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अब निशाने पर सांसद अफजाल की पत्नी का बंगला, एलडीए ने जारी किया नोटिस
Wed, 02 Sep 2020 04:14 PM IST
पंकज श्रीवास्तव
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ
Published by: पंकज श्रीवास्तव
Updated Wed, 02 Sep 2020 04:14 PM IST
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कुलदीप सिंह सेंगर, मुख्तार अंसारी, ब्रजेश सिंह (नीचे, बायें) व विजय मिश्र (नीचे दाएं)
- फोटो : amar ujala
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बाहुबली विधायक मुख्तार अंसारी के बेटों के अवैध निर्माण तोड़ने के बाद अब उनके भाई व सांसद अफजाल अंसारी की पत्नी के बंगले को ढहाने की तैयारी है। डालीबाग के गाटा संख्या 93 की जिस जमीन पर यह बंगला बना हुआ है, उसे जिला प्रशासन निष्क्रांत संपत्ति घोषित कर चुका है। ऐसे में जमीन का स्वामित्व खत्म होने पर इस बंगले के लिए स्वीकृत शमन मानचित्र को खारिज करने के लिए लखनऊ विकास प्राधिकरण ने मंगलवार को नोटिस जारी किया है।
एलडीए वीसी शिवाकांत ने यूपी शहरी नियोजन एवं विकास अधिनियम, 1973 की धारा 15(9) के तहत नोटिस जारी करते हुए भवन स्वामी फरहत अंसारी से पूछा कि जमीन का स्वामित्व सही नहीं है। लिहाजा गलत सूचना देने के चलते क्यों नहीं पूर्व में स्वीकृत शमन मानचित्र को निरस्त कर दिया जाए। इसका जबाव देने के लिए भवन स्वामी के पास 15 दिन का समय होगा। जवाब मिलने के बाद एलडीए मानचित्र की स्वीकृति निरस्त कर सकता है। फिर अवैध निर्माण के खिलाफ विहित प्राधिकारी कोर्ट में कार्रवाई शुरू होगी।
भवन स्वामी के पास मानचित्र निरस्त होने के आदेश के खिलाफ अपील करने के लिए 30 दिन का समय होगा। फरहत अंसारी खुद भी वकीलों के जरिए इस प्रक्रिया से जुड़े बिंदुओं पर एलडीए से सीधे जानकारी ले रही हैं।
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उधर, सूत्रों का कहना है कि फरहत के बंगले को तोड़ने की कार्रवाई जल्द की जा सकती है। क्योंकि निष्क्रांत संपत्ति सरकारी जमीन है। ऐसे में इस जमीन को खाली कराना ही होगा। हालांकि इस कार्रवाई को लेकर राजनीतिक रूप से अधिकारियों के ऊपर काफी दबाव है।
जिलाधिकारी के पत्र के बाद एलडीए ने की कार्रवाई
एलडीए ने फरहत अंसारी को नोटिस जिलाधिकारी के उस पत्र के बाद जारी किया है, जिसमें बताया गया है कि बंगला संख्या 21/14बी निष्क्रांत संपत्ति पर बना है। 14 अगस्त को एसडीएम सदर के डालीबाग में जियामऊ के गाटा संख्या 93 की जमीन को निष्क्रांत संपत्ति घोषित करने के बाद डीएम ने यह पत्र भेजा था। इसके बाद मुख्तार के दो बेटों के अवैध निर्माण भी एलडीए ने तोड़े थे।
जिला प्रशासन के सीधे कार्रवाई न करने पर उठ रहे सवाल
निष्क्रांत संपत्ति होने के बावजूद जिला प्रशासन द्वारा यह जमीन खाली नहीं कराए जाने को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। खुद के कस्टोडियन होने के चलते जिला प्रशासन सीधे भी निर्माण तोड़कर जमीन खाली करा सकता है। खुद एसडीएम सदर मान चुके हैं कि मुख्तार अंसारी के बेटों के तोड़े गए दो मकान के अलावा यहां नौ अन्य निर्माण भी हैं। निष्क्रांत संपत्ति पर जिनके कब्जे हैं, उनके खिलाफ जिला प्रशासन ने अभी तक एफआईआर भी नहीं कराई है।
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एलडीए वीसी शिवाकांत ने यूपी शहरी नियोजन एवं विकास अधिनियम, 1973 की धारा 15(9) के तहत नोटिस जारी करते हुए भवन स्वामी फरहत अंसारी से पूछा कि जमीन का स्वामित्व सही नहीं है। लिहाजा गलत सूचना देने के चलते क्यों नहीं पूर्व में स्वीकृत शमन मानचित्र को निरस्त कर दिया जाए। इसका जबाव देने के लिए भवन स्वामी के पास 15 दिन का समय होगा। जवाब मिलने के बाद एलडीए मानचित्र की स्वीकृति निरस्त कर सकता है। फिर अवैध निर्माण के खिलाफ विहित प्राधिकारी कोर्ट में कार्रवाई शुरू होगी।
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भवन स्वामी के पास मानचित्र निरस्त होने के आदेश के खिलाफ अपील करने के लिए 30 दिन का समय होगा। फरहत अंसारी खुद भी वकीलों के जरिए इस प्रक्रिया से जुड़े बिंदुओं पर एलडीए से सीधे जानकारी ले रही हैं।
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उधर, सूत्रों का कहना है कि फरहत के बंगले को तोड़ने की कार्रवाई जल्द की जा सकती है। क्योंकि निष्क्रांत संपत्ति सरकारी जमीन है। ऐसे में इस जमीन को खाली कराना ही होगा। हालांकि इस कार्रवाई को लेकर राजनीतिक रूप से अधिकारियों के ऊपर काफी दबाव है।
जिलाधिकारी के पत्र के बाद एलडीए ने की कार्रवाई
एलडीए ने फरहत अंसारी को नोटिस जिलाधिकारी के उस पत्र के बाद जारी किया है, जिसमें बताया गया है कि बंगला संख्या 21/14बी निष्क्रांत संपत्ति पर बना है। 14 अगस्त को एसडीएम सदर के डालीबाग में जियामऊ के गाटा संख्या 93 की जमीन को निष्क्रांत संपत्ति घोषित करने के बाद डीएम ने यह पत्र भेजा था। इसके बाद मुख्तार के दो बेटों के अवैध निर्माण भी एलडीए ने तोड़े थे।
जिला प्रशासन के सीधे कार्रवाई न करने पर उठ रहे सवाल
निष्क्रांत संपत्ति होने के बावजूद जिला प्रशासन द्वारा यह जमीन खाली नहीं कराए जाने को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। खुद के कस्टोडियन होने के चलते जिला प्रशासन सीधे भी निर्माण तोड़कर जमीन खाली करा सकता है। खुद एसडीएम सदर मान चुके हैं कि मुख्तार अंसारी के बेटों के तोड़े गए दो मकान के अलावा यहां नौ अन्य निर्माण भी हैं। निष्क्रांत संपत्ति पर जिनके कब्जे हैं, उनके खिलाफ जिला प्रशासन ने अभी तक एफआईआर भी नहीं कराई है।