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यूपी की बिजली ट्रांसमिशन की क्षमता अब 24,500 मेगावट, मंत्री बोले- इस साल पूरी हो सकेगी अधिकतम मांग
Fri, 06 Mar 2020 11:17 AM IST
ishwar ashish
न्यूज डेस्क/अमर उजाला, लखनऊ
न्यूज डेस्क/अमर उजाला, लखनऊ
Published by: ishwar ashish
Updated Fri, 06 Mar 2020 11:17 AM IST
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श्रीकांत शर्मा
- फोटो : अमर उजाला
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प्रदेश में बिजली ट्रांसमिशन की क्षमता 24,500 मेगावाट तक हो गई है। इससे इस वर्ष संभावित 22,500 मेगावाट बिजली की अधिकतम मांग पूरी की जा सकेगी। वहीं, सरकार ने आगामी गर्मी के मौसम के मद्देनजर 20 निर्माणाधीन ट्रांसमिशन उपकेंद्रों व अन्य जरूरी लंबित कार्यों को भी मार्च से पहले पूरा कराने के निर्देश दिए हैं।
ऊर्जा मंत्री श्रीकांत शर्मा ने गुरुवार को शक्ति भवन में यूपी पावर ट्रांसमिशन कॉर्पोरेशन के कामकाज की समीक्षा के दौरान यह जानकारी दी। कहा, योगी सरकार सबको पर्याप्त और निर्बाध बिजली आपूर्ति के संकल्पबद्ध है।
पूर्ववर्ती सरकारों ने ट्रांसमिशन नेटवर्क सुधारने पर ध्यान नहीं दिया। इसलिए बिजली की उपलब्धता होने के बाद भी आपूर्ति व्यवस्था खराब थी। योगी सरकार ने ट्रांसमिशन में सुधारों पर प्राथमिकता से काम किया। नतीजतन अब 24,500 मेगावाट की पीक डिमांड को भी पूरा किया जा सकता है।
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शर्मा ने बताया कि सपा सरकार के समय ट्रांसमिशन क्षमता 16,500 मेगावाट थी। योगी सरकार बनने के बाद से ही इस दिशा में काम किया गया। पिछले वर्ष 21 हजार से ज्यादा की पीक डिमांड को पूरा किया गया। वहीं प्रदेश में बिजली आयात क्षमता भी 8,700 मेगावाट से बढ़कर 13,400 मेगावाट हो गई है।
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ऊर्जा मंत्री श्रीकांत शर्मा ने गुरुवार को शक्ति भवन में यूपी पावर ट्रांसमिशन कॉर्पोरेशन के कामकाज की समीक्षा के दौरान यह जानकारी दी। कहा, योगी सरकार सबको पर्याप्त और निर्बाध बिजली आपूर्ति के संकल्पबद्ध है।
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पूर्ववर्ती सरकारों ने ट्रांसमिशन नेटवर्क सुधारने पर ध्यान नहीं दिया। इसलिए बिजली की उपलब्धता होने के बाद भी आपूर्ति व्यवस्था खराब थी। योगी सरकार ने ट्रांसमिशन में सुधारों पर प्राथमिकता से काम किया। नतीजतन अब 24,500 मेगावाट की पीक डिमांड को भी पूरा किया जा सकता है।
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शर्मा ने बताया कि सपा सरकार के समय ट्रांसमिशन क्षमता 16,500 मेगावाट थी। योगी सरकार बनने के बाद से ही इस दिशा में काम किया गया। पिछले वर्ष 21 हजार से ज्यादा की पीक डिमांड को पूरा किया गया। वहीं प्रदेश में बिजली आयात क्षमता भी 8,700 मेगावाट से बढ़कर 13,400 मेगावाट हो गई है।
नए ट्रांसमिशन उपकेंद्रों व उनकी लाइनों का किया जा चुका निर्माण
पावर फॉर ऑल समझौते के तहत 92 नए ट्रांसमिशन उपकेंद्रों व उनकी लाइनों का निर्माण किया जा चुका है। इनमें 765 केवी का एक, 400 केवी के नौ, 220 केवी के 29 और 132 केवी के 53 उपकेंद्र शामिल हैं। इन पर कुल 8,848.47 करोड़ रुपये खर्च हुए हैं।
साथ ही उन्होंने बताया कि घाटमपुर, ओबरा सी, जवाहरपुर तापीय परियोजना से बिजली निकासी के लिए 6,101.14 करोड़ की लागत से पीपीपी मोड पर ट्रांसमिशन नेटवर्क तैयार कराया जा रहा है। इसके अलावा वोल्टेज सुधार व गुणवत्तापूर्ण आपूर्ति के लिए कैपेसिटर बैंक स्थापित किए जा रहे हैं।
साथ ही उन्होंने बताया कि घाटमपुर, ओबरा सी, जवाहरपुर तापीय परियोजना से बिजली निकासी के लिए 6,101.14 करोड़ की लागत से पीपीपी मोड पर ट्रांसमिशन नेटवर्क तैयार कराया जा रहा है। इसके अलावा वोल्टेज सुधार व गुणवत्तापूर्ण आपूर्ति के लिए कैपेसिटर बैंक स्थापित किए जा रहे हैं।