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यूपी : भ्रष्टाचार के मामले में इलाहाबाद हाईकोर्ट के पूर्व जज जस्टिस एसएन शुक्ला पर मुकदमा चलाने के लिए सीबीआई को मिली मंजूरी

Fri, 26 Nov 2021 02:26 PM IST
पंकज श्रीवास्‍तव न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ Published by: पंकज श्रीवास्‍तव Updated Fri, 26 Nov 2021 02:26 PM IST
सार

अधिकारियों के अनुसार, ट्रस्ट ने कथित तौर पर प्राथमिकी में नामित एक आरोपी को एक अनुकूल आदेश प्राप्त करने के लिए अवैध रूप से रिश्वत दी। उनके मुताबिक, सीबीआई ने एफआईआर दर्ज करने के बाद लखनऊ, मेरठ और दिल्ली में कई जगहों पर तलाशी ली।

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CBI gets nod to prosecute former Allahabad High Court judge Justice SN Shukla in corruption case
इलाहाबाद हाईकोर्ट - फोटो : डेमो

विस्तार

सीबीआई को इलाहाबाद उच्च न्यायालय के सेवानिवृत्त न्यायाधीश न्यायमूर्ति एस एन शुक्ला के खिलाफ भ्रष्टाचार के एक मामले में उनके आदेशों में एक निजी मेडिकल कॉलेज का कथित रूप से पक्ष लेने के लिए मुकदमा चलाने की अनुमति दी गई है। सीबीआई के मुताबिक, इस साल 16 अप्रैल को उन्होंने उच्च न्यायालय में सेवानिवृत्त न्यायाधीश के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत मुकदमा चलाने की अनुमति के लिए आवेदन किया था।

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हाईकोर्ट की मंजूरी से सीबीआई सेवानिवृत्त जज के खिलाफ चार्जशीट दाखिल कर सकती है। एजेंसी ने इलाहाबाद उच्च न्यायालय की लखनऊ पीठ के न्यायमूर्ति शुक्ला के अलावा छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय के सेवानिवृत्त न्यायाधीश आईएम कुद्दूसी, प्रसाद शिक्षा न्यास के भगवान प्रसाद यादव और पलाश यादव, स्वयं ट्रस्ट और निजी व्यक्तियों भावना पांडे और सुधीर गिरी को नामजद किया है। आरोपियों पर भारतीय दंड संहिता (आपराधिक साजिश) की धारा 120बी और भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत आरोप लगाए गए हैं। 
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अधिकारियों के अनुसार, ट्रस्ट ने कथित तौर पर प्राथमिकी में नामित एक आरोपी को एक अनुकूल आदेश प्राप्त करने के लिए अवैध रूप से रिश्वत दी। उनके मुताबिक, सीबीआई ने एफआईआर दर्ज करने के बाद लखनऊ, मेरठ और दिल्ली में कई जगहों पर तलाशी ली। अधिकारियों के अनुसार, प्रसाद इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज को मई 2017 में केंद्र द्वारा 46 अन्य मेडिकल कॉलेजों के साथ-साथ घटिया सुविधाओं और आवश्यक मानदंडों को पूरा करने में विफलता के कारण छात्रों को प्रवेश देने से रोक दिया गया था।
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उन्होंने कहा कि डिबारमेंट के फैसले को ट्रस्ट ने एक रिट याचिका के जरिए सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी थी। उसके बाद, प्राथमिकी में नामित लोगों ने एक साजिश रची और अदालत की अनुमति से याचिका वापस ले ली गई। अधिकारियों के अनुसार, 24 अगस्त, 2017 को उच्च न्यायालय की लखनऊ पीठ के समक्ष एक और रिट याचिका दायर की गई थी। प्राथमिकी के अनुसार, याचिका पर 25 अगस्त, 2017 को न्यायमूर्ति शुक्ला की खंडपीठ द्वारा सुनवाई की गई और उसी दिन एक अनुकूल आदेश जारी किया

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