Lucknow News: बुद्ध नृत्य-नाटिका, लक्ष्मणगाथा दास्तानगोई और कृष्ण लीला ने मोहा मन
कार्यक्रम में वरिष्ठ रंगकर्मी व बाॅलीवुड अभिनेता डॉ. अनिल रस्तोगी, वरिष्ठ पत्रकार श्याम कुमार, उद्यमी यावर अली शाह और प्रवीण कुमार मित्तल को लक्ष्मणपुरी गौरव सम्मान प्रदान किया गया। वहीं पद्मश्री विद्या विंदु सिंह, रोमा बच्चानी, डॉ. अनीता मिश्रा और मनीषा मेहरा को रानी लक्ष्मीबाई प्रेरणा सम्मान से सम्मानित किया गया। भारतेंदु नाट्य अकादमी के अध्यक्ष रति शंकर त्रिपाठी, राज्य ललित कला अकादमी के अध्यक्ष डॉ. सुनील कुमार विश्वकर्मा, उप्र संगीत नाटक अकादमी की उपाध्यक्ष विभा सिंह, सचिव देवेंद्र त्रिपाठी, भंते शील रतन, संस्थान के निदेशक डॉ. राकेश सिंह, सदस्य तरुणेश मिश्र व ललित कला अकादमी के निदेशक अमित अग्निहोत्री ने सम्मान चिह्न और अंगवस्त्र भेंट कर सम्मानितों का अभिनंदन किया।
कथक गुरु डॉ. उपासना दीक्षित के निर्देशन में प्रस्तुत ''बुद्धम् शरणम् गच्छामि'' नृत्य-नाटिका ने भगवान गौतम बुद्ध के जीवन, वैराग्य और ज्ञान प्राप्ति की यात्रा को प्रभावशाली ढंग से मंच पर उतारा। भावपूर्ण नृत्य और संगीत के माध्यम से करुणा, अहिंसा और मानवता का संदेश दर्शकों तक पहुंचाया गया। संगीत संयोजन व गायन पं. आनंद दीक्षित और कृष्ण कुमार मौर्य का रहा, जबकि संवाद स्वर पंडित आनंद दीक्षित, अखंड प्रताप, मानसी गिरी और आकांक्षा श्रीवास्तव ने दिए। मंच पर चारू पांडेय, आकांक्षा श्रीवास्तव, मानसी गिरी, अनन्या तिवारी, आरोही पाठक, अनन्या अग्रवाल, नेहा श्रीवास्तव, सोनल मिश्रा, अनन्या वर्मा और शिक्षा अग्रवाल ने अपनी प्रभावशाली प्रस्तुति से खूब सराहना बटोरी।
दास्तानगो अरशाना अजमत और आरजे प्रतीक भारद्वाज ने ''लक्ष्मणगाथा'' के माध्यम से रामायण के अद्वितीय पात्र लक्ष्मण के त्याग, समर्पण और धर्मनिष्ठा को शब्दों में जीवंत कर दिया। 14 वर्षों के वनवास, श्रीराम के प्रति अटूट निष्ठा और धर्म रक्षा के लिए किए गए उनके संघर्ष को प्रभावी अंदाज में प्रस्तुत किया गया। दास्तानगोई का सबसे भावपूर्ण पक्ष उर्मिला के मौन त्याग का चित्रण रहा, जिसे अरशाना अजमत ने संवेदनशील शब्दों में अभिव्यक्त कर श्रोताओं को भावुक कर दिया। प्रस्तुति ने यह संदेश दिया कि त्याग और मर्यादा ही भारतीय संस्कृति की सबसे बड़ी शक्ति हैं।
अमित दीक्षित राम जी के निर्देशन में मंचित नाटक कान्हा से द्वारिकाधीश महोत्सव का प्रमुख आकर्षण रहा। करीब 50 कलाकारों की प्रस्तुति में बाल कृष्ण की लीलाओं से लेकर कंस वध, राधा-विरह और द्वारका स्थापना तक की यात्रा को भव्यता के साथ प्रस्तुत किया गया। नाटक ने श्रीकृष्ण के प्रेम, नीति, धर्म और नेतृत्व के बहुआयामी स्वरूप को प्रभावी ढंग से दर्शाया। सम्मान, संगीत, नृत्य और नाट्य प्रस्तुतियों से सजे लक्ष्मणपुरी फेस्टिवल-2026 ने लखनऊ की सांस्कृतिक विरासत और भारतीय जीवन मूल्यों की समृद्ध झलक प्रस्तुत की।

बुद्ध नृत्य-नाटिका, लक्ष्मणगाथा दास्तानगोई और कृष्ण लीला ने मोहा मन

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