किसान रहें मर, सरकार कहती मौसम सुहावना
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गेहूं, चना, सरसों.. के खेत देखिए.. बर्बादी का मंजर खुद-ब-खुद सामने आ जाएगा। सब नजारा सड़क से दिख जाता है। किसान कहते हैं अब हमारे सपने, अरमान कैसे पूरे होंगे। यह केवल घुरेहटा न्याय पंचायत की करीब 10 हजार आबादी वाले 23 मजरों का हाल नहीं है, बल्कि पूरे मिल्कीपुर तहसील का है।
घुरेहटा के किसान बताते हैं कि यह तबाही 30 मार्च की तेज हवा के साथ हुई बारिश से हुई है। मगर मौके पर लेखपाल गुरूप्रसाद कुछ और ही कह रहे हैं। उनकी फाइलों में गांव का मौसम गुलाबी है। यानी सरकारी रिपोर्ट के अनुसार मौसम सुहावना है।
नुकसान का औसत सिर्फ 8 फीसदी। यानी ऐसी हालत में कौन अफसर होगा जो शिवकुमार की खुदकुशी की वजह फसल की बर्बादी कहने की हिम्मत रखे। लेकिन कहते हैं न कि सांच को आंच कहां। चौबीस घंटे भी नहीं गुजरे कि खुदकुशी को पारिवारिक कलह का मुलम्मा चढ़ाने वाला प्रशासन हकीकत को समझने लगा।
मौसम की मार से किसान त्राहि-त्राहि कर रहे हैं, ऐसे में घुरेहटा के मजरे जहानपुर में किसान शिवकुमार की मौत के बाद लापता लेखपाल दूसरे दिन गांव पहुंचा। उसने सरकारी कार्य ले लखनऊ गए होने की बात बताई। सब लोगों ने उसे घेर लिया, सर्वे की बात पूछी, तो लेखपाल गुरूप्रसाद ने कहा कि 7-8 फीसदी नुकसान की रिपोर्ट उसने दी थी। लोग मृतक शिवकुमार के खेत पर ले गए, और हकीकत दिखाई, तो लेखपाल ने कहा कि गाटावार सर्वे नहीं करना था। हमने तो पूरे 23 मजरों की रिपोर्ट दी थी।
शिवकुमार की मौत के बाद सक्रिय हुआ प्रशासन
किसान शिवकुमार की खुदकुशी के बाद आला अफसरों की नींद टूटी है। कमिश्नर विशाल चौहान ने मंगलवार को पूरे मंडल में फिर से गाटा वार सर्वे कराने का आदेश दिया है। साथ ही किसानों में सरकारीमदद का भरोसा जगाने के लिए फील्ड के अफसर गांव-गांव जाएंगे। जिनका जो भी नुकसान हुआ है, उसे इंश्योरेंस कंपनियों से दिलाया जाएगा। यह जिम्मेदारी फिक्स की जा रही है।
मंडल के फैजाबाद, बाराबंकी और अंबेडकरनगर में किसानों की मौत को गंभीरता से लेते हुए कमिश्नर ने कहा कि वे सभी जिलों में आदेश दे रहे कि फिर से सर्वे कराएं। पहले गांव के क्षेत्रफल वार सर्वे हुआ था। इसमें किसी का 15 फीसदी या उससे भी कम तो किसी 50 फीसदी या उससे अधिक नुकसान मिलाकर औसत निकाला गया था। अब गाटावार किसान का सर्वे होगा।
इसमें जिन किसानों की फसल ज्यादा बर्बाद हुई है। उनका सही आंकलन होगा। उन्हें मदद भरपूर दी जाएगी। कमिश्नर ने कहा कि फसल का बीमा हुआ है, किसानों को चिंता करने की बात नहीं है। जिसकी जितनी फसल नुकसान हुई होगी, उसे उतना पैसा बीमा कंपनी देगी। इसके लिए वे बीमा कंपनियों के साथ बैठक जल्द करने जा रहे हैं, ताकि उनकी जिम्मेदारी फिक्स हो।
कमिश्नर विशाल चौहान ने कहा कि मंडल के फैजाबाद, बाराबंकी, अंबेडकरनगर, सुल्तानपुर, अमेठी में भी फसल बर्बादी का गाटा वार सर्वे के साथ किसानों में मदद का भरोसा जगाने के लिए लेखपाल से लेकर अफसर तक गांव-गांव जाएंगे। किसान को हतोत्साहित नहीं होना चाहिए।
उन्होंने कहा कि मेरी एडीएम से बात हुई है, डीएम हाईकोर्ट किसी केस में गए हैं। एडीएम के मुताबिक शिवकुमार गरीब था। पारिवारिक कलह की बात मैं भी नहीं मानता हूं। किसान शिवकुमार को फसल की बर्बादी का सदमा लगा है। वाकई उसकी फसल मौसम की मार से बर्बाद हुई है।
बद से बदतर हुई घर की हालत
खुदकुशी करने वाले किसान शिवकुमार का घर .. चहुओंर पसरा मातम...। दलान में गांव की महिलाओं के ढांढस के बीच रोती-बिलखतीं उनकी पत्नी पुष्पा देवी। जैसे ही आहट मिली कि कोई आया है..रोने की आवाज तेज हो गई। प्रशासन का मुलाजिम समझ परिवार व गांव की महिलाओं में गुस्सा था। बीए कर रही बेटी राधा बोली.. सोमवार सुबह पापा यही कह घर से निकले कि का खउबों का बचउबों..।
बेटे से फोन पर विवाद की बात पर रोते हुए मां बोली.. सब झूठ है। एक साथ कई महिलाओं ने कहा कि बेटा का हाल बहुत खराब है। किसी ने बता दिया कि तुम्हारे वजह से जान गई.. तो वह बदहवाश है। सूरत से ट्रेन में बैठ चुका है..।
छोटा बेटा सात वर्षीय किशन मां व बहन को चुप कराने की कोशिश करता है। घर के अंदर अनाज नहीं है, एक कोने में गठरी दिखी, तो गांव के उदयराज सिंह ने कहा कि इसमें चावल-गेहूं है। जिसे सोमवार की रात तहसीलदार के कहने पर कोटेदार दे गया।
जबकि घर के बीपीएल राशन कार्ड पर वितरण के कॉलम खाली पड़े थे। गांव की गुलाबपति ढांढस बंधाते हुए कहती हैं कि भगवान सब देख रहे हैं सच्चाई क्या है। पास बैठी नीलम, शारदा, सरिता, निर्मला कहती है कि एसडीएम ने आकर खुदकुशी के पीछे पारिवारिक कलह कहा, जबकि कभी बेटा-बाप या मां-बेटी से कोई विवाद ही नहीं हुआ, तो कलह कैसी। प्रधान पति कर्मराज बोले, कोई कलह नहीं है, खुदकुशी की वजह केवल फसल की बर्बादी है, बेटे से कोई बात ही नहीं हुई थी।
जामुन का पेड़ देख भय खा रहे थे लोग
मजरे जहानपुर निवासी किसान शिवकुमार सिंह (58) ने जिस फसल को देख जीने की आशा छोड़ खेत के पास जामुन के पेड़ पर फांसी लगाई थी, वहां मंगलवार को जाने से लोग भय खा रहे थे। खासकर आस-पास खेलने वाले बच्चे..। लेकिन गांव के जिम्मेदार लोग आए और फांसी पर झूले शिवकुमार की नीचे पड़ी प्लास्टिक की चप्पलें देख बोले, यह अभी भी यही हैं।
खेत में फसल वैसे ही पड़ी थी। गांव अवधेश ने कहा कि गांव में सबसे पहले बुआई शिवकुमार ने की थी। शायद इसीलिए उनकी पकी फसल को ज्यादा नुकसान हुआ। लव सिंह ने कहा कि उनके पास कच्चा से दो बीघा खेत है, यानि कुल 16 विस्वा, जो पक्के से पौने एक बीघा। आय का कोई साधन नहीं था। बेटा अभी कुछ दिन पहले सूरत गया, जहां से मदद करने के लायक नहीं था।
रामसागर ने कहा कि बेटी की शादी टूट गई थी, इन सबके बीच फसल की बर्बादी ने शिवकुमार के जीने की आस ही मानो खत्म कर दी थी। लेकिन ऐसा करने के बजाय जिंदगी से संघर्ष करते। हम सब मदद करते। यह कह सभी लोग शिवकुमार के अंतिम संस्कार में रवाना हो गए।
लेटी फसल कह रही तबाही का मंजर
घुरेहटा गांव के कई मजरों में फसल की बर्बादी का मंजर था। मजरे जहानपुर के आगे संगम शुक्ल का पुरवा, जहां सड़क से सटी तमाम खेतों में गेहूं की फसलें जमीन पर लेटी बर्बादी का कहानी कह रही थी। रामसकल शुक्ल ने दो बीघा गेहूं बोया है, वे घर पर नहीं थे।
पत्नी शीला ने खेत में जमीन पर पड़ी बालियां दिखाते हुए कहा कि यह है बर्बादी, जो बीते दिनों आए आंधी-पानी से हुआ है। लेखपाल के कभी गांव में नहीं देखा, सर्वे तो दूर की बात है। उनके देवर भवानी शुक्ल की फसल का भी यही हाल था। शीला ने कहा, चाहे जितनी बर्बादी हो, पूरा परिवार गरीबी से लड़ेगा, जान नहीं देगा।
बड़ा बेटा प्रदीप जीप पर खलासी का काम करके 35 सौ रुपये पाता है। जबकि दूसरा कुलदीप इंटर में पढ़ता है। फसल चौपट होने से तमाम अरमान टूट रहे हैं। सरकार से मदद के नाम पर क्या मिलेगा, जब घर बैठे सर्वे रिपोर्ट में मनमानी की जाएगी।
मजरे दरियाव का पूरा के किसानों को भी मौसम की मार से नुकसान हुआ है। चने के खेत में मिले सलीम कहते हैं कि देख लीजिए फसल का हाल। चना में जाना नहीं पड़ा, सरसों खेत में झड़ गई। इकलौती बेटी कक्षा 8 में पढ़ती है। इस बार फसल से उम्मीद थी कि उसे अच्छे कान्वेंट में दाखिला कराऊंगा, मगर सपने टूट रहे हैं। खेती ही एक मात्र आसरा है। साढ़े चार बीघा गेहूं की फसल को भी काफी नुकसान हुआ है। दाने ही नहीं पड़े हैं।