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मुख्मयंत्री के सोशल मीडिया सेल के कर्मी की मौत में दो पर मुकदमा

Sun, 23 May 2021 02:13 AM IST
Lucknow Bureau लखनऊ ब्यूरो
Updated Sun, 23 May 2021 02:13 AM IST
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case on two in suicide of parth srivastav who was in social media of chief minister
लखनऊ। मुख्यमंत्री के सोशल मीडिया सेल में तैनात पार्थ श्रीवास्तव के खुदकुशी करने के मामले में शनिवार को इंदिरानगर थाने में मुकदमा दर्ज किया गया है। इस मामले में पिता की तहरीर पर सोशल मीडिया सेल में तैनात वरिष्ठ कर्मचारी पुष्पेंद्र सिंह व शैलजा पर प्रताड़ित करने व खुदकुशी के लिए उकसाने का मुकदमा दर्ज किया गया है। पिता की तहरीर व पार्थ के सुसाइड नोट के आधार पर पुलिस ने मुकदमा दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। इस मामले में पुलिस कमिश्नर डीके ठाकुर ने कहा कि परिवारीजनों व पार्थ के सुसाइड नोट में लगाए गए आरोपों की जांच की जा रही है। दोषी पाए जाने पर आरोपियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।
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इंदिरानगर सेक्टर-9 स्थित वैशाली एन्क्लेव में रहने वाले पार्थ (28) ने बुधवार को फांसी लगाकर जान दे दी थी। उसके कमरे से दो पन्ने का सुसाइड नोट मिला था जिसमें उसने वरिष्ठ सहयोगी पुष्पेंद्र सिंह व महिला कर्मचारी शैलजा पर प्रताड़ित करने का आरोप लगाया था। फंदे से लटका देख परिवारीजन उसे लोहिया अस्पताल लेकर गए जहां डॉक्टरों ने मौत की पुष्टि कर दी। पुलिस ने शव का पोस्टमार्टम कराया। दूसरे दिन बहन शिवानी ने कई गंभीर आरोप लगाए थे। पुलिस पर कार्रवाई न करने का आरोप भी था। बहन के आरोप का खंडन पुलिस ने किया था। शुक्रवार तक पुलिस को तहरीर नहीं मिली थी। इस कारण मुकदमा दर्ज नहीं किया गया था। प्रभारी निरीक्षक अजय प्रकाश त्रिपाठी के मुताबिक, शनिवार को पार्थ के पिता रवीन्द्र नाथ श्रीवास्तव ने रिश्तेदारों के साथ थाने आकर तहरीर दी। तहरीर में सुसाइड नोट के आधार पर ही पुष्पेन्द्र और शैलजा पर आरोप लगाये गए हैं। इन दोनों के खिलाफ आत्महत्या के लिए उकसाने की धारा 306 के तहत केस दर्ज किया गया है। आरोपियों के बयान लिए जाएंगे। जांच शुरू कर दी गई है।
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ट्वीट डिलीट करने की भी जांच की मांग
पार्थ श्रीवास्तव की खुदकुशी के मामले में पूर्व आईपीएस अमिताभ ठाकुर व उनकी पत्नी एक्टिविस्ट नूतन ठाकुर ने अंतिम बार पार्थ द्वारा किए गए ट्वीट की जांच करने की मांग की है। लखनऊ पुलिस कमिश्नर को भेजे पत्र में उन्होंने कहा है कि पार्थ ने आत्महत्या से पहले अपने ट्विटर हैंडल से सूचना निदेशक शिशिर को टैग करते हुए पोस्ट किए। उसके अंतिम ट्वीट को उसकी मौत के बाद रहस्यमय ढंग से डिलीट किए जाने का मामला भी एक गंभीर आपराधिक कृत्य है। यह एक बड़े षडयंत्र की ओर इशारा करता है। कहा कि आत्महत्या के मुकदमे में ही या अलग से नया मुकदमा दर्ज कर अंतिम ट्वीट डिलीट किए जाने की सही से जांच की जानी चाहिए। इसके लिए जो भी दोषी हो, उसके खिलाफ कार्रवाई जरूरी है।
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