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एटीडीए पर अवेध कब्जा करने की कोशिश, चार पर मुकदमा
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लखनऊ। चिनहट के विकल्पखंड स्थित एप्रोप्रिएट टेक्नोलॉजी डवलपमेंट एसोसिएशन की जमीन व संपत्ति पर अवैध तरीके से कुछ लोगों ने कब्जा कर लिया है। इसके लिए उन्होंने कूटरचित दस्तावेज भी तैयार कर लिए। सरकार से मिलने वाली राशि भी हड़प ली है। चिनहट पुलिस ने एसोसिएशन केसमन्वयक जयप्रकाश की तहरीर पर पूर्व अध्यक्ष व महामंत्री सहित चार लोगों के खिलाफ जालसाजी का मुकदमा दर्ज कर लिया है।
प्रभारी निरीक्षक चिनहट धनंजय पांडेय के मुताबिक, जयप्रकाश एप्रोप्रिएट टेक्नोलॉजी डेवलपमेंट एसोसिएशन के मानद समन्वयक है। जय प्रकाश केमुताबिक, संस्था की आधारशिला पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी बाजपेयी ने 1984 में रखी थी। इस संस्था के लिए बद्री प्रसाद व गया प्रसाद की जमीन को स्थानांतरित कराया। भवन का नाम पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी बाजपेयी ने परिश्रम भवन रखा। ग्रामीण विकास विभाग जिला विकास अभिकरण की तरफ से करीब 21 लाख रुपये का अनुदान भी दिया गया। संस्था की संपत्ति को अवैध तरीके से हासिल करने के लिए खुल्दाबाद प्रयागराज के हारून सिद्दीकी ने खुद को अध्यक्ष बनाकर संस्था के दस्तावेज में हेरफेर की।
संस्था में अशोक पांडेय को उपाध्यक्ष और रजनी गुप्ता को महामंत्री बनाया। साथ ही एक कूटरचित कार्यकारिणी का गठन कर सोसायटी एवं चिट्स रजिस्ट्रार के सामने प्रस्तुत कर दिया। इस पर लगातार आपत्तियां दाखिल की गईं। 2018 में इनके कार्यकारिणी को नामंजूर कर नई कार्यकारिणी गठन का आदेश दिया जिसे कोर्ट ने खारिज कर दिया। इसके बाद इस गिरोह ने सरकार से आर्थिक सहायता हासिल करने के लिए अनुबंध कराने के लिए भारतीय माइक्रो क्रेेडिट से संपर्क किया जिसमें सेवानिवृत्त कर्मचारी बहजाद हुसैन जो मूलरूप से बिहार के सीवान के रहने वाले हैं, उनकी भूमिका संदिग्ध पाई गई। इस गिरोह ने अवैध रूप से लाखों रुपये की वसूली की। प्रभारी निरीक्षक धनंजय पांडेय के मुताबिक, पुलिस ने पीड़ित की तहरीर पर शुरूआती पड़ताल में कई अहम दस्तावेज हासिल कर लिए। इसके आधार पर मुकदमा दर्ज कर लिया गया है। मामले की जांच की जा रही है। जल्द ही आरोपियों की गिरफ्तारी की जाएगी।
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प्रभारी निरीक्षक चिनहट धनंजय पांडेय के मुताबिक, जयप्रकाश एप्रोप्रिएट टेक्नोलॉजी डेवलपमेंट एसोसिएशन के मानद समन्वयक है। जय प्रकाश केमुताबिक, संस्था की आधारशिला पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी बाजपेयी ने 1984 में रखी थी। इस संस्था के लिए बद्री प्रसाद व गया प्रसाद की जमीन को स्थानांतरित कराया। भवन का नाम पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी बाजपेयी ने परिश्रम भवन रखा। ग्रामीण विकास विभाग जिला विकास अभिकरण की तरफ से करीब 21 लाख रुपये का अनुदान भी दिया गया। संस्था की संपत्ति को अवैध तरीके से हासिल करने के लिए खुल्दाबाद प्रयागराज के हारून सिद्दीकी ने खुद को अध्यक्ष बनाकर संस्था के दस्तावेज में हेरफेर की।
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संस्था में अशोक पांडेय को उपाध्यक्ष और रजनी गुप्ता को महामंत्री बनाया। साथ ही एक कूटरचित कार्यकारिणी का गठन कर सोसायटी एवं चिट्स रजिस्ट्रार के सामने प्रस्तुत कर दिया। इस पर लगातार आपत्तियां दाखिल की गईं। 2018 में इनके कार्यकारिणी को नामंजूर कर नई कार्यकारिणी गठन का आदेश दिया जिसे कोर्ट ने खारिज कर दिया। इसके बाद इस गिरोह ने सरकार से आर्थिक सहायता हासिल करने के लिए अनुबंध कराने के लिए भारतीय माइक्रो क्रेेडिट से संपर्क किया जिसमें सेवानिवृत्त कर्मचारी बहजाद हुसैन जो मूलरूप से बिहार के सीवान के रहने वाले हैं, उनकी भूमिका संदिग्ध पाई गई। इस गिरोह ने अवैध रूप से लाखों रुपये की वसूली की। प्रभारी निरीक्षक धनंजय पांडेय के मुताबिक, पुलिस ने पीड़ित की तहरीर पर शुरूआती पड़ताल में कई अहम दस्तावेज हासिल कर लिए। इसके आधार पर मुकदमा दर्ज कर लिया गया है। मामले की जांच की जा रही है। जल्द ही आरोपियों की गिरफ्तारी की जाएगी।
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