UP भाजपा के पास साख बचाने का आखिरी मौका
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भाजपा विधानसभा की कैराना सीट जीतने के लिए कोई कसर नहीं छोड़ रही है। उसका प्रयास कोई सार्थक नतीजा दे पाएगा या उपचुनाव जैसा ही हाल होगा, यह तो बाद में पता चलेगा लेकिन पार्टी जीत के लिए जातियों की लामबंदी से लेकर हर दांव आजमाने में जुटी है।
कैराना के आसपास के लोगों को इस सीट पर जुटने को कहा गया है। यह सीट जीतना भाजपा के लिए नाक का सवाल बन गया है।
दरअसल, यहां जीत हासिल करना पार्टी के लिए ही नहीं बल्कि विधानमंडल दल के पूर्व नेता व सांसद हुकुम सिंह के लिए भी प्रतिष्ठा का सवाल है। वह यहां से सात बार विधायक रह चुके हैं।
उनके सांसद बनने के बाद ही रिक्त हुई सीट पर उपचुनाव हो रहा है। पार्टी ने इस सीट पर हुकुम सिंह के रिश्ते के भतीजे अनिल चौहान को उम्मीदवार बनाया है। इस नाते हुकुम भी पूरी ताकत लगाए हैं।
यह भी है वजह
भाजपा अगर इस सीट पर कब्जा नहीं रख पाती है तो न सिर्फ प्रदेश नेतृत्व की साख गिरेगी बल्कि उसके लिए खतरा भी बढ़ेगा। अगले महीने संघ की बैठक है। इसमें उपचुनाव में पार्टी की पराजय पर चर्चा होगी।
अगर पार्टी कैराना सीट जीत जाती है तो उसके नेताओं पर हालिया पराजय का असर भी कुछ कम हो जाएगा। इस नाते भी भगवा टोली यहां सब कुछ दांव पर लगाए है। कैराना सीट मुजफ्फरनगर दंगा की तपिश से भी काफी प्रभावित रही है। हुकुम सिंह खुद उस तपिश के जद में रह चुके हैं।
इस नाते कैराना सीट का नतीजा उनकी प्रतिष्ठा का सवाल भी होगा। प्रदेश अध्यक्ष डॉ. लक्ष्मीकांत वाजपेयी पहले ही कह चुके हैं कि विधानसभा उपचुनाव के नतीजों से सबक लेते हुए इस सीट को जीतने के लिए कोई कसर नहीं उठा रखी जाएगी।
हर जाति को साधने की कोशिश
मैदान मारने की कोशिश में भगवा टोली ने यहां के सामाजिक समीकरणों पर फोकस कर रखा है। आसपास के पार्टी नेताओं को जुटाया जा रहा है ताकि वे अपने-अपने लोगों के बीच जाकर भाजपा के पक्ष में मतदान के लिए राजी कर सकें। प्रमुख पदाधिकारियों को सेक्टर वार लगाने की भी योजना है।
जानकारी के मुताबिक इस सीट पर प्रमुख रूप से गुर्जर, ठाकुर, जाट, कश्यप, दलित, वैश्य व ब्राह्मण मतदाता प्रभावी हैं। इसे ध्यान में रखते हुए पार्टी ने यहां पार्टी नेता वीरेन्द्र सिंह सिरोही, अनिला सिंह और भूपेन्द्र सिंह को लगाया है। ये सभी जाट हैं।
त्यागियों का समीकरण ठीक करने को अश्विनी त्यागी तो क्षत्रिय समीकरण दुरुस्त करने को सुरेश राणा, वैश्यों के लिए पूर्व विधायक अमित अग्रवाल, कश्यपों के लिए सांसद धर्मेन्द्र कश्यप, दलितों को जोड़ने को पूर्व विधायक महेन्द्र वाल्मीकि और होराम सिंह को लगाया गया है। माना जाता है कि इस सीट पर गुर्जर मतदाता सबसे ज्यादा हैं।
सांसद हुकुम सिंह और पार्टी प्रत्याशी अनिल चौहान इसी जाति के हैं। संघ की तरफ से संगठन मंत्री प्रद्युम्न और बृजबहादुर भारद्वाज भी कैराना में डेरा डाले हैं। प्रदेश प्रवक्ता डॉ. चंद्रमोहन कहते हैं कि बिजली दरों में बढ़ोतरी से लोगों में नाराजगी है। कैराना में सपा की हार से यह साबित भी हो जाएगा।