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पश्चिम सीट पर भाजपा कार्यकर्ता बाहरी के विरोध में
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पशि्चमी सीट पर भाजपाइयों को बाहरी मंजूर नहीं। (फोटो ः प्रतीकात्मक)
- फोटो : ??? ?????
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राजन परिहार
भाजपा में यूं तो राजधानी की हर सीट पर टिकट को लेकर कई दावेदार हैं, लेकिन पश्चिम सीट को लेकर कुछ ज्यादा ही गहमागहमी है। इस सीट के विधायक सुरेश श्रीवास्तव का निधन हो चुका है।
ऐसे में यहां अब भाजपा से नया उम्मीदवार उतारा जाना है। इसको लेकर तरह-तरह के दावे हो रहे हैं।
रविवार को पार्टी के क्षेत्र के कई वर्तमान, पूर्व पदाधिकारियों संग वरिष्ठ नेताओं ने बैठक करके प्रदेश के वरिष्ठ नेता को छोड़कर किसी बाहरी को टिकट दिए जाने पर विरोध करने का निर्णय किया है।
यह गोपनीय बैठक बालागंज के एक लॉन में हुई। दोपहर में करीब एक घंटे चली बैठक में क्षेत्र के राजाजीपुरम से लेकर सआदतगंज, चौक तक के कई वरिष्ठ वर्तमान व पूर्व सभासद और क्षेत्र के संगठन के कुछ पूर्व व वर्तमान मंडल अध्यक्ष शामिल हुए।
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इनमें कई टिकटार्थी भी थे। बैठक में नहीं थे तो वे टिकटार्थी जिनका चेहरा मैदान में बिल्कुल नया है। कहने को ये बैठक सिर्फ आम चाय पर चर्चा की थी, लेकिन इसमें मुद्दा बाहरी को क्षेत्र से चुनाव न लड़ने देने का रहा।
बैठक में एकसुर से साथ होने का संकल्प व्यक्त किया गया, लेकिन बाहरी को किसी तरह का समर्थन न देने पर भी आमराय रही। सिर्फ पार्टी के प्रदेश स्तरीय बड़े नेता को ही लड़ने की छूट होगी।
बैठक में तय किया गया कि इस निर्णय की जानकारी सांसद व रक्षामंत्री राजनाथ सिंह को भेजी जाएगी। यही नहीं यहां भी पार्टी के वरिष्ठ पदाधिकारियों को अपनी भावनाओं से अवगत कराया जाएगा।
स्वयं घोषित प्रत्याशी भी यहां
पश्चिम सीट में विधानसभा चुनाव को लेकर स्थिति यह है कि इस समय भाजपा के कई दावेदार तो ऐसे हैं, जिन्होंने स्वयं को पार्टी का प्रत्याशी घोषित कर रखा है। होर्डिंग, बैनर तो शुभकामनाओं के लग रहे हैं, लेकिन मौखिक बताया जा रहा है कि उन्हें पार्टी ने चुनाव लड़ने क्षेत्र में भेजा है। कोई दावेदार खुद को सीधे प्रधानमंत्री से जुड़ा बता रहा है, तो कोई सांसद राजनाथ सिंह से हरी झंडी मिलने का दावा कर रहा है। पारिवारिक दावेदारी भी हो रही है। पुराने दिग्गज भी अपनी लंबी तपस्या का फल पार्टी से चाहते हैं।
जातिगत मुद्दा भी
वर्तमान पश्चिम सीट का राजाजीपुरम कॉलोनी, सआदतगंज का अधिकांश हिस्सा पूर्व में मध्य सीट में था। सुरेश श्रीवास्तव उसी सीट से चुनाव लड़कर जीतते रहे थे। इसके बाद ये इलाके पश्चिम सीट में चले गए तो फिर पार्टी के वरिष्ठ सुरेश श्रीवास्तव को ही टिकट मिला। पूर्व में मध्य सीट पर जातिगत समीकरण में कायस्थों की संख्या ठीक-ठाक मानी जाती रही और इसीलिए सुरेश श्रीवास्तव यहां से कई बार लड़े और जीते। इसी फॉर्मूले से इस बार भी कायस्थ उम्मीदवार की दावेदारी यहां से मजबूत मानी जा रही है। हालांकि, अब कहा जाता है कि परिसीमन के बाद मध्य सीट में भी बड़ी संख्या में कायस्थ वोट बैंक हो गया है। दोनों विधानसभा क्षेत्र के लोग एक-दूसरे के यहां ज्यादा कायस्थ होने की बात कहते हैं। बहरहाल, पार्टी के सामने कायस्थ दावेदारी को भी कहीं न कहीं जगह दी जानी है।
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भाजपा में यूं तो राजधानी की हर सीट पर टिकट को लेकर कई दावेदार हैं, लेकिन पश्चिम सीट को लेकर कुछ ज्यादा ही गहमागहमी है। इस सीट के विधायक सुरेश श्रीवास्तव का निधन हो चुका है।
ऐसे में यहां अब भाजपा से नया उम्मीदवार उतारा जाना है। इसको लेकर तरह-तरह के दावे हो रहे हैं।
रविवार को पार्टी के क्षेत्र के कई वर्तमान, पूर्व पदाधिकारियों संग वरिष्ठ नेताओं ने बैठक करके प्रदेश के वरिष्ठ नेता को छोड़कर किसी बाहरी को टिकट दिए जाने पर विरोध करने का निर्णय किया है।
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यह गोपनीय बैठक बालागंज के एक लॉन में हुई। दोपहर में करीब एक घंटे चली बैठक में क्षेत्र के राजाजीपुरम से लेकर सआदतगंज, चौक तक के कई वरिष्ठ वर्तमान व पूर्व सभासद और क्षेत्र के संगठन के कुछ पूर्व व वर्तमान मंडल अध्यक्ष शामिल हुए।
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इनमें कई टिकटार्थी भी थे। बैठक में नहीं थे तो वे टिकटार्थी जिनका चेहरा मैदान में बिल्कुल नया है। कहने को ये बैठक सिर्फ आम चाय पर चर्चा की थी, लेकिन इसमें मुद्दा बाहरी को क्षेत्र से चुनाव न लड़ने देने का रहा।
बैठक में एकसुर से साथ होने का संकल्प व्यक्त किया गया, लेकिन बाहरी को किसी तरह का समर्थन न देने पर भी आमराय रही। सिर्फ पार्टी के प्रदेश स्तरीय बड़े नेता को ही लड़ने की छूट होगी।
बैठक में तय किया गया कि इस निर्णय की जानकारी सांसद व रक्षामंत्री राजनाथ सिंह को भेजी जाएगी। यही नहीं यहां भी पार्टी के वरिष्ठ पदाधिकारियों को अपनी भावनाओं से अवगत कराया जाएगा।
स्वयं घोषित प्रत्याशी भी यहां
पश्चिम सीट में विधानसभा चुनाव को लेकर स्थिति यह है कि इस समय भाजपा के कई दावेदार तो ऐसे हैं, जिन्होंने स्वयं को पार्टी का प्रत्याशी घोषित कर रखा है। होर्डिंग, बैनर तो शुभकामनाओं के लग रहे हैं, लेकिन मौखिक बताया जा रहा है कि उन्हें पार्टी ने चुनाव लड़ने क्षेत्र में भेजा है। कोई दावेदार खुद को सीधे प्रधानमंत्री से जुड़ा बता रहा है, तो कोई सांसद राजनाथ सिंह से हरी झंडी मिलने का दावा कर रहा है। पारिवारिक दावेदारी भी हो रही है। पुराने दिग्गज भी अपनी लंबी तपस्या का फल पार्टी से चाहते हैं।
जातिगत मुद्दा भी
वर्तमान पश्चिम सीट का राजाजीपुरम कॉलोनी, सआदतगंज का अधिकांश हिस्सा पूर्व में मध्य सीट में था। सुरेश श्रीवास्तव उसी सीट से चुनाव लड़कर जीतते रहे थे। इसके बाद ये इलाके पश्चिम सीट में चले गए तो फिर पार्टी के वरिष्ठ सुरेश श्रीवास्तव को ही टिकट मिला। पूर्व में मध्य सीट पर जातिगत समीकरण में कायस्थों की संख्या ठीक-ठाक मानी जाती रही और इसीलिए सुरेश श्रीवास्तव यहां से कई बार लड़े और जीते। इसी फॉर्मूले से इस बार भी कायस्थ उम्मीदवार की दावेदारी यहां से मजबूत मानी जा रही है। हालांकि, अब कहा जाता है कि परिसीमन के बाद मध्य सीट में भी बड़ी संख्या में कायस्थ वोट बैंक हो गया है। दोनों विधानसभा क्षेत्र के लोग एक-दूसरे के यहां ज्यादा कायस्थ होने की बात कहते हैं। बहरहाल, पार्टी के सामने कायस्थ दावेदारी को भी कहीं न कहीं जगह दी जानी है।