भाजपा साल के पहले ही दिन से राष्ट्रवाद के एजेंडे को दे रही धार, 'नागरिकता' पर विपक्ष ने दिया मौका
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भाजपा ने साल 2019 के जाते-जाते 2020 में राष्ट्रवाद के एजेंडे को और धार देने के लिए नागरिकता संशोधन कानून (सीएए) के जरिये मुद्दा तलाश लिया और विपक्ष के विरोध ने उसे इस पर अभियान चलाने का मौका भी दे दिया। अब इसे जमीन पर उतारने के लिए भाजपा के पदाधिकारी, सांसद व विधायक नववर्ष के पहले ही दिन बुधवार से मैदान में उतर गए हैं।
ये 25 जनवरी तक प्रदेश के एक लाख गांवों में जाकर 50 लाख परिवारों से संपर्क कर उन्हें सीएए के बारे में समझाकर पार्टी के साथ लामबंद करने की कोशिश करेंगे और राष्ट्रवाद के एजेंडे को परवान चढ़ाएंगे। यह तो बहस का मुद्दा हो सकता है कि इससे भाजपा को कितना राजनीतिक लाभ होगा, लेकिन अतीत में घटी घटनाओं और उनके परिणामों पर नजर डालें तो लगता यही है।
वर्ष 2014, 2017 और 2019 में विपक्ष की तरफ से मोदी, शाह व योगी सहित भाजपा नेताओं को जिस तरह मुस्लिम विरोधी साबित करने की कोशिश की गई। इन्हें मुसलमानों का दुश्मन बताया गया, उसका इस्तेमाल भाजपा नेताओं ने हिंदुओं का ध्रुवीकरण करने में किया। इसका उदाहरण हैं कब्रिस्तान बनाम श्मशान और ईद बनाम दिवाली जैसे नारे। भाजपा ने सीएए पर हो रहे विरोध को भी अपने राष्ट्रवाद के सहारे हिंदुत्व के एजेंडे को धार देने की तैयारी कर ली है।
यह है वजह
भाजपा नेता लोगों को बताएंगे कि नागरिकता संशोधन कानून अल्पसंख्यकों के विरुद्ध नहीं है। विपक्षी दलों को सारी आपत्ति सिर्फ इसलिए है कि इसमें इन देशों से आए मुस्लिमों को भारतीय नागरिकता देने की व्यवस्था नहीं की गई है। भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष स्वतंत्र देव सिंह कहते भी हैं कि तुष्टीकरण की बदौलत वर्षों तक वोट बैंक की राजनीति करने वाले मुस्लिमों को भ्रमित कर रहे हैं। सीएए में किसी भी भारतीय मुस्लिम की नागरिकता लेने का प्रावधान नहीं है लेकिन उन्हें नागरिकता छीने जाने का भय दिखाकर भड़का रहे हैं।
इस तरह तैयारी
अभियान के तहत भाजपा नेता लोगों को बताएंगे कि बांग्लादेश में 1947 में हिंदू 22 प्रतिशत थे। वे 2011 में 7.8 प्रतिशत रह गए। पाकिस्तान में 1947 में हिंदुओं की आबादी 23 प्रतिशत थी। वह 2011 में मात्र 3.2 प्रतिशत रह गई। अफगानिस्तान में भी तेजी से हिंदुओं की आबादी घटती गई। इसके विपरीत भारत में 1951 की जनगणना में मुस्लिम आबादी 9.8 प्रतिशत थी। वह बढ़कर 2019 में 14.23 प्रतिशत हो गई। पाकिस्तान, अफगानिस्तान एवं बांग्लादेश के सर्वोच्च पदों पर किसी हिंदू, जैन, बौद्ध, पारसी या सिख को काम करने का मौका नहीं मिला।
इसके विपरीत भारत में सभी शीर्ष पदों पर इन्हें मौका दिया गया। इसके लिए पहले चरण में भाजपा के लोग डॉक्टरों, अधिवक्ताओं, प्रोफेसरों, अध्यापकों, सेवानिवृत्त अधिकारियों सहित समाज के अन्य प्रतिष्ठित व्यक्तियों से संपर्क कर और छह स्थानों पर सभाएं करके नागरिकता संशोधन अधिनियम 2019 के बारे में बताएंगे। दूसरे चरण में जिला स्तर पर गोष्ठियों और जनजागरण के अभियान चलेंगे।
भाजपा के पक्ष में ध्रुवीकरण
बीएचयू के राजनीति शास्त्र विभाग के अध्यक्ष प्रो. कौशल किशोर का कहना है कि मुसलमानों को समझना होगा कि सीएए लागू हुए लगभग एक पखवाड़ा हो चुका है। इस दौरान किसी भारतीय मुस्लिम की नागरिकता नहीं गई है तो आगे भी नहीं जाएगी। यह कानून पाकिस्तान, अफगानिस्तान और बांग्लादेश से आए गैर मुस्लिम जो वहां अल्पसंख्यक की श्रेणी में आते हैं, उन्हें भारत की नागरिकता देने के लिए बनाया गया है। जिन देशों से आए गैर मुस्लिमों की बात हो रही है, वे मुस्लिम देश ही हैं। मुस्लिम वहां अल्पसंख्यक नहीं हैं कि इस कानून का लाभ उन्हें मिले। इस कानून का विरोध न सिर्फ इन देशों से आए गैर मुस्लिमों को भाजपा के पक्ष में लामबंद कर रहा है बल्कि देश के उन हिंदुओं को भी भाजपा के पक्ष में खड़ा कर रहा है जो अभी तक भाजपा को वोट नहीं देते थे। सीएए का विरोध हिंदुओं को भाजपा के पक्ष में अयोध्या आंदोलन से अधिक लामबंद कर रहा है।