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2014 में जीती हुई सीटों पर क्यों हारी भाजपा ?, होगा मंथन, भितरघातियों पर कार्रवाई संभव

Thu, 30 May 2019 12:57 AM IST
Amulya Rastogi न्यूज डेस्क, अमर उजाला लखनऊ
न्यूज डेस्क, अमर उजाला लखनऊ Published by: Amulya Rastogi Updated Thu, 30 May 2019 12:57 AM IST
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bjp will brainstorm on loosing seats which they won in 2014
प्रतीकात्मक तस्वीर
वैसे तो भाजपा गठबंधन सहित 64 सीटों की जीत को अपनी सफलता मान रही है पर पार्टी के रणनीतिकारों को 2014 में जीती हुई कुछ सीटें हाथ से निकल जाना हजम नहीं हो रहा। इसलिए हार के कारणों पर क्षेत्रीय अध्यक्षों और प्रभारियों से रिपोर्ट मांगने का फैसला किया गया है। ताकि भितरघातियों पर कार्रवाई कर आगे की चुनौतियों से निपटा जा सके। 
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भाजपा को चुनाव में बूथ प्रबंधन व्यवस्था पर संतोष तो है लेकिन पार्टी के रणनीतिकारों को इसमें अभी और सुधार की जरूरत महसूस हो रही है।

बुधवार को यहां पार्टी मुख्यालय पर हुई बैठक में चुनाव नतीजों की समीक्षा की गई और इन फैसलों के साथ आने वाले दिनों में गठबंधन की गणित से निपटने की रणनीति पर बातचीत हुई। गठबंधन की गणित की काट को मायावती के वोट में और सेंधमारी का भी फैसला किया गया।
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इसके लिए अनुसूचित जाति के लोगों को और अधिक जोड़ने की रणनीति पर बातचीत हुई। इस बार के चुनाव नतीजों से निकले निष्कर्ष के आधार पर भाजपा ने संगठन का ढांचा अब मतदान केंद्र के आधार पर बनाने की तैयारी की है।
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एक हजार पर एक का प्रयोग को विस्तार

वैसे तो प्रदेश भाजपा की अगली बड़ी चुनावी परीक्षा 2022 के विधानसभा चुनाव में होनी है लेकिन पार्टी ने निकट भविष्य में विधानसभा के 11 उपचुनाव के मद्देनजर ‘एक हजार पर एक’ के प्रयोग को और प्रभावी बनाकर मायावती के वोट बैंक में सेंधमारी की तैयारी की है।

आपको बता दें कि भाजपा ने लोकसभा चुनाव के मद्देनजर अनुसूचित जाति के 1000 लोगों पर भाजपा के एक प्रमुख व्यक्ति को लगाकर इन्हें पार्टी के साथ जोड़ने की रणनीति पर काम किया था। इसके नतीजे उम्मीदों के अनुरूप रहे। इसलिए अब इसे विस्तार देने का फैसला किया गया है।

वोटर लिस्ट को सुधारने का अभियान

बैठक में मौजूद नेताओं ने महसूस किया कि तमाम कोशिशों के बावजूद वोटर लिस्ट अब भी पूरी तरह दुरुस्त नहीं हो पाई है। इस कारण कई गड़बड़ियां हो रही है। इसे पूरी तरह दुरुस्त करने के लिए आधार कार्ड से जोड़ा जाना चाहिए।

चुनाव के दौरान वाररूम के प्रयोग को सफल मानते हुए यह स्वीकार किया गया कि इसकी मदद से लोगों से संपर्क व संवाद में आसानी रही। साथ ही सोशल मीडिया के जरिये भी विपक्षी आक्रमणों को कमजोर किया जा सका। इस पर भी संतोष व्य्क्त किया गया कि वाररूम के जरिये दो करोड़ लोगों से सीधे संवाद के चलते भी चुनाव में लाभ मिला।

चुनाव प्रभारियों का आभार

बैठक में प्रदेश चुनाव प्रभारी जे.पी. नड्डा, सह प्रभारी गोवर्धन झड़पिया, नरोत्तम मिश्र, दुष्यंत गौतम का आभार व्यक्त किया गया। अध्यक्षता प्रदेश अध्यक्ष डॉ. महेन्द्र नाथ पाण्डेय ने की। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य, उपाध्यक्ष जे.पी.एस. राठौर, प्रदेश महामंत्री संगठन सुनील बंसल, प्रदेश महामंत्री पंकज सिंह और गोविंद शुक्ल, प्रदेश पदाधिकारी, क्षेत्रीय अध्यक्ष, क्षेत्रीय प्रभारी, क्षेत्रीय संगठन मंत्री बैठक में शामिल रहे।
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