फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Lucknow News ›   Case of violation of code of conduct, High Court reserves decision on Arvind Kejriwal's petition

Lucknow News : आचार संहिता के उल्लंघन का मामला, हाईकोर्ट ने अरविंद केजरीवाल की याचिका पर निर्णय सुरक्षित किया

Thu, 05 Jan 2023 07:22 PM IST
पंकज श्रीवास्‍तव अमर उजाला ब्यूरो, लखनऊ
अमर उजाला ब्यूरो, लखनऊ Published by: पंकज श्रीवास्‍तव Updated Thu, 05 Jan 2023 07:22 PM IST
सार

2014 में लोकसभा चुनाव के दौरान अमेठी की एक जनसभा में भाजपा व कांग्रेस के खिलाफ  कथित आपत्तिजनक भाषण देकर चुनाव आचार संहिता के उल्लंघन के आरोप का है। जन प्रतिनिधित्व कानून की धारा 125 के तहत यह केस अमेठी के मुसाफिरखाना थाने में दर्ज कराया गया था।

विज्ञापन
Case of violation of code of conduct, High Court reserves decision on Arvind Kejriwal's petition
अरविंद केजरीवाल

विस्तार

इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ पीठ ने बृहस्पतिवार को दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल की याचिका पर सुनवाई के बाद निर्णय सुरक्षित कर लिया। कोर्ट ने कहा कि पक्षकारों के वकील अपनी लिखित बहस 10 जनवरी तक दाखिल कर सकते हैं।

विज्ञापन


न्यायमूर्ति राजेश सिंह चौहान की एकल पीठ के समक्ष मामले की सुनवाई हुई। यह मामला वर्ष 2014 में लोकसभा चुनाव के दौरान अमेठी की एक जनसभा में भाजपा व कांग्रेस के खिलाफ  कथित आपत्तिजनक भाषण देकर चुनाव आचार संहिता के उल्लंघन के आरोप का है। जन प्रतिनिधित्व कानून की धारा 125 के तहत यह केस अमेठी के मुसाफिरखाना थाने में दर्ज कराया गया था। जिसमें 9 जुलाई 2014 को  निचली अदालत में आरोप पत्र दाखिल हुआ था। इस केस में केजरीवाल ने निचली अदालत में आरोपमुक्त करने की डिस्चार्ज अर्जी पेश की थी। जिसे 4 अगस्त 2022 को अदालत ने खारिज कर दिया था। इसके खिलाफ  उन्होनें  सुल्तानपुर जिले की सत्र अदालत में पुनरीक्षण याचिका दाखिल की। जिसे सत्र न्यायाधीश ने 20 अक्तूबर 2022 को खारिज कर दिया था। इसके खिलाफ  केजरीवाल ने हाईकोर्ट में याचिका दायर कर निचली अदालतों के इन दोनों आदेशों को चुनौती दी है।
विज्ञापन


याची के वरिष्ठ अधिवक्ता एचजीएस परिहार का कहना था कि केजरीवाल के खिलाफ कथित भाषण से चुनाव आचार संहिता का कोई केस नहीं बनता है। ऐसे में निचली अदालतों के आदेश कानून की मंशा की खिलाफ  हैं और याची को आरोप मुक्त किया जाना चाहिए। उधर, सरकारी वकीलों राजेश कुमार सिंह व आलोक  सरन ने याचिका का यह कहते हुए विरोध किया कि मामले में आरोप पत्र दाखिल हो चुका है। ऐसे में केस की सामग्री से याची आरोपमुक्त करने योग्य नहीं है। कोर्ट ने याचिका पर वकीलों की बहस सुनने के बाद फैसला सुरक्षित कर लिया।

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed