर्फ पूती को तीन-तीन साल की कैद के साथ 1.20 लाख रुपये जुर्माना लगाया है।

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2002 को पहला मामला दर्ज किया गया था

दोनों ही मामले हाईकोर्ट के आदेश पर केस दर्ज किए गए थे। सीबीआई ने 18 फरवरी 2002 को पहला मामला दर्ज किया था। इसमें बताया गया कि कानपुर के जिला समाज कल्याण अधिकारी ने 1997 से 1999 में छात्रवृत्ति के लिए नौ लाख 38264 रुपये जारी किए थे। 

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आरोप था कि कानपुर के जिला समाज कल्याण विभाग और जिला विद्यालय निरीक्षक कार्यालय के अधिकारियों और कर्मचारियों ने लोगों के साथ मिलकर धोखाधड़ी करके जाली खाते खोले और धन को हड़प लिया। 

यह है दूसरा मामला

दूसरा मामला में वर्ष 1999-2000 में आरोपी मनोज कुमार द्विवेदी, सुलेमान, विनोद कुमार मिश्र और प्रेम चंद्र ने अन्य अधिकारियों और कर्मचारियों से मिलीभगत करके फर्जी कॉलेज के नाम पर छात्रवृत्ति के छह लाख 44 हजार रुपये हड़प लिए।

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