केजीएमयू: कर्मियों की नियुक्ति में गोलमाल, जांच हुई तो कई नपेंगे
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केजीएमयू में मृतक आश्रित के तहत हुईं नियुक्तियों में गोलमाल हुआ है। परिजनों के कार्यरत होने के बावजूद मृतक आश्रित के तहत नौकरियां बांटी गईं। शासन की ओर से कराई गई जांच में यह खुलासा हुआ है। इसके बाद जांच अधिकारी ने वर्ष 2002 के बाद मृतक आश्रित में हुईं सभी नियुक्तियों की जांच की संस्तुति करते हुए 25 अगस्त को कुलसचिव को रिपोर्ट सौंप दी। हालांकि, केजीएमयू प्रशासन मामला दबाए है।
समूह ग की नियुक्ति में हेरफेर का मामला कोर्ट में है। अब मृतक आश्रित की नियुक्तियों में गड़बड़ी मिली है। पहले एक कर्मचारी मां के कार्यरत होते हुए भी पिता के स्थान पर नौकरी हथियाने में कामयाब रहा। शासन से उसे हटाने का निर्देश दिया। केजीएमयू जांच के नाम पर मामला उलझाए रहा।
ऐसे कर्मचारियों की लंबी फेहरिस्त है। फिलहाल चिकित्सा शिक्षा विभाग के प्रमुख सचिव डॉ. रजनीश दुबे के निर्देश पर केजीएमयू के चिकित्सा अधीक्षक प्रो. डॉ. एएस मेहंदी ने नौ कर्मचारियों की नियुक्ति की जांच कर रिपोर्ट सौंपी है। सूत्र अनुसार छह की नियुक्ति में गड़बड़ी मिली है। तीन की नियुक्ति में परिजनों के कार्यरत होने संबंधी दस्तावेज नहीं मिले हैं।
जिनकी नियुक्ति में गड़बड़ी मिली, उनमें से तीन पिता और तीन मां की मौत के बाद मृतक आश्रित में नियुक्त हुए हैं। इनमें दो लिपिक,अन्य सफाई कर्मचारी हैं। रिपोर्ट में लिखा कि नियुक्ति के दौरान पिता के स्थान पर नौकरी पाने वालों की मां भी यूनिवर्सिटी में कार्यरत थीं। इसी तरह मां की मौत पर नौकरी पाने वालों के पिता या भाई पहले से कार्यरत थे।
ज्यादातर कर्मचारियों की नियुक्ति में हेराफेरी
यह है नियम
मृतक आश्रित में नौकरी पाने के लिए जरूरी है कि मृतक की पत्नी या पति पहले से संबंधित यूनिवर्सिटी में कार्यरत ना हो। यदि कोई परिजन पहले से कार्यरत है तो अनुकंपा नियुक्ति नियमावली 5 व नियम छह के तहत मृतक आश्रित कोटे में बेटे या बेटी को नौकरी नहीं दी जा सकती है।
यह था मामला
कर्मचारी की मृत्यु होने पर पत्नी काम करती रही और पति की जगह बेटे को नौकरी दे दी गई। चिकित्सा शिक्षा प्रमुख सचिव डॉ. रजनीश दुबे ने कुलसचिव को कार्रवाई का निर्देश देते हुए नियोक्ता की जानकारी मांगी। इस पर कर्मचारी ने ऐसे नौ अन्य लोगों की भी जांच कराने की मांग कर दी, जो उसकी नियुक्ति की तर्ज पर मृतक आश्रित में कार्यरत हैं।