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मुख्तार के करीबी ठेकेदार की हत्या में आरोपियों की बाइक का नंबर लगा पुलिस के हाथ
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लखनऊ। कृष्णानगर में रविवार शाम मुख्तार अंसारी के करीबी ठेकेदार महेंद्र प्रताप की गोली मारकर हत्या के मामले में पुलिस के हाथ तीसरे दिन भी कोई खास सुराग नहीं लगा है। पुलिस का दावा है कि उसकेपास सीसीटीवी फुटेज में बाइक का नंबर मिल गया है। बाइक नंबर के आधार पर बदमाशों की तलाश की जा रही है। वहीं पुलिस ने इस मामले में गाजीपुर व सीतापुर एक-एक टीम भेजी है। वहां कई लोगों से पूछताछ की गई। जिस मकान पर काम चल रहा था, वहां पर वारदात के समय काम कर रहे मजदूरों से भी पुलिस टीम ने पूछताछ की है। वहीं परिवारीजनों के लगातार बयान बदलने से पुलिस की मुश्किलें बढ़ती जा रही हैं।
बाहुबली नेता मुख्तार अंसारी का चालक रहा महेंद्र प्रताप लखनऊ में बिल्डिंग बनाने व गिराने का ठेका लेता था। बाइक सवार बदमाशों ने उसे चार गोलियां मारी थीं। पुलिस आसपास के 50 से अधिक सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगाली है जिसमें एक बाइक का नंबर मिला है जो कृष्णानगर थाने के पास कानपुर की तरफ से आता दिखा है। बाइक सवार दो युवक थाने से चंद कदमों की दूरी पर स्थित लखनऊ पैथालॉजी के सामने कॉलोनी में प्रवेश कर गए। वहां आदित्य व अनिल शुक्ला के मकान को तोड़वा रहे महेंद्र पर गोलियां बरसाकर मौत के घाट उतार दिया था। इसके बाद कॉलोनी के दूसरे गेट से बाहर निकल गए। पुलिस को आशंका है कि वारदात को अंजाम देने के बाद बदमाश कॉलोनी से बाहर निकलकर विजयनगर की तरफ गए हैं। इसके बाद से उनकी लोकेशन नहीं मिली है।
साथी अपराधियों की कुंडली खंगालने में जुटी पुलिस
महेंद्र प्रताप गाजीपुर का हिस्ट्रीशीटर था। उसके खिलाफ गाजीपुर जिले के अलावा लखनऊ में भी करीब 37 मुकदमें दर्ज हैं। इसमें सबसे अधिक गाजीपुर में मुकदमें दर्ज है। लखनऊ पुलिस की एक टीम गाजीपुर में दो दिन से डेरा डाले हुए है। वहां महेंद्र की पूरा आपराधिक इतिहास खंगाल रही है। इसके अलावा राजधानी में 2012 में हजरतगंज और ठाकुरगंज थाने में भी मुकदमा दर्ज हुआ है। इन दोनों मुकदमों में महेंद्र के साथ फाइली रहे अपराधियों के बारे में पुलिस जानकारी जुटा रही है। ताकि पुराने मामलों की रंजिश के बारे में पता चल सके।
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पत्नियों व रिश्तेदारों की खंगाली जा रही डिटेल
पुलिस इस सनसनीखेज हत्याकांड का खुलासा करने के लिए कई बिंदु पर पड़ताल कर रही है। पुलिस के मुताबिक महेंद्र की हत्या के बाद राज सामने आया कि उसका तीन महिलाओं से वैवाहिक रिश्ते थे। महेंद्र की पहली पत्नी मीना है। दूसरी का नाम सीमा व तीसरी बबिता सिद्दीकी है। पुलिस इन तीनों के करीबी रिश्तेदारों के बारे में जानकारी जुटा रही है। तीनों पत्नियों केबारे में जानकारी के लिए महेंद्र के मोबाइल डिटेल खंगाले जा रहे हैं। पुलिस इस बिंदु पर भी पड़ताल कर रही है कि किसी पत्नी से रिश्ते खराब होने के कारण तो हत्या नहीं हुई है।
झारखंड में गया था दुष्कर्म के मामले में जेल
पुलिस के मुताबिक महेंद्र पर उत्तर प्रदेश के गाजीपुर व लखनऊ में ही मुकदमें नहीं दर्ज हैं। उसके खिलाफ झारखंड में मुकदमा दर्ज हुआ था। 2010 में एक युवती ने महेंद्र पर दुष्कर्म का आरोप लगाया था। पुलिस ने मुकदमा दर्ज किया। इसके बाद उसे जेल भी जानी पड़ी थी। वहां से जमानत पर रिहा होने के बाद गाजीपुर पहुंचा। वहां कुछ दिनों तक मुख्तार अंसारी के साथ रहा। दो साल बाद 2012 में वह मुख्तार अंसारी के सांसद भाई अफजाल अंसारी के साथ काम शुरू किया। इसी दौरान उसके खिलाफ लखनऊ के हजरतगंज व ठाकुरगंज में मुकदमें दर्ज हुए। दोनों थानों में रंगदारी व धमकी देने के मामले दर्ज किये गये हैं।
साथी ठेकेदार के साथ तीन से चार बार दिखा
पुलिस ने महेंद्र प्रताप के साथी ठेकेदार पुराना सरदार खेड़ा निवासी असलम को हिरासत में लिया है। उससे कई चक्र की पूछताछ हो चुकी है। इस मामले में पुलिस ने 8 मजदूरों से भी पूछताछ की है। जिसमें पता चला कि असलम के साथ महेंद्र सिर्फ तीन से चार बार साइट पर दिखा है। इसके बाद असलम नहीं आया। महेंद्र ही रोज काम करवाता था। पुलिस ने सीतापुर के रहने वाले इन मजदूरों को भी थाने में रोका है। उनकी भी पूरी जानकारी जुटा रही है।
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बाहुबली नेता मुख्तार अंसारी का चालक रहा महेंद्र प्रताप लखनऊ में बिल्डिंग बनाने व गिराने का ठेका लेता था। बाइक सवार बदमाशों ने उसे चार गोलियां मारी थीं। पुलिस आसपास के 50 से अधिक सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगाली है जिसमें एक बाइक का नंबर मिला है जो कृष्णानगर थाने के पास कानपुर की तरफ से आता दिखा है। बाइक सवार दो युवक थाने से चंद कदमों की दूरी पर स्थित लखनऊ पैथालॉजी के सामने कॉलोनी में प्रवेश कर गए। वहां आदित्य व अनिल शुक्ला के मकान को तोड़वा रहे महेंद्र पर गोलियां बरसाकर मौत के घाट उतार दिया था। इसके बाद कॉलोनी के दूसरे गेट से बाहर निकल गए। पुलिस को आशंका है कि वारदात को अंजाम देने के बाद बदमाश कॉलोनी से बाहर निकलकर विजयनगर की तरफ गए हैं। इसके बाद से उनकी लोकेशन नहीं मिली है।
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साथी अपराधियों की कुंडली खंगालने में जुटी पुलिस
महेंद्र प्रताप गाजीपुर का हिस्ट्रीशीटर था। उसके खिलाफ गाजीपुर जिले के अलावा लखनऊ में भी करीब 37 मुकदमें दर्ज हैं। इसमें सबसे अधिक गाजीपुर में मुकदमें दर्ज है। लखनऊ पुलिस की एक टीम गाजीपुर में दो दिन से डेरा डाले हुए है। वहां महेंद्र की पूरा आपराधिक इतिहास खंगाल रही है। इसके अलावा राजधानी में 2012 में हजरतगंज और ठाकुरगंज थाने में भी मुकदमा दर्ज हुआ है। इन दोनों मुकदमों में महेंद्र के साथ फाइली रहे अपराधियों के बारे में पुलिस जानकारी जुटा रही है। ताकि पुराने मामलों की रंजिश के बारे में पता चल सके।
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पत्नियों व रिश्तेदारों की खंगाली जा रही डिटेल
पुलिस इस सनसनीखेज हत्याकांड का खुलासा करने के लिए कई बिंदु पर पड़ताल कर रही है। पुलिस के मुताबिक महेंद्र की हत्या के बाद राज सामने आया कि उसका तीन महिलाओं से वैवाहिक रिश्ते थे। महेंद्र की पहली पत्नी मीना है। दूसरी का नाम सीमा व तीसरी बबिता सिद्दीकी है। पुलिस इन तीनों के करीबी रिश्तेदारों के बारे में जानकारी जुटा रही है। तीनों पत्नियों केबारे में जानकारी के लिए महेंद्र के मोबाइल डिटेल खंगाले जा रहे हैं। पुलिस इस बिंदु पर भी पड़ताल कर रही है कि किसी पत्नी से रिश्ते खराब होने के कारण तो हत्या नहीं हुई है।
झारखंड में गया था दुष्कर्म के मामले में जेल
पुलिस के मुताबिक महेंद्र पर उत्तर प्रदेश के गाजीपुर व लखनऊ में ही मुकदमें नहीं दर्ज हैं। उसके खिलाफ झारखंड में मुकदमा दर्ज हुआ था। 2010 में एक युवती ने महेंद्र पर दुष्कर्म का आरोप लगाया था। पुलिस ने मुकदमा दर्ज किया। इसके बाद उसे जेल भी जानी पड़ी थी। वहां से जमानत पर रिहा होने के बाद गाजीपुर पहुंचा। वहां कुछ दिनों तक मुख्तार अंसारी के साथ रहा। दो साल बाद 2012 में वह मुख्तार अंसारी के सांसद भाई अफजाल अंसारी के साथ काम शुरू किया। इसी दौरान उसके खिलाफ लखनऊ के हजरतगंज व ठाकुरगंज में मुकदमें दर्ज हुए। दोनों थानों में रंगदारी व धमकी देने के मामले दर्ज किये गये हैं।
साथी ठेकेदार के साथ तीन से चार बार दिखा
पुलिस ने महेंद्र प्रताप के साथी ठेकेदार पुराना सरदार खेड़ा निवासी असलम को हिरासत में लिया है। उससे कई चक्र की पूछताछ हो चुकी है। इस मामले में पुलिस ने 8 मजदूरों से भी पूछताछ की है। जिसमें पता चला कि असलम के साथ महेंद्र सिर्फ तीन से चार बार साइट पर दिखा है। इसके बाद असलम नहीं आया। महेंद्र ही रोज काम करवाता था। पुलिस ने सीतापुर के रहने वाले इन मजदूरों को भी थाने में रोका है। उनकी भी पूरी जानकारी जुटा रही है।