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गांव लौट रहे लोगों की वजह से लखनऊ में बढ़ रहा कोरोना मरीजों का ग्राफ

Amarujala Local Bureau अमर उजाला लोकल ब्यूरो
Updated Sun, 17 May 2020 03:32 AM IST
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cases of corona positive is increasing because of people are returning to their villages
लखनऊ। राजधानी में अन्य प्रदेशों व जिलों से गांव लौट रहे लोगों की वजह से कोरोना मरीजों का ग्राफ तेजी से बढ़ रहा है। इसने स्वास्थ्य विभाग की नींद उड़ा दी है। सीएचसी प्रभारियों को गांव वालों की टीम तैयार रखने के निर्देश दिए गए हैं। राजधानी में तीन दिन से लगातार मुंबई से लौटने वाले पॉजिटिव पाए जा रहे हैं। इसकी शुरुआत 13 मई को हुई। माल क्षेत्र का निवासी युवक मुंबई में दर्जी का काम करता था, यहां आने के बाद वो पॉजिटिव पाया गया। इसके बाद राजधानी के क्लॉक टावर मुफ्तीगंज का युवक भी पॉजिटिव पाया गया। शनिवार को एक साथ सात मजदूर पॉजिटिव पाए गए हैं। ऐसे में स्वास्थ्य विभाग को अंदेशा है कि विभिन्न क्षेत्रों के मजदूर धीरे-धीरे अपने घर पहुंच रहे हैं। उन्हें क्वारंटीन में रखने की जिम्मेदारी ग्राम स्वास्थ्य समितियों को दी गई है, जिसे लेकर संशय है। सीएमओ डॉ. नरेंद्र अग्रवाल ने शनिवार को सभी सीएचसी प्रभारियों को अलर्ट रहने का निर्देश दिया है। उन्हें ग्राम पंचायत के हिसाब से अलग-अलग इलाके में टीमें बनाने का निर्देश दिया गया है, ताकि आपात स्थिति में तत्काल संबंधित गांव में टीम पहुंचकर लोगों के सैंपल लेने और क्वारंटीन में भेजने का इंतजाम कर सके। अफसरों को किया अलर्ट ग्रामीण इलाके पर निगरानी की व्यवस्था चुस्त रखने का प्रयास है। सभी प्रभारी चिकित्सा अधिकारियों को अलर्ट कर दिया गया है। गांव की लोकेशन के हिसाब से सेक्टर बनाने के लिए कहा गया है। सेक्टर टीम होने से जहां जरूरत होगी, तत्काल विभागीय टीम वहां पहुंचेगी।   - डॉ. नरेंद्र अग्रवाल, सीएमओ   गांवों में आड़े आ रही राजनीतिक व सामाजिक वजह  मुंबई सहित विभिन्न शहरों से लौटने वाले मजदूरों को क्वारंटीन में रहने की सलाह दी जा रही है। जो लोग गांव में पहुंच गए हैं उनकी निगरानी के लिए ग्राम पंचायत समितियों को जिम्मेदारी दी गई। इसके मुखिया ग्राम प्रधान हैं। इसी साल गांव में पंचायत चुनाव होने हैं। ऐसी स्थिति में ग्राम प्रधान बाहर से आने वाले लोगों से कड़ाई से क्वारंटीन नियमों का पालन नहीं करा पा रहे हैं। उन्हें इस बात का भय सता रहा है कि कहीं उनका वोट बैंक खराब नाहो जाए। दूसरी तरफ गांव का सामाजिक तानाबाना भी है। यदि गांव का कोई प्रधान दूसरी जाति के व्यक्ति को रोकता है तो इस बात को स्थानीय स्तर पर अपनी अस्मिता का सवाल भी बनाया जा रहा है। ऐसी स्थिति में वे कागजी खानापूर्ति तक ही खुद को सीमित रख रहे हैं। अफसरों को सूचना देकर झाड़ रहे पल्ला कई ग्राम प्रधानों ने बताया कि उनके गांव में मुंबई, सूरत सहित कई शहरों के लोग आए हैं। उन्होंने बाहर से आने वाले लोगों को घर से दूर स्कूल या खेतों में बनी झोपड़ी में कुछ दिन बिताने का निवेदन किया तो उन्हें विरोध का सामना करना पड़ा। थक हारकर उन्होंने ग्राम पंचायत सचिव और कोरोना के लिए ब्लॉक स्तरीय नोडल प्रभारी को सूचना देकर खुद को सीमित कर लिया। 
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