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राजधानी में अपना घर का सपना रखने वालों के लिए अच्छी खबर
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राजधानी में अब अपना घर का सपना होगा पूरा। (फोटो ः प्रतीकात्मक)
- फोटो : ??? ?????
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राजधानी में अपना घर का सपना रखने वालों के लिए अच्छी खबर है। लंबे वक्त से बनी हुई मंदी के चलते रीयल एस्टेट कारोबारी अधिकतम छूट या दूसरे ऑफर के जरिये रो-हाउस, फ्लैट या आवासीय भूखंड बेचने को तैयार हैं।
ऐसे में रेडी टू मूव घर या फ्लैट पाने के लिए बिल्डर से खूब मोलभाव कर सकते हैं। रीयल एस्टेट बाजार की हालत यह है कि पांच साल में बने अपार्टमेंटों में 40 प्रतिशत तक फ्लैट खाली पडे़ हैं।
अयोध्या हाईवे, सीतापुर हाईवे, रायबरेली रोड जैसे प्रमुख इलाकों से लेकर आशियाना, वृंदावन योजना जैसी विकसित कॉलोनियों तक में ऐसे हाल हैं।
वहीं, मंदी की मार से परेशान बड़े बिल्डर्स ने प्रोजेक्टों के साइज तक घटाए हैं। कुछ ने प्रोजेक्टों में विकास कार्य ही धीमे कर दिए।
ओमेक्स ने गर्वबिल्ड टेक (मेट्रो सिटी) का एरिया 2100 एकड़ की जगह 650 एकड़ तक सीमित कर दिया। वहीं, अंसल भी अपनी 6500 एकड़ की टाउनशिप में से 2200 एकड़ साइज कम कर चुकी है।
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रीयल एस्टेट से जुड़े जानकारों का कहना है कि मौजूदा वक्त में बड़ी संख्या में रो-हाउस या फ्लैट रेडी टू मूव बने हुए हैं। पहले रीयल एस्टेट में मंदी और फिर कोरोना की वजह से बिक्री न्यूनतम हो चुकी थी। अब कुछ दिनों से ग्राहक फिर से बिल्डर कंपनियों को मिल रहे हैं।
सबसे अधिक खराब स्थिति उन छोटे बिल्डर्स की है जो 20 या इससे कम तक रो-हाउस बनाकर बेचते हैं। इनके पास अधिक जमा-पूंजी नहीं होती। ऐसे बिल्डर फंसी रकम निकालने के लिए न्यूनतम आय पर भी सौदा करने के लिए तैयार हैं।
यही हाल अनियोजित कॉलोनियों में बिकने वाले भूखंडों का भी है। वहीं, बड़े बिल्डर भी अपनी संपत्तियों जैसे आवासीय भूखंड, विला या फ्लैटों की कीमत नहीं बढ़ा पा रहे हैं।
कागजों में भले ही मांग दिखाने के नाम पर कीमतों को बढ़ाया जा रहा हो। वहीं, इसके उलट अधिकतम मोलभाव कर रेडी टू मूव संपत्तियां बेची जा रही हैं।
त्योहारी सीजन से उम्मीद
अधिकांश बिल्डर भले ही बाजार में मांग बने होने का दावा कर रहे हों। लेकिन, सच्चाई यही है कि 2018 या इससे पहले की तुलना में मकानों व फ्लैटों की मांग बढ़ नहीं पाई है। यही वजह है कि कीमतों का ग्राफ ऊपर नहीं जा पाया है।
कई इलाकों में 20 प्रतिशत तक कम हुईं कीमतें
संपत्तियां बेचने के लिए एक प्रमुख वेव पोर्टल आधारित कंपनी के डाटा के मुताबिक, लखनऊ के कई इलाकों में 20 प्रतिशत तक जमीनों या रो-हाउस की कीमतों में कमी दर्ज की गई है। इनमें प्रमुख रूप से अयोध्या हाईवे के मटियारी के आसपास के इलाके शामिल हैं। वहीं लौलाई, कुर्सी रोड, सरोजनीनगर, बंथरा, आउटर रिंगरोड के आसपास कीमतें स्थिर बनी हुई हैं। केवल, कृष्णानगर, गोमतीनगर विस्तार जैसे मांग में रहने वाले इलाकों में 10 प्रतिशत या अधिक कीमतें कोरोना की दूसरी लहर के बाद बढ़ी मिल रही हैं। मकानों की कीमतें कमोबेश सभी इलाकों में घटी हुई ही बनी हुई हैं।
एलडीए से नक्शे भी नहीं हो रहे स्वीकृत
एलडीए के मानचित्र सेल के प्रभारी भूपेंद्र बीर सिंह ने बताया कि पिछले सालों की तुलना में नक्शे अब कम स्वीकृत हो रहे हैं। बड़े ले-आउट भी अब न्यूनतम ही स्वीकृत होने के लिए आ रहे हैं। ऐसे में संभावना है कि आने वाले दिनों में भी नए प्रोजेक्ट लॉन्च कम हों।
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ऐसे में रेडी टू मूव घर या फ्लैट पाने के लिए बिल्डर से खूब मोलभाव कर सकते हैं। रीयल एस्टेट बाजार की हालत यह है कि पांच साल में बने अपार्टमेंटों में 40 प्रतिशत तक फ्लैट खाली पडे़ हैं।
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अयोध्या हाईवे, सीतापुर हाईवे, रायबरेली रोड जैसे प्रमुख इलाकों से लेकर आशियाना, वृंदावन योजना जैसी विकसित कॉलोनियों तक में ऐसे हाल हैं।
वहीं, मंदी की मार से परेशान बड़े बिल्डर्स ने प्रोजेक्टों के साइज तक घटाए हैं। कुछ ने प्रोजेक्टों में विकास कार्य ही धीमे कर दिए।
ओमेक्स ने गर्वबिल्ड टेक (मेट्रो सिटी) का एरिया 2100 एकड़ की जगह 650 एकड़ तक सीमित कर दिया। वहीं, अंसल भी अपनी 6500 एकड़ की टाउनशिप में से 2200 एकड़ साइज कम कर चुकी है।
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रीयल एस्टेट से जुड़े जानकारों का कहना है कि मौजूदा वक्त में बड़ी संख्या में रो-हाउस या फ्लैट रेडी टू मूव बने हुए हैं। पहले रीयल एस्टेट में मंदी और फिर कोरोना की वजह से बिक्री न्यूनतम हो चुकी थी। अब कुछ दिनों से ग्राहक फिर से बिल्डर कंपनियों को मिल रहे हैं।
सबसे अधिक खराब स्थिति उन छोटे बिल्डर्स की है जो 20 या इससे कम तक रो-हाउस बनाकर बेचते हैं। इनके पास अधिक जमा-पूंजी नहीं होती। ऐसे बिल्डर फंसी रकम निकालने के लिए न्यूनतम आय पर भी सौदा करने के लिए तैयार हैं।
यही हाल अनियोजित कॉलोनियों में बिकने वाले भूखंडों का भी है। वहीं, बड़े बिल्डर भी अपनी संपत्तियों जैसे आवासीय भूखंड, विला या फ्लैटों की कीमत नहीं बढ़ा पा रहे हैं।
कागजों में भले ही मांग दिखाने के नाम पर कीमतों को बढ़ाया जा रहा हो। वहीं, इसके उलट अधिकतम मोलभाव कर रेडी टू मूव संपत्तियां बेची जा रही हैं।
त्योहारी सीजन से उम्मीद
अधिकांश बिल्डर भले ही बाजार में मांग बने होने का दावा कर रहे हों। लेकिन, सच्चाई यही है कि 2018 या इससे पहले की तुलना में मकानों व फ्लैटों की मांग बढ़ नहीं पाई है। यही वजह है कि कीमतों का ग्राफ ऊपर नहीं जा पाया है।
कई इलाकों में 20 प्रतिशत तक कम हुईं कीमतें
संपत्तियां बेचने के लिए एक प्रमुख वेव पोर्टल आधारित कंपनी के डाटा के मुताबिक, लखनऊ के कई इलाकों में 20 प्रतिशत तक जमीनों या रो-हाउस की कीमतों में कमी दर्ज की गई है। इनमें प्रमुख रूप से अयोध्या हाईवे के मटियारी के आसपास के इलाके शामिल हैं। वहीं लौलाई, कुर्सी रोड, सरोजनीनगर, बंथरा, आउटर रिंगरोड के आसपास कीमतें स्थिर बनी हुई हैं। केवल, कृष्णानगर, गोमतीनगर विस्तार जैसे मांग में रहने वाले इलाकों में 10 प्रतिशत या अधिक कीमतें कोरोना की दूसरी लहर के बाद बढ़ी मिल रही हैं। मकानों की कीमतें कमोबेश सभी इलाकों में घटी हुई ही बनी हुई हैं।
एलडीए से नक्शे भी नहीं हो रहे स्वीकृत
एलडीए के मानचित्र सेल के प्रभारी भूपेंद्र बीर सिंह ने बताया कि पिछले सालों की तुलना में नक्शे अब कम स्वीकृत हो रहे हैं। बड़े ले-आउट भी अब न्यूनतम ही स्वीकृत होने के लिए आ रहे हैं। ऐसे में संभावना है कि आने वाले दिनों में भी नए प्रोजेक्ट लॉन्च कम हों।