श्रद्धांजलि सभा पर सियासत: मुलायम के नहीं आने को सियासी मुद्दा बनाएगी भाजपा, पिछड़े वोट को साधने की तैयारी
भाजपा ने कल्याण सिंह की श्रद्धांजलि सभा के सहारे पिछड़े व हिंदू वोटों को साधने की तैयारी की है। भाजपा इस बात का प्रचार करेगी कि तुष्टिकरण की नीति के कारण मुलायम व अखिलेश यादव कल्याण की श्रद्घांजलि सभा में नहीं आए।
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
उत्तर प्रदेश भाजपा अध्यक्ष स्वतंत्र देव सिंह के आमंत्रण के बाद भी सपा संरक्षक मुलायम सिंह यादव पूर्व मुख्यमंत्री कल्याण सिंह की श्रद्धांजलि सभा में नहीं पहुंचे। वहीं कांग्रेस की ओर से भी किसी नेता ने कल्याण सिंह को श्रद्धासुमन अर्पित नहीं किए। भाजपा ने अब श्रद्धांजलि की सियासत का दांव खेलते हुए न केवल पिछड़े वोट बैंक और हिंदू वोट बैंक को साधने की तैयारी की है बल्कि सपा और कांग्रेस को मुस्लिम तुष्टिकरण के नाम पर घेरने की भी रणनीति तैयार की है। उधर, बसपा की ओर से महासचिव सतीश चंद्र मिश्रा ने कल्याण सिंह की श्रद्धाजंलि सभा में पहुंचकर बसपा सुप्रीमो मायावती का एजेंडा साफ कर दिया।
भाजपा प्रदेश अध्यक्ष स्वतंत्र देव सिंह ने सोमवार शाम मुलायम सिंह यादव के आवास पर पहुंचकर उन्हें कल्याण सिंह की श्रद्धांजलि सभा के लिए आमंत्रित किया था। स्वतंत्र देव ने मायावती से भी फोन पर बात कर आमंत्रण दिया था। इनके अलावा स्वतंत्र देव ने करीब 40 क्षेत्रीय राजनीतिक दलों के नेताओं को भी श्रद्धांजलि सभा में आने का आमंत्रण दिया था।
मंगलवार को गोमतीनगर विस्तार स्थित सीएमएस स्कूल के सभागार में आयोजित श्रद्धांजलि सभा में सपा संरक्षक मुलायम सिंह यादव नहीं पहुंचे। जबकि बसपा के महासचिव सतीश चंद्र मिश्रा ने न केवल बसपा सुप्रीमो की ओर से श्रद्धांजलि अर्पित की बल्कि कल्याण सिंह की स्मृति में अपने विचार भी रखे।
कांग्रेस को भी इसी मुद्दे पर घेरने की तैयारी
जानकारों का मानना है कि आगामी विधानसभा चुनाव में भाजपा इसे प्रचारित करेगी कि मुलायम सिंह आमंत्रण मिलने के बाद भी मुस्लिम वोट बैंक की खातिर पिछड़े वर्ग के नेता कल्याण सिंह को श्रद्धांजलि अर्पित करने नहीं पहुंचे। पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष स्वतंत्र देव सिंह सपा पर पहले ही ऐसा आरोप लगा चुके हैं। भाजपा केवल सपा ही नहीं बल्कि कांग्रेस को भी इस मुद्दे पर घेरेगी।
वहीं मायावती ने 22 अगस्त को खुद कल्याण सिंह के आवास पर पहुंचकर श्रद्धांजलि देकर और मंगलवार को सतीश चंद्र मिश्रा को भेजकर साफ कर दिया है कि पिछड़े वोट बैंक पर उनकी भी नजर है। बसपा सुप्रीमो खुद को मुस्लिम तुष्टिकरण के आरोप से बचाते हुए दलित, पिछड़े और मुस्लिम वोट बैंक को साधने की रणनीति बना रही हैं।