बिजली सेक्टर में ‘कैश-गैप’ सबसे बड़ी चुनौती, सुधार का रोडमैप तैयार
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इसमें चरणबद्ध काम करके 2022 तक व्यवस्था को पटरी पर लाने की बात कही गई है। सीएम ने कार्ययोजना को हरी झंडी देते हुए इसे लागू करने के निर्देश दिए हैं। इस पर अमल हुआ तो न सिर्फ व्यवस्था में सुधार दिखेगा, बल्कि उपभोक्ता सेवाओं में भी बड़े सुधार की उम्मीद है। रोजगार के अवसर भी बढ़ेंगे।
ऊर्जा विभाग ने सीएम को बताया है कि पिछले वर्ष की अपेक्षा बिजली खरीद दर में 0.66 रुपये प्रति यूनिट की वृद्धि हुई है। इसमें कोयले की दर व रेलवे भाड़े में वृद्धि, पिछले वर्ष के 2800 करोड़ के एरियर बिलों का वर्तमान वर्ष में सत्यापन, कंपनियों के ट्रांसमिशन चार्जेज व विद्युत उत्पादन गृहों के फिक्स चार्ज में वृद्धि शामिल है।
सरकारी विभागों के बकाये की वसूली चिंता का विषय
हालांकि सरकारी विभागों के बकाये की वसूली चिंता का विषय बनी हुई है। रेलवे व अन्य बड़े उपभोक्ताओं के ओपन एक्सेस के जरिए बिजली लेने से प्रतिवर्ष करीब 1300 करोड़ रुपये राजस्व की कमी हो रही है। ग्रामीण क्षेत्रों में बिजली आपूर्ति अवधि बढ़ाने, दो वर्षों में ग्रामीण बिजली कनेक्शनों की संख्या करीब दोगुनी होने और आपूर्ति लागत का सिर्फ 51 फीसदी बिलिंग होने से भी राजस्व में कमी हुई है।
गांवों में बिजली बिलों की वसूली चुनौती बनी हुई है। एक खुलासा यह भी हुआ है कि डार्क जोन में निजी नलकूप लगाने की छूट देने से प्रत्येक वर्ष 450 करोड़ रुपये का अतिरिक्त नुकसान हो रहा है। विभाग ने सीएम को बताया कि पिछले वर्ष चुनाव की वजह से बिजली टैरिफ में वृद्धि नहीं की गई, इससे भी टैरिफ गैप बढ़ा है।
सुधार के लिए केंद्र सरकार के साथ किए गए ‘उदय’ एमओयू में वर्ष 2020 तक टैरिफ वृद्धि का लक्ष्य 6.60 रखा गया है।
यह है रोडमैप
ये बड़ी चुनौती
यूपी में 2.83 करोड़ उपभोक्ताओं के लिए सिर्फ 37 हजार अधिकारी-कर्मचारी हैं। उपभोक्ता व कर्मचारियों का अनुपात 1.35 प्रति हजार है जो पूरे देश में न्यूनतम है।
बिजली चोरी पर नियंत्रण के लिए गठित 33 स्क्वायड के अतिरिक्त प्रदेश सरकार ने 55 नए स्क्वायड की योजना बनाई जरूर, लेकिन वर्तमान में मात्र 20 दस्तों के लिए ही पुलिस बल उपलब्ध है। इससे विद्युत थाने भी नहीं शुरू हो पा रहे हैं।
सुधार का रोडमैप
राजस्व सकल तकनीकी एवं वाणिज्यिक हानियों को 2020-21 तक 24.64 फीसदी से 15 प्रतिशत पर लाना।
2019-20 में आठ लाख स्मार्ट मीटर व 20-21 में 20 लाख स्मार्ट मीटर लगाकर बिलिंग गुणवत्ता बढ़ाना।
2020 तक लखनऊ व कानपुर के सभी सरकारी कार्यालयों व सरकारी आवासों में मार्च 2021 तक प्रीपेड मीटर लगाना।
ग्रामीण क्षेत्र के 30 लाख अनमीटर्ड उपभोक्ताओं के यहां मार्च 2020 तक मीटर लगाना।
मार्च 2020 तक एक लाख व मार्च 2021 तक 5 लाख कनेक्शनों पर प्रीपेड मीटर लगाना।
1000 से अधिक आबादी वाले 19923 मजरों में मार्च 2020 तक तथा 28480 मजरों में मार्च 2021 तक एरियर बंच केबल लगेगा।
गांवों में बिजली आपूर्ति बढ़ाने से 6800 करोड़ की अतिरिक्त सब्सिडी की मांग।
पावरलूम उपभोक्ताओं को एक निश्चित सीमा तक बिजली उपभोग पर रियायती दर व उससे अधिक पर वास्तविक दर से वसूली।
बिजली खरीद व आपूर्ति अनुबंध के एमओयू की समीक्षा कर खरीद लागत में कमी लाना।
11 केवी के 120 नए केंद्रों का निर्माण मार्च 2020 तक व 972 का निर्माण मार्च 2021 तक करने का लक्ष्य।
मार्च 2020 तक तीन लाख उपभोक्ताओं को ऑनलाइन झटपट योजना के जरिए कनेक्शन देना।
ऑनलाइन सेवाओं का विस्तार कर निजी नलकूप कनेक्शन, भार वृद्धि, खराब मीटर बदलने, प्रीपेड व पोस्टपेड मीटर का आपस में बदलाव व नाम परिवर्तन जैसी सेवाएं देना। उपकेंद्र केंद्रित निगरानी प्रणाली विकसित करना। 3086 ग्रामीण व 1255 शहरी उपकेंद्रों पर बढ़ेंगी सुविधाएं।
शहरों में बिजली आपूर्ति सुधार पर बढ़ेगा फोकस
विभाग ने कृषि कार्य के लिए अलग फीडर करने व शहरी क्षेत्रों में 33 केवी उपकेंद्रों को एक अतिरिक्त स्रोत से बिजली उपलब्ध कराने की योजना बनाई है। कृषि कार्य के लिए 2019-20 में 542 व 2020-21 तक 972 नए फीडर बनाने की योजना है।
मार्च 21 तक गोरखपुर शहर के 11 केवी के फीडरों को और लखनऊ, गाजियाबाद, नोएडा, वाराणसी व कानपुर में 33 केवी उपकेंद्रों को एक अतिरिक्त स्रोत से बिजली उपलब्ध कराने का लक्ष्य है। शहरों में अधिक ऊर्जा हानि वाले 160 स्थानों पर मार्च 2020 तक एबी केबल लगाई जाएगी।
नवंबर तक 1567 एसडीओ-जेई की भर्ती, 7000 जनसेवा केंद्र बढ़ेंगे
ऊर्जा विभाग ने नवंबर तक 1567 कर्मियों के पद सृजित कर तैनाती का प्रस्ताव किया है। इसमें 395 नए उपखंड अधिकारी व 1172 जेई के पद शामिल हैं। 75 बिजली थानों व 35 चेकिंग स्क्वायड के लिए सितंबर तक गृह विभाग से पर्याप्त पुलिस बल लेने की योजना है।
उपभोक्ताओं की सुविधा को जन सुविधा केंद्रों की संख्या 28 हजार से बढ़ाकर 35 हजार की जाएगी। नगर निगम क्षेत्रों में त्वरित प्रतिक्रिया दल का गठन होगा। इसमें मरम्मत के सामान सहित वैन व मैनपावर की व्यवस्था होगी। मार्च 2021 तक 12 नगर निगमों में यह टीम सक्रिय करने की योजना है। इससे रोजगार के अवसर भी बढ़ेंगे।