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Lucknow News: बीओआई कर्मियों पर 64.82 करोड़ के गबन का आरोप
Thu, 15 Jan 2026 02:36 AM IST
लखनऊ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, लखनऊ
संवाद न्यूज एजेंसी, लखनऊ
Updated Thu, 15 Jan 2026 02:36 AM IST
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लखनऊ। वन निगम के प्रबंध निदेशक अरविंद कुमार सिंह ने बैंक ऑफ इंडिया की सदर शाखा के कर्मचारियों पर विभाग के 64 करोड़ 82 लाख रुपये के गबन का आरोप लगाया है। आरोपहै कि बैंक कर्मियों ने फर्जी खाता खोलकर रकम ट्रांसफर कर ली। सोमवार को प्रबंध निदेशक ने गाजीपुर थाने में बैंक कर्मियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई है।
फर्जी खाते में ट्रांसफर हुई करोड़ों की रकम : प्रबंध निदेशक अरविंद कुमार ने बताया कि वन विभाग की 64.82 करोड़ रुपये की एफडी बैंक ऑफ महाराष्ट्र में थी, जिसकी अवधि पूरी हो गई थी। विभाग इस रकम को अन्य बैंकों में एफडी कराने की तैयारी कर रहा था। इसके लिए 29 दिसंबर 2025 को निविदाएं आमंत्रित की गईं, जिसकी अंतिम तिथि 30 दिसंबर थी।
निविदाएं खुलने पर बैंक ऑफ इंडिया की सदर शाखा ने सर्वाधिक 6.73 प्रतिशत ब्याज दर की पेशकश की, जिसके चलते उसका चयन किया गया। 31 दिसंबर को गोमतीनगर के विक्रांत खंड स्थित एचडीएफसी बैंक के शाखा प्रबंधक को यह रकम बीओआई को ट्रांसफर करने के निर्देश दिए गए थे।
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रकम ट्रांसफर न होने पर घटा दी ब्याज दर
प्रबंध निदेशक ने बताया कि जब रकम ट्रांसफर नहीं हुई, तो बैंक ने 1 जनवरी 2026 को विभाग को ई-मेल कर नए वर्ष का हवाला देते हुए ब्याज दर 6.73 से घटाकर 6.70 प्रतिशत कर दी, जिस पर विभाग राजी हो गया। इसके बाद पांच जनवरी को सहायक लेखाकार राजकुमार गौतम ने एफडी के लिए बैंक से संपर्क किया।
बैंक से पत्र आने पर हुआ खुलासा
अरविंद का कहना है कि अगले दिन वन विभाग कार्यालय में बीओआई का पत्र आया, जो 22 दिसंबर को स्पीडपोस्ट किया गया था। पत्र में लिखा था कि 22 दिसंबर को उत्तर प्रदेश फॉरेस्ट कॉरपोरेशन के नाम पर बचत खाता खोला गया है, जिसमें 64.82 करोड़ रुपये जमा हुए। इसमें से केवल 6.82 करोड़ रुपये की एफडी की गई है। बैंक ने यह भी कहा कि खाता विभाग के एक कर्मचारी के कहने पर खोला गया है। प्रबंध निदेशक को यह सुनकर आश्चर्य हुआ, क्योंकि बताए गए विभाग के कर्मी कार्यरत ही नहीं थे। बैंक से पूरी रकम की रसीद मांगने पर कोई जवाब नहीं मिला। जांच के बाद प्रबंध निदेशक ने बैंक कर्मियों पर सरकारी धन के गबन का आरोप लगाते हुए गाजीपुर थाने में शिकायत दर्ज कराई।
बैंक से नहीं मिला जवाब
बैंक ऑफ इंडिया के एलबीएम मनीष पाठक से संपर्क करने की कोशिश की गई, लेकिन उनसे कोई जवाब नहीं मिला।
वन निगम के प्रबंध निदेशक ने तहरीर दी है। जांच के लिए पुलिस की दो टीमें गठित की गई हैं। एक टीम ने प्रबंध निदेशक से मामले से संबंधित दस्तावेज मांगे हैं। जबकि दूसरी टीम बैंक कर्मियों से संपर्क कर रही है। बैंक में जमा रकम और स्टेटमेंट की जांच की जा रही है। तफ्तीश में जो भी साक्ष्य मिलेंगे उस आधार पर कार्रवाई की जाएगी। यह भी पता लगाया जा रहा है कि एचडीएफसी बैंक को रकम ट्रांसफर करने के लिए क्यों कहा गया था।
-ए. विक्रम सिंह, एसीपी गाजीपुर
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फर्जी खाते में ट्रांसफर हुई करोड़ों की रकम : प्रबंध निदेशक अरविंद कुमार ने बताया कि वन विभाग की 64.82 करोड़ रुपये की एफडी बैंक ऑफ महाराष्ट्र में थी, जिसकी अवधि पूरी हो गई थी। विभाग इस रकम को अन्य बैंकों में एफडी कराने की तैयारी कर रहा था। इसके लिए 29 दिसंबर 2025 को निविदाएं आमंत्रित की गईं, जिसकी अंतिम तिथि 30 दिसंबर थी।
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निविदाएं खुलने पर बैंक ऑफ इंडिया की सदर शाखा ने सर्वाधिक 6.73 प्रतिशत ब्याज दर की पेशकश की, जिसके चलते उसका चयन किया गया। 31 दिसंबर को गोमतीनगर के विक्रांत खंड स्थित एचडीएफसी बैंक के शाखा प्रबंधक को यह रकम बीओआई को ट्रांसफर करने के निर्देश दिए गए थे।
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रकम ट्रांसफर न होने पर घटा दी ब्याज दर
प्रबंध निदेशक ने बताया कि जब रकम ट्रांसफर नहीं हुई, तो बैंक ने 1 जनवरी 2026 को विभाग को ई-मेल कर नए वर्ष का हवाला देते हुए ब्याज दर 6.73 से घटाकर 6.70 प्रतिशत कर दी, जिस पर विभाग राजी हो गया। इसके बाद पांच जनवरी को सहायक लेखाकार राजकुमार गौतम ने एफडी के लिए बैंक से संपर्क किया।
बैंक से पत्र आने पर हुआ खुलासा
अरविंद का कहना है कि अगले दिन वन विभाग कार्यालय में बीओआई का पत्र आया, जो 22 दिसंबर को स्पीडपोस्ट किया गया था। पत्र में लिखा था कि 22 दिसंबर को उत्तर प्रदेश फॉरेस्ट कॉरपोरेशन के नाम पर बचत खाता खोला गया है, जिसमें 64.82 करोड़ रुपये जमा हुए। इसमें से केवल 6.82 करोड़ रुपये की एफडी की गई है। बैंक ने यह भी कहा कि खाता विभाग के एक कर्मचारी के कहने पर खोला गया है। प्रबंध निदेशक को यह सुनकर आश्चर्य हुआ, क्योंकि बताए गए विभाग के कर्मी कार्यरत ही नहीं थे। बैंक से पूरी रकम की रसीद मांगने पर कोई जवाब नहीं मिला। जांच के बाद प्रबंध निदेशक ने बैंक कर्मियों पर सरकारी धन के गबन का आरोप लगाते हुए गाजीपुर थाने में शिकायत दर्ज कराई।
बैंक से नहीं मिला जवाब
बैंक ऑफ इंडिया के एलबीएम मनीष पाठक से संपर्क करने की कोशिश की गई, लेकिन उनसे कोई जवाब नहीं मिला।
वन निगम के प्रबंध निदेशक ने तहरीर दी है। जांच के लिए पुलिस की दो टीमें गठित की गई हैं। एक टीम ने प्रबंध निदेशक से मामले से संबंधित दस्तावेज मांगे हैं। जबकि दूसरी टीम बैंक कर्मियों से संपर्क कर रही है। बैंक में जमा रकम और स्टेटमेंट की जांच की जा रही है। तफ्तीश में जो भी साक्ष्य मिलेंगे उस आधार पर कार्रवाई की जाएगी। यह भी पता लगाया जा रहा है कि एचडीएफसी बैंक को रकम ट्रांसफर करने के लिए क्यों कहा गया था।
-ए. विक्रम सिंह, एसीपी गाजीपुर