यूपी : सरकारी नौकरियों में आवेदनों की संख्या पर तय होगा परीक्षा का स्तर
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प्रदेश सरकार ने विभिन्न भर्ती आयोगों व चयन बोर्डों की चयन प्रक्रिया को पारदर्शी बनाने और पेपर लीक से बचने के लिए ‘पालीवाल समिति’ की सिफारिशों को लागू करने का फैसला किया है। सरकार ने भर्ती परीक्षाओं में ज्यादा अभ्यर्थी होने पर दो स्तरीय परीक्षा कराने के प्रस्ताव पर भी सहमति दे दी है। इससे चयन आयोग व बोर्ड अधिक अभ्यर्थी होने पर स्क्रीनिंग परीक्षा और मुख्य परीक्षा का आयोजन कर सकेंगे।
दरअसल, प्रदेश सरकार ने अधीनस्थ सेवा चयन आयोग के चेयरमैन सीबी पालीवाल की अध्यक्षता में भर्ती आयोगों व बोर्डों की भर्ती प्रक्रिया को पारदर्शी व पेपर लीक जैसे मामलों को रोकने के लिए समिति का गठन किया था। इसमें सभी भर्ती आयोगों के सचिव बतौर सदस्य शामिल थे।
इस समिति ने कार्मिक विभाग को अपनी संस्तुतियां सौंपी थी। इन सिफारिशों पर विचार-विमर्श के बाद शासन ने लागू करने की मंजूरी दे दी है। राज्य लोक सेवा आयोग कई पदों के लिए प्रारंभिक के साथ मुख्य परीक्षा की प्रक्रिया अपनाता है। लेकिन अधीनस्थ सेवा चयन आयोग व अन्य कई भर्ती बोर्डों में दोहरी परीक्षा की व्यवस्था नहीं है।
अब अन्य आयोगों व बोर्डों में भी यह व्यवस्था लागू होने का रास्ता साफ हो गया है। प्राविधिक शिक्षा विभाग के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि अपर मुख्य सचिव नियुक्ति एवं कार्मिक मुकुल सिंघल की ओर से लोक सेवा आयोग व अधीनस्थ सेवा चयन आयोग के अध्यक्ष तथा उच्च शिक्षा, माध्यमिक शिक्षा, गृह, ऊर्जा व प्राविधिक शिक्षा के प्रमुख सचिवों व सचिवों को गाइडलाइन को लागू करने को कहा गया है।
अभ्यर्थियों को राहत, पड़ोस के मंडल में परीक्षा की मिलेगी सुविधा
सरकार ने अभ्यर्थियों की सुविधा का भी ध्यान रखा है। अब एक छोर के अभ्यर्थी को दूसरे छोर के जिले में परीक्षा के लिए दौड़ नहीं लगानी पड़ेगी। सरकार ने तय किया है कि परीक्षार्थियों को उनके निवास के मंडल से अलग करीब के परीक्षा केंद्र भेजा जाए। हालांकि परीक्षा केंद्रों का आवंटन रेंडम आधार पर होगा जिससे एक ही स्थान के परीक्षार्थी एक ही केंद्र में परीक्षा न दे सकें।
बनेंगे ‘ए’, ‘बी’, ‘सी’ व ‘डी’ श्रेणी के परीक्षा केंद्र
समिति ने परीक्षा केंद्रों के निर्धारण व ग्रेडिंग के लिए 28 मानक तय किए हैं। इसके लिए डीएम की अध्यक्षता में एक समिति होगी। इसमें एसएसपी, एनआईसी अधिकारी, उच्च शिक्षा व तकनीकी शिक्षा नियामक अधिकारी तथा डीआईओएस शामिल होंगे। ये अधिकारी प्रस्तावित परीक्षा केंद्र पर सीसीटीवी कैमरे, लाइट, फर्नीचर, पानी, बिजली जैसी व्यवस्थाओं व पूर्व में केंद्र बनने के ट्रैक रिकॉर्ड की जांच करेंगे। फिर शासकीय, अनुदानित अशासकीय व निजी संस्था के रूप में केंद्र का निर्धारण होगा। ‘ए’, ‘बी’, ‘सी’ व ‘डी’ श्रेणी के केंद्र तय किए जाएंगे। समिति संदिग्ध छवि वाले केंद्रों को भी चिह्नित करेगी और इन्हें किसी भी दशा में परीक्षा केंद्र नहीं बनाया जाएगा।
दो स्तर पर परीक्षा का प्रबंधन
परीक्षा से जुड़ी प्रक्रिया दो स्तर पर होगी। गोपनीय कार्यों में प्रश्नपत्र सेटिंग, छपाई, आवागमन, मूल्यांकन व रिजल्ट तैयार करने वाली संस्था का चयन आयोग व बोर्ड अपने स्तर पर करेंगे। आवेदन पत्र प्राप्त करना व परीक्षा का संचालन किसी अन्य एजेंसी को दिया जाएगा और पेपर प्रदेश के बाहर के प्रिंटिंग प्रेस से छपाए जाएंगे।
अन्य अहम सिफारिशें
- कक्ष निरीक्षक का कक्ष आवंटन अब परीक्षा के दिन होगा। परीक्षा शुरू होने से पूर्व रैंडमाइजेशन से उनकी ड्यूटी लगेगी।
- बड़े परीक्षा केंद्रों को प्रबंधन की दृष्टि से अलग-अलग ब्लॉकों में बांटा जाएगा।
- परीक्षा केंद्रों के चयन की नियमित प्रक्रिया होगी। वर्ष में कम से कम एक बार केंद्रों के चयन का परीक्षण होगा। नए केंद्र जोड़े जा सकेंगे और प्रतिकूल तथ्य वाले केंद्र हटाए जा सकेंगे।
- कोषागार से परीक्षा केंद्र तक प्रश्नपत्र मजिस्ट्रेट व पुलिस की देखरेख में भेजे जाएंगे। केंद्रों पर प्रश्नपत्र खोलने की वीडियोग्राफी होगी। प्रश्नपत्र स्टील ट्रंक में रखे जाएंगे जिनमें डिजिटल लॉक की व्यवस्था होगी।
- पुलिस मुख्यालय पर प्रदेश स्तरीय व जिला स्तर पर एडीएम स्तर के अधिकारी नोडल अधिकारी होंगे।
- प्रश्नपत्र लीक न हो इसके लिए शासन स्तर पर प्रमुख सचिव गृह की अध्यक्षता में एक समिति होगी। इसमें डीजीपी, संबंधित परीक्षा केप्रशासनिक विभाग के प्रमुख सचिव तथा संबंधित आयोग के राज्य स्तरीय तथा डीएम, एसएसपी व डीआईओएस शामिल होंगे।
नीतिगत कार्यवाही के निर्देश
- अलग-अलग विभागों में समूह ग के मिलते-जुलते पदों की नियमावलियों में समानता लाकर समान पदों की भर्ती परीक्षा एक साथ होगी। इसके लिए एक मानक नियमावली बनेगी।
- भर्ती प्रस्ताव भेजने की समय सारिणी तय होगी जिससे विभिन्न विभागों के समान पदों की चयन प्रक्रिया एक साथ हो सके।
- चयन आयोग व बोर्ड भर्ती प्रस्ताव मिलने की तिथि से परिणाम घोषित होने की तिथि तक स्पष्ट कैलेंडर बनाकर सार्वजनिक कर उसे लागू करेंगे।