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यूपी से खाद्य उत्पादों में सबसे ज्यादा बफैलो मीट व गैर बासमती चावल का निर्यात
Mon, 20 Sep 2021 04:52 AM IST
दुष्यंत शर्मा
महेंद्र तिवारी, लखनऊ
महेंद्र तिवारी, लखनऊ
Published by: दुष्यंत शर्मा
Updated Mon, 20 Sep 2021 04:52 AM IST
सार
प्रदेश में खाद्य उत्पादों के कुल निर्यात का 74 फीसदी हिस्सा बफैलो मीट का है। गेहूं, मक्का, शहद, डेयरी उत्पादों व पेय पदार्थों की भी मांग बढ़ी।
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आयात-निर्यात
- फोटो : pixabay
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विस्तार
प्रदेश बफैलो मीट (भैंस व भैंसा) के निर्यात में अव्वल बना हुआ है। इसके बाद महाराष्ट्र, हरियाणा व तमिलनाडु का नंबर आता है। प्रदेश में बफैलो मीट के बाद गैर बासमती चावल का ज्यादा निर्यात हुआ है। मादक पेय, गेहूं, मक्का, डेयरी उत्पाद व प्राकृतिक शहद का निर्यात भी बढ़ रहा है।
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कृषि और प्रसंस्कृत खाद्य उत्पाद निर्यात विकास प्राधिकरण (एपीडा) के उत्पाद पोर्ट फोलियो के समग्र निर्यात आंकड़ों के अनुसार यूपी बफैलो मीट में मूल्यानुसार सबसे ज्यादा 56.12 प्रतिशत (13,166.36 करोड़) योगदान के साथ प्रथम स्थान पर है। बफैलो मीट निर्यात में महाराष्ट्र 28.25 प्रतिशत के साथ दूसरे, हरियाणा 10.24 प्रतिशत के साथ तीसरे स्थान पर है। इसके बाद तमिलनाडु, आंध्र प्रदेश, दिल्ली, पश्चिम बंगाल, राजस्थान, बिहार, तेलंगाना और गुजरात का नंबर आता है।
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प्रदेश सरकार ने हाल में कृषि व प्रसंस्कृत खाद्य उत्पादों के निर्यात की वित्तीय वर्ष 2019-20 से 2020-21 की तुलनात्मक रिपोर्ट तैयार कराई है। इसके मुताबिक प्रदेश में वित्त वर्ष 2020-21 में 17,699.12 करोड़ रुपये का निर्यात हुआ। इसमें अकेले 13,166.36 करोड़ रुपये बफैलो मीट का निर्यात हुआ। यह राज्य के कुल निर्यात का 74.38 फीसदी है। 2019-20 की अपेक्षा बीते वित्तीय वर्ष में कुल निर्यात में करीब 1796.34 करोड़ रुपये की वृद्धि हुई है। इसमें अकेले 1,431.61 करोड़ रुपये की वृद्धि बफैलो मीट निर्यात से हुई है। इसमें भेड़ व बकरी के मांस, प्रसंस्कृत मांस व अन्य तरह के मांस निर्यात से होने वाली मात्रा व आय शामिल नहीं है।
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बासमती चावल का निर्यात घटा, गैर बासमती का बढ़ा
प्रदेश में गेहूं, आलू, हरी मटर, आम, आंवला और दुग्ध उत्पादन में नंबर एक के दावे के बावजूद बफैलो मीट छोड़ यूपी का ऐसा कोई भी कृषि व खाद्य प्रसंस्कृत उत्पाद नहीं है जिसका निर्यात 1,000 करोड़ रुपये का होता हो। 2019-20 में बफैलो मीट के बाद सर्वाधिक निर्यात बासमती चावल का हुआ था, जबकि वित्त वर्ष 2020-21 में यूपी से सर्वाधिक वृद्धि गैर बासमती चावल के निर्यात में रही। मात्रा के संदर्भ में गैर बासमती चावल की वृद्धि 3,60,897.38 मीट्रिक टन हो गई जो 2019-20 में 2,40,043.93 मीट्रिक टन थी। रुपये के संदर्भ में यह वृद्धि 913.16 करोड़ रुपये हो गई जो गत वर्ष 689.70 करोड़ रुपये थी। बासमती चावल व गैर बासमती चावल मिलाकर बात करें तो कुल 1750 करोड़ से अधिक का निर्यात हुआ है।
फलों, सब्जियों व जूस का भी निर्यात
ताजे आम, अंगूर के साथ ताजे प्याज व सब्जियों के अलावा मूंगफ ली, प्रसंस्कृत फ ल, जूस व मेवे का निर्यात भी हो रहा है। फलों व सब्जियों के बीज, खीरे, फू ल की भी मांग बढ़ी है। पहली बार जामुन का निर्यात हुआ है।
100 करोड़ से अधिक निर्यात वाले खाद्य पदार्थ
खाद्य पदार्थ मात्रा (मी. टन में) मूल्य (करोड़ रुपये में)
बफैलो मीट 6,03,889.65 13,166.36
गैर बासमती चावल 3,60,897.38 913.216
बासमती चावल 1,07,239.69 845.38
प्रसंस्कृत आटा, फूड व पाउडर 32,967.35 617.42
कई तरह के अनाज, ओट्स के दाने, माल्टेड दूध आदि 23,206.37 379.49
गेहूं 1,24,695.68 231.81
ताजी सब्जियां 1,57,484.87 214.36
मादक पेय पदार्थ 19,451.89 194.13
डेयरी उत्पाद 3,796.91 151.28
मक्का 94,926.86 135.94
प्रसंस्कृत सब्जियां 40,149.75 131.42
गुड़ व मिष्ठान 14,099.85 105.7
तुलनात्मक कृषि एवं प्रसंस्कृत खाद्य निर्यात
2020-21 17,58,479.29 मी. टन
2019-20 15,15,784.59 मी. टन
2020-21 में मुख्य राज्यों का बफैलो मीट निर्यात
राज्य निर्यात (करोड़ रुपये)
यूपी 13,166.36
महाराष्ट्र 6626.82
हरियाणा 2403.44
तमिलनाडु 722.79
आंध्र प्रदेश 333.4
दिल्ली 129.16
प. बंगाल 46.48
राजस्थान 30.88
प्रदेश सरकार खाद्य व प्रसंस्कृत उत्पादों के निर्यात के लिए कई तरह के प्रोत्साहन दे रही है। प्रदेश के कृषि निर्यात पर इसका असर दिखना शुरू हुआ है। प्रोत्साहन पाने में कुछ व्यावहारिक कठिनाइयां सामने आई हैं, जिसे दूर करने के लिए नीति में संशोधन के प्रस्ताव पर कार्यवाही चल रही है।
- डॉ. सुग्रीव शुक्ला, निदेशक कृषि विपणन