यूपी में फिर तिरंगा के सहारे सियासी संग्राम साधेगी भाजपा
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
यूपी के चुनावी समर 2017 के लिए भाजपा ने राजनीति पर राष्ट्रवाद का रंग चढ़ाकर मैदान में उतरने की रणनीति पर काम शुरू कर दिया है। इसके लिए उसने कार्यकर्ताओं के हाथ में राष्ट्रीय ध्वज ‘तिरंगा’ थमाने का फैसला किया है।
इसके तहत भाजपा का हर सांसद, विधायक, नेता और पार्टी के पदाधिकारियों को स्वतंत्रता दिवस के ठीक अगले दिन यानी 16 अगस्त से तिरंगा यात्रा निकालनी होगी।
ये यात्राएं विधानसभा के सभी 403 क्षेत्रों में प्रत्येक बूथ तक जाएंगी। इस दौरान कार्यकर्ताओं के हाथ में आठ फिट का तिरंगा झंडा और मोदी सरकार की दो साल की उपलब्धियों की किताब भी रहेगी।
इस यात्रा में कार्यकर्ता जहां आजादी के बाद से आज तक 70 वर्षों में देश की परिस्थितियों में बदलाव न होने का कारण गिनाएंगे, वहीं मोदी सरकार में दो साल में हुए प्रमुख 70 काम गिनाए जाएंगे। यात्रा के दौरान किसी न किसी बहाने कांग्रेस पर भी हमला बोला जाएगा।
भूले-बिसरे क्रांतिकारियों व स्वतंत्रता सेनानियों की गौरव गाथाएं भी सुनाई जाएंगी। बताया जाएगा कि तमाम महत्वपूर्ण स्वतंत्रता सेनानियों व क्रांतिकारियों की कुर्बानियों को कांग्रेस की सरकारों ने जानबूझकर चर्चा में आने नहीं दिया।
लगेंगे वंदे मातरम व भारत माता की जय के नारे
भाजपा ने यात्राएं सिर्फ मोटरसाइकिलों से निकालने को कहा है। इस दौरान वंदे मातरम व भारत माता की जय के अलावा अन्य नारे नहीं लगाए जाएंगे। इससे स्पष्ट है कि भगवा रणनीतिकार इस यात्रा के सहारे कहीं न किसी सियासी समीकरण ही साधना चाहते हैं।
मुख्य रूप से अभियान की जिम्मेदारी निभाने वाले सांसद व विधायक समर्थकों के साथ 16 से 22 अगस्त तक पूरे क्षेत्र में घूमेंगे। मंडल व ब्लॉक स्तर पर प्रमुख कार्यकर्ताओं को इसकी जिम्मेदारी सौंपी जाएगी।
ये कार्यकर्ता मोटरसाइकिल टोलियों के साथ बूथ-बूथ जाएंगे। मंडल स्तरीय एक पदाधिकारी दिन भर में 20 बूथों तक जाकर मोदी सरकार की उपलब्धियां और दूसरों की खामियां बताएंगे। कुछ स्थानों पर पार्टी के सांसद व विधायक भी इसमें शामिल होंगे।
भाजपा पहले भी ले चुकी है तिरंगे का सहारा
राजनीति पर राष्ट्रवाद का रंग चढ़ाने के लिए भाजपा पहले भी तिरंगे का सहारा ले चुकी है। डॉ. मुरली मनोहर जोशी ने वर्ष 1991 में पाकिस्तानी आतंकियों को सबक सिखाने के लिए कन्याकुमारी से कश्मीर तक एकता यात्रा निकालकर वहां के लाल चौक पर तिरंगा फहराया था। इस यात्रा में डॉ. जोशी के साथ मोदी भी थे।
इसके बाद वर्ष 1994 में उमा भारती ने कर्नाटक में एक वर्ग से जुड़े स्थल पर तिरंगा फहराया था। इसी में उन पर मुकदमा दर्ज हो गया था जो बाद में मध्यप्रदेश में मुख्यमंत्री की कुर्सी से उनकी विदाई का कारण बना।
वर्ष 2011 में भाजपा युवा मोर्चा ने तिरंगा यात्रा निकाली थी। यह यात्रा भी कश्मीर जानी थी, जिस पर जम्मू-कश्मीर के तत्कालीन मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने रोक लगा थी।