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शिक्षा विभाग पर CAG का खुलासा: टीचर्स की तैनाती में मनमानी से लेकर हर कदम पर घपला

Fri, 19 May 2017 01:59 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, लखनऊ
ब्यूरो/अमर उजाला, लखनऊ Updated Fri, 19 May 2017 01:59 AM IST
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cag report on basic education department in Lucknow.
यूपी विधानसभा का एक दृश्य। - फोटो : amar ujala

भारत के नियंत्रक-महालेखापरीक्षक (कैग) की रिपोर्ट में बेसिक शिक्षा विभाग में हर कदम पर गड़बड़ियां सामने आई हैं। जहां शिक्षकों की तैनाती मनमाने ढंग से की जा रही है, वहीं बच्चों को समय से किताबें और यूनिफॉर्म भी नहीं दी जा रही। हर साल लाखों बच्चे इन सुविधाओं से वंचित रह जाते हैं।

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इतना ही नहीं बैंक से रकम निकालने के बरसों बाद भी स्कूलों का निर्माण पूरा नहीं किया गया। यह रिपोर्ट गुरुवार को विधानसभा में रखी गई।

जांच में शामिल किए गए 428 विद्यालयों की लेखा परीक्षा में पाया गया कि इनमें से 43 फीसदी विद्यालयों में रोकड़ बही का रख-रखाव ही नहीं किया गया था। 59.6 प्रतिशत विद्यालयों में भंडार पंजिकाओं का रख-रखाव नहीं किया गया था।
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वर्ष 2008-09 में सुल्तानपुर में 6 स्कूलों में अतिरिक्त कक्षा कक्ष के निर्माण के लिए 14.46 लाख और वर्ष 2011-12 में सोनभद्र में एक स्कूल के लिए 36.04 लाख रुपये आहरित किए गए, पर आज तक निर्माण नहीं हुआ।

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निर्माण प्रभारी ने किया 15 लाख रुपये का गबन

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इसी तरह वर्ष 2003-04 में सोनभद्र में आठ विद्यालयों में निर्माण के लिए 19.25 लाख रुपये लिए गए, पर मार्च 2016 तक निर्माण पूरा नहीं हुआ था। निर्माण प्रभारी ने 15.03 लाख रुपये का गबन किया।

वर्ष 2011-12 में स्वीकृत 469 प्राथमिक और 73 उच्च प्राथमिक विद्यालयों का निर्माण मार्च 2016 तक शुरू नहीं हुआ था। कैग ने इन सभी प्रकरणों की गहन जांच की जरूरत बताई।

वर्ष 2016-17 में सुल्तानपुर की सभी बसावटों को प्राथमिक विद्यालयों की सुविधा से युक्त बताया गया था, पर 48 विद्यालयों का निर्माण शुरू ही नहीं हुआ था।

6.22 लाख बच्चों को नहीं मिलीं किताबें

cag report on basic education department in Lucknow.

कैग ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि पीलीभीत और रामपुर में अक्तूबर 2016 में की गई जांच से पता चला कि 29 फीसदी बच्चों को समय से किताबें उपलब्ध नहीं कराई गईं।

यहां बता दें कि वर्ष 2010-16 के बीच निशुल्क पाठ्यपुस्तकों की प्रिंटिंग और विद्यालयों तक उनके वितरण पर 691.50 करोड़ रुपये खर्च किए गए। महराजगंज, फिरोजाबाद, सोनभद्र और गाजीपुर की लेखा परीक्षा में पाया गया कि यहां 4.23 करोड़ रुपये की 34.68 लाख पुस्तकें जरूरत से ज्यादा खरीदी गईं।

वर्ष 2011-16 के बीच ढुलाई की लागत में 78 प्रतिशत से 2027 प्रतिशत तक की वृद्धि हुई। वर्ष 2010-16 के बीच खरीदी गई 18.35 करोड़ किताबों में से 5.91 करोड़ किताबें बहुत देर से बच्चों को मिलीं। वहीं इस अवधि में 6.22 लाख बच्चों को किताबें उपलब्ध ही नहीं कराई गईं।

6 प्रतिशत बच्चों को अध्ययन के अतिरिक्त अन्य कार्यों में लगाया गया। 2010-16 के बीच 6.50 लाख बच्चे एक ही कक्षा में अगले साल भी रोके गए, जबकि शिक्षा का अधिकार अधिनियम के तहत ऐसा करना नियमविरुद्ध है।

बिजली फिटिंग तो थी, पर कनेक्‍शन नहीं था

cag report on basic education department in Lucknow.

कैग ने रिपोर्ट में पाया कि 2682 अतिरिक्त कक्षा कक्षों को स्वीकृत करने में मानकों का पालन नहीं किया गया। जिन जिलों को जांच में शामिल किया गया, वहां 111 विद्यालयों में 272 कक्षा कक्ष कम थे, जबकि 166 विद्यालयों में 442 कक्षा कक्ष अधिक निकले। 15 जिलों के 428 चयनित विद्यालयों की लेखा परीक्षा में पाया गया कि वहां बिजली फिटिंग तो थी, पर कनेक्शन नहीं था।

शिक्षकों के पास आवश्यक योग्यता नहीं
कैग ने रिपोर्ट में कहा है कि स्कूलों में शिक्षकों की तैनाती अतार्किक ढंग से की गई है। कहीं स्कूलों में छात्र संख्या को देखते हुए अधिक शिक्षक तो कहीं बेहद कम शिक्षक तैनात किए गए।

शिक्षकों की कमी भी 10 प्रतिशत की अनुमन्य सीमा से अधिक थी। आरटीई एक्ट लागू होने के 6 वर्ष बाद भी प्राथमिक विद्यालयों में 18119 शिक्षकों और उच्च प्राथमिक विद्यालयों में 30730 शिक्षकों के पास आवश्यक शैक्षिक योग्यता नहीं थी।

97 लाख बच्चों को नहीं दी यूनिफॉर्म
वर्ष 2011-16 के बीच 97 लाख पात्र बच्चों को पर्याप्त निधि होने के बावजूद यूनिफॉर्म नहीं बांटी गई। वर्ष 2014-16 के बीच 46 जिलों में बच्चों को यूनिफॉर्म काफी देर से मिली।

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