बसपा की रैली: मायावती ने दिए आकाश आनंद को बड़ी जिम्मेदारी के संकेत, पांव छूकर आकाश ने लिया आर्शीवाद
Lucknow BSP rally: बसपा की रैली में मायावती के साथ आकाश आनंद भी मौजूद रहे। उन्होंने अपने संबोधन से पहले मायावती के पांव छूकर आर्शीवाद लिया।
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
बिहार चुनाव के बाद आकाश आनंद यूपी की सियासत में फिर सक्रिय हो सकते हैं। बसपा सुप्रीमो मायावती ने पार्टी में आकाश की भूमिका को लेकर तस्वीर साफ करने के साथ यह संकेत भी दिया कि आकाश ही पार्टी का भविष्य हैं। वहीं, आकाश भी रैली के दौरान अपनी बुआ और बसपा सुप्रीमो के साथ परछाई की तरह साथ रहे। अपने संबोधन की शुरुआत और अंत में उन्होंने मायावती के पांव छूकर समर्थकों का दिल जीतने की कोशिश भी की।
बता दें, आकाश ने करीब 8 मिनट के संबोधन के दौरान मायावती की प्रशंसा करने के साथ उन्हें पांचवीं बार मुख्यमंत्री बनाने के लिए समर्थकों में जोश भरने का प्रयास भी किया। उन्होंने कहा कि आज कांशीराम की पुण्यतिथि है। उनके संघर्षों को कभी भुलाया नहीं जा सकता है। उनकी उत्तराधिकारी और मेरी एकमात्र आदर्श बहनजी का भी मैं दिल से आदर सम्मान करता हूं। वह कांशीराम के अधूरे कारवां को पूरा करने में लगी हैं। उनके पदचिन्हों पर चल रही हैं। आज लाखों लोग उन्हें सुनने आए हैं। इस बार आई भीड़ को देखकर कह सकता हूं कि बसपा की पांचवीं बार मायावती के नेतृत्व में अकेले सरकार बनने जा रही है। हमें अपनी पार्टी को केंद्र और राज्य की सत्ता में लाना है। आकाश के संबोधन के दौरान कार्यकर्ताओं और समर्थकों का उत्साह देखने वाला था।
संबोधन में दिखाई परिपक्वता
सीतापुर में भड़काऊ भाषण देने के बाद पार्टी से बाहर किए गए आकाश ने अपने संबोधन में परिपक्वता दिखाई। उन्होंने किसी भी दल या उसके नेता पर निशाना नहीं साधा और अपना भाषण कांशीराम और मायावती तक ही सीमित रखा। बता दें कि आकाश बुधवार सुबह राजधानी आ गए थे और रैली की तैयारियों की कमान संभाल ली थी। वहीं पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव सतीश चंद्र मिश्रा के बेटे कपिल मिश्रा भी रैली की तैयारियों में जुटे थे। उन्हें भी जल्द कोई अहम जिम्मेदारी दी जा सकती है।
दिहाड़ी पर नहीं आए लोग
संविधान हाथ में लेकर कर रहे नौटंकी
उन्होंने कांग्रेस पर निशाना साधते हुए कहा कि इमरजेंसी के वक्त बाबा साहेब के बनाए संविधान को प्रभावहीन बनाने वाली पार्टी के लोग संविधान की प्रति हाथ में लेकर किस्म किस्म की नौटंकी करते हैं। इन्होंने कभी बाबा साहब को भारत रत्न नहीं दिया। कांशीराम के देहांत पर कांग्रेस और सपा ने शोक घोषित नहीं किया। मंडल कमीशन की रिपोर्ट लागू नहीं की, जिसे बसपा के प्रयासों के बाद तत्कालीन प्रधानमंत्री वीपी सिंह ने लागू किया।
रैली में दिखा बसपा का 2012 से पहले जैसा जलवा
कांशीराम के परिनिर्वाण दिवस पर आयोजित रैली में उमड़ी भीड़ ने बसपा का 2012 से पहले की ऐतिहासिक रैलियाें की याद ताजा कर दी, जिसमें लाखों लोगों की भीड़ उमड़ती थी। बता दें कि सभी राजनीतिक दलों में बसपा ऐसी पार्टी है, जिसकी रैली में सबसे ज्यादा लोग आते हैं। वर्ष 2007 से 2012 के बीच हुई बसपा की रैलियों में 10 लाख से अधिक लोग जुटे थे। मायावती ने वर्ष 2007 में सत्ता प्राप्त प्राप्त करो संकल्प महारैली का आयोजन किया था, जिसके बाद बसपा की बहुमत की सरकार बनी थी। वहीं अगस्त 2008 को सावधान रहो, आगे बढ़ो रैली की थी। इसके बाद 15 मार्च 2010 को कांशीराम के जन्मदिन और बसपा के 25वीं वर्षगांठ पर विशाल महारैली का आयोजन किया था। वहीं 9 अक्टूबर 2012 को रमाबाई मैदान में महासंकल्प रैली की थी।