भाजपा प्रदेश अध्यक्ष के निर्वाचन के बाद अब संगठन में बदलाव की तैयारी, कई की विदाई तय
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स्वतंत्र देव सिंह के भाजपा के निर्वाचित प्रदेश अध्यक्ष बनने के बाद अब संगठन में फेरबदल भी सुनिश्चित हो गया। इसमें संगठन से कुछ की विदाई तय नजर आ रही है तो कुछ को तरक्की भी मिलने के संकेत हैं। कई नए चेहरों को भी संगठन में जगह मिल सकती है। इसके अलावा मोर्चा व प्रकोष्ठों में भी कुछ बदलाव तय माना जा रहा है। फेरबदल की प्रक्रिया फरवरी अंत तक पूरी हो जाने की उम्मीद है।
वैसे तो स्वतंत्र देव को भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष मनोनीत हुए लगभग 6 महीने हो चुके हैं, पर अभी तक उन्होंने भाजपा के प्रदेश संगठन में कोई बदलाव नहीं किया है। इसकी वजह स्वतंत्र देव का अभी तक मनोनीत अध्यक्ष होना है। भाजपा की परंपरा रही है कि किसी विशेष परिस्थिति में प्रदेश अध्यक्ष बदल भी जाए तो बीच में पदाधिकारियों में आमतौर पर कोई बदलाव नहीं किया जाता।
अब स्वतंत्र देव भाजपा के निर्वाचित अध्यक्ष हो चुके हैं। इसी के साथ नई सदस्यता होने और पुरानों की सदस्यता नवीनीकरण के साथ पदाधिकारियों का तीन वर्ष के एक सत्र का कार्यकाल भी पूरा हो चुका है। इसलिए अब पूरे संगठन में बदलाव तय है।
इस तरह भी होंगे बदलाव: प्रदेश पदाधिकारियों में जिन पदों को संभालने वालों को तरक्की देकर उक्त पदों की नई जिम्मेदारी सौंपी जाएगी, उनके स्थान पर भी नए लोगों को नियुक्त करना होगा। नई टीम में कुछ क्षेत्रीय पदाधिकारियों को भी प्रदेश पदाधिकारी बनाकर नई भूमिका सौंपी जाएगी तो क्षेत्रीय पदाधिकारियों के प्रदेश में समायोजन से रिक्त हुए स्थान पर जिलों व महानगरों के मौजूदा व पूर्व पदाधिकारियों को तरक्की देकर समायोजित किया जाएगा।
इन पदों पर नए चेहरे
केंद्र में सरकार बनने के बाद प्रदेश उपाध्यक्ष डॉ. संजीव बालियान को केंद्रीय मंत्रिमंडल में शामिल किया जा चुका है। प्रदेश महामंत्री अशोक कटारिया और नीलिमा कटियार भी मंत्री बनकर सरकार में शामिल हो चुके हैं। प्रदेश उपाध्यक्ष जेपीएस राठौर राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के अध्यक्ष हैं।
उपाध्यक्ष बीएल वर्मा भी एक निगम के अध्यक्ष हैं। जसवंत सैनी राज्य पिछड़ा वर्ग आयोग के उपाध्यक्ष बनाए जा चुके हैं। प्रदेश मंत्री धर्मवीर प्रजापति भी माटी कला बोर्ड के अध्यक्ष बनाए गए हैं। भाजपा में एक व्यक्ति-एक पद के सिद्धांत के नाते संगठन के पुनर्गठन में इन्हें पदाधिकारी का पद छोड़ना ही पड़ेगा। अभी कुछ आयोगों में स्थान खाली हुए हैं।
कहा जा रहा है कि प्रदेश के दो पदाधिकारियों को इनमें दो आयोगों में भेजना तय है। जाहिर है कि इन सभी की जगह नए लोगों को जिम्मेदारी सौंपनी होगी।