इन कलाकारों का कभी रोका गया था डिप्लोमा, अब वहीं मिलेगा बड़ा सम्मान
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रंगमंच में री-टेक नहीं होता लेकिन यह बहुत कुछ री-टेक जैसा ही है। ऐसे रंगकर्मी जो अकादमी में डिप्लोमा पूरा नहीं कर सके, जिन्हें उनकी परीक्षाओं से रोक दिया गया, कहा गया कि वे डिप्लोमा के योग्य नहीं हैं, अकादमी अब उन्हें उसी डिप्लोमा की मानद उपाधि से सम्मानित करेगी।
आप इसे अकादमी का भूल सुधार कह सकते हैं। अकादमी 17 जनवरी को होने वाले दीक्षांत समारोह में ऐसे चार रंगकर्मियों को मानद उपाधि प्रदान करेगी जो उसके पूर्व छात्र तो हैं, लेकिन उन्हें डिप्लोमा का प्रमाण पत्र नहीं दिया जा सका था और अकादमी के कागजों में उत्तीर्ण पूर्व विद्यार्थियों में उनका नाम दर्ज नहीं है।
इन रंगकर्मियों ने आज अपने काम से समाज में जो प्रतिष्ठा हासिल की है, उससे अकादमी को उन्हें अपने पूर्व छात्र के रूप में रेखांकित करना जरूरी लगता है।प्रसिद्ध टीवी कलाकार और रंगकर्मी अनुपम श्याम, जो इन चार रंगकर्मियों में से एक हैं, इस पूरे प्रसंग पर बहुत ही सटीक शेर कहते हैं-‘शायद मुझे निकालकर पछता रहे हैं आप, महफिल में इस ख्याल से फिर आ गया हूं मैं’।
अनुपम श्याम अकादमी से निकलकर आठ वर्षों तक राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय के रेपेटरी में काम करते रहे। नाटकों से पहचान बनाई, फिर टीवी धारावाहिकों और फिल्मों में अभिनय किया।
कम उपस्थिति की वजह से मौखिक परीक्षा से रोका
अनुपम इस पर अधिक चर्चा नहीं करते। कहते हैं-‘कुछ तो मजबूरियां रही होंगी, यूं कोई बेवफा नहीं होता’। हालांकि अनुपम यह जरूर कहते हैं कि जो सीखा है, भारतेंदु नाट्य अकादमी से सीखा है, राज बिसारिया जी और दूसरे गुरुओं से सीखा है और यही काम आया है।
नाटकों और टेलीविजन में सक्रिय राकेश कहते हैं, मैं किसी नाटक के कारण ही कुछ दिन अनुपस्थित रहा और मुझसे कहा गया कि तुम मौखिक परीक्षा में शामिल नहीं हो सकते। उसके बाद मैंने प्रमाण पत्र पाने की कोशिश नहीं की।
पांच-छह साल बाद राज बिसारिया जी ने कहा कि मैं तुम्हें डिप्लोमा देना चाहता हूं। हालांकि बात आई और चली गई। अब जब यह मानद उपाधि मिल रही है तो खुशी हो रही है।
सत्र पूरा करने के बावजूद रोक दिया डिप्लोमा
शायद मुझे निकालकर पछता रहे हैं आप, महफिल में इस ख्याल से फिर आ गया हूं मैं।
-अनुपम श्याम
कला में मुख्यत: शिक्षा ही होती है लेकिन इतने वर्षों बाद अकादमी ने ऐसा सोचा है तो अच्छा लग रहा है।
-जेपी सिंह
अकादमी को सूचित कर एमए की परीक्षा देने गया था और अनुपस्थित कर दिया गया। शायद मैं गुरुओं को प्रिय नहीं था।
-जितेंद्र मित्तल
नाटकों के कारण ही कुछ समय के लिए अनुपस्थित रहा तो कहा गया कि तुम मौखिक परीक्षा नहीं दे सकते।
-राकेश पांडेय
अकादमी ने 17 जनवरी को अपने दीक्षांत समारोह में ऐसे चार रंगकर्मियों को मानद उपाधि देने का निर्णय किया है जिन्होंने अपने क्षेत्र में प्रतिष्ठा हासिल की है लेकिन अकादमी में सत्र पूरा करने के बावजूद उनका डिप्लोमा रोक दिया गया था। -रमेशचंद्र गुप्त, निदेशक, बीएनए