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कैग ने खोली पोल : सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों की लापरवाही से 11920 करोड़ का नुकसान

न्यूज डेस्क, अमर उजाला लखनऊ Published by: ishwar ashish Updated Fri, 08 Feb 2019 03:58 PM IST
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विधानमंडल
विधानमंडल - फोटो : amar ujala
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प्रदेश के सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों (पीएसयू) की लापरवाही व वित्तीय अनियमितताओं के चलते सरकार को 11920.32 करोड़ रुपये की चपत लगी है। यह खुलासा नियंत्रक-महालेखापरीक्षक (कैग) की बृहस्पतिवार को विधानमंडल में रखी गई रिपोर्ट में हुआ है। रिपोर्ट में राजीव गांधी ग्रामीण विद्युतीकरण योजना में लापरवाही, जेएनएनआयूएम के तहत परिवहन सुविधा के संचालन में कमियों और पीएसयू में निवेश से 11920.32 करोड़ की हानि की बात कही गई है। राज्य सड़क परिवहन निगम में बकाये की वसूली में ठेकेदार को अनुचित लाभ पहुंचाने, मध्यांचल और पश्चिमांचल विद्युत वितरण निगम लिमिटेड को वित्तीय हानि व वन निगम को ब्याज के नुकसान का भी खुलासा किया गया है।
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रिपोर्ट के अनुसार प्रदेश में 103 पीएसयू में से 95 के लेखे 36 साल (1981-82) से बकाया थे। पिछले तीन साल में अपने लेखाओं का अंतिमीकरण करने वाले 22 पीएसयू की जांच में 11920.32 करोड़ रुपये का नुकसान सामने आया है, जबकि 56 पीएसयू के लेखे तैयार ही नहीं किए गए। कैग ने 22 पीएसयू को 56,273.05 करोड़ रुपये और निष्क्रिय पीएसयू को 7.03 करोड़ देने पर राज्य सरकार को भी आड़े हाथों लिया है।


रिपोर्ट के अनुसार, बिना लेखाओं के अंतिमीकरण के हजारों करोड़ का बजट देने का आधार समझ नहीं आया है। उप्र जल निगम और खाद्य एवं आवश्यक वस्तु निगम में कमियां इतनी चिंताजनक मिलीं कि सीएजी ने इस पर टिप्पणी करने से मना कर दिया। वहीं उज्ज्वल डिस्कॉम योजना (उदय) पर कैग ने परिचालन लक्ष्य प्राप्त करने में विफलता की रिपोर्ट दी है।
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राजीव गांधी ग्रामीण विद्युतीकरण योजना में दोषपूर्ण वित्तीय प्रबंधन

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