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खाली हाथ रही बसपा: तीनों राज्यों में नहीं चला आकाश का जादू, सीट तो दूर वोट प्रतिशत भी रहा दशमलव में
Mon, 04 May 2026 10:11 PM IST
रोहित मिश्र
अशोक मिश्र, अमर उजाला लखनऊ
अशोक मिश्र, अमर उजाला लखनऊ
Published by: रोहित मिश्र
Updated Mon, 04 May 2026 10:11 PM IST
सार
Akash Anand: बसपा ने पश्चिम बंगाल, तमिलनाडु और केरल में प्रत्याशी उतारे थे। इन तीनों जगहों की जिम्मेदारी आकाश आनंद के पास थी। पार्टी ने यहां कमजोर प्रदर्शन किया है।
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आकाश आनंद के हाथ थी इन राज्यों में बसपा की कमान
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विस्तार
बहुजन समाज पार्टी का तीन राज्यों पश्चिम बंगाल, तामिलनाडु और केरल के विधानसभा चुनाव में प्रदर्शन बदतर रहा। पार्टी तीनों राज्यों में एक फीसद वोट भी नहीं जुटा सकी। बीते कई वर्षों से तीनों राज्यों में संगठन को मजबूत करने और दलितों के साथ अल्पसंख्यकों को पार्टी के साथ जोड़ने की कवायद फेल हो गई। पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक आकाश आनंद का जादू भी चुनाव में नहीं चला। इसकी वजह पार्टी में बीते कई दिनों से जारी भितरघात और पदाधिकारियों की लापरवाही बताई जा रही है।
बता दें कि तीनों राज्यों में बसपा ने प्रत्याशी उतारने के साथ वरिष्ठ पदाधिकारियों को भी चुनावी मोर्चे पर भेजा था। इनमें आकाश आनंद के साथ उनके ससुर अशोक सिद्धार्थ, जयप्रकाश आदि कद्दावर नेताओं को लगाया गया था। आकाश ने तो पश्चिम बंगाल में रैली भी की थी, जिसमें बड़ी संख्या में लोगों का जमावड़ा हुआ था। बसपा को तामिलनाडु और केरल में भी कुछ सीटें जीतने की उम्मीद थी, जो परवान नहीं चढ़ सकीं। इससे पहले बिहार चुनाव में बसपा का एक प्रत्याशी विधायक बनने में कामयाब हुआ था, लेकिन पड़ोसी राज्य पश्चिम बंगाल में पार्टी का खाता भी नहीं खुल सका। पश्चिम बंगाल के पिछले चुनाव में बसपा ने 200 से ज्यादा प्रत्याशी उतारे थे और मायावती ने खुद जनसभा की थी। हालांकि पार्टी को तब भी कोई फायदा नहीं हुआ था। हालिया चुनाव में जिन तीन राज्यों से बसपा को उम्मीदें थीं, वहां प्रचार अभियान से पार्टी अध्यक्ष मायावती ने दूरी बनाए रखी। इसे भी पार्टी की असफलता की बड़ी वजह माना जा रहा है। चुनाव नतीजों से साफ हो गया कि बसपा को खासकर दक्षिण के राज्यों में अपनी जड़ें जमाने के लिए खासी मशक्कत करनी होगी।
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बता दें कि तीनों राज्यों में बसपा ने प्रत्याशी उतारने के साथ वरिष्ठ पदाधिकारियों को भी चुनावी मोर्चे पर भेजा था। इनमें आकाश आनंद के साथ उनके ससुर अशोक सिद्धार्थ, जयप्रकाश आदि कद्दावर नेताओं को लगाया गया था। आकाश ने तो पश्चिम बंगाल में रैली भी की थी, जिसमें बड़ी संख्या में लोगों का जमावड़ा हुआ था। बसपा को तामिलनाडु और केरल में भी कुछ सीटें जीतने की उम्मीद थी, जो परवान नहीं चढ़ सकीं। इससे पहले बिहार चुनाव में बसपा का एक प्रत्याशी विधायक बनने में कामयाब हुआ था, लेकिन पड़ोसी राज्य पश्चिम बंगाल में पार्टी का खाता भी नहीं खुल सका। पश्चिम बंगाल के पिछले चुनाव में बसपा ने 200 से ज्यादा प्रत्याशी उतारे थे और मायावती ने खुद जनसभा की थी। हालांकि पार्टी को तब भी कोई फायदा नहीं हुआ था। हालिया चुनाव में जिन तीन राज्यों से बसपा को उम्मीदें थीं, वहां प्रचार अभियान से पार्टी अध्यक्ष मायावती ने दूरी बनाए रखी। इसे भी पार्टी की असफलता की बड़ी वजह माना जा रहा है। चुनाव नतीजों से साफ हो गया कि बसपा को खासकर दक्षिण के राज्यों में अपनी जड़ें जमाने के लिए खासी मशक्कत करनी होगी।
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तीन राज्यों में बसपा का प्रदर्शन
पश्चिम बंगाल 0.18
तामिलनाडु 0.11
केरल 0.15
तामिलनाडु 0.11
केरल 0.15