UP:अयोध्या में रात 11 बजे तक चला भाजपा प्रदेश अध्यक्ष की बैठकों का दौर, भाजपा पदाधिकारियों को दी दो जिम्मेदारी
अयोध्या में भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष और पदाधिकारियों की बैठक रात 11 बजे तक चली। इस दौरान पार्टी पदाधिकारियों को दो प्रमुख कार्यों की जिम्मेदारियां सौंपी गईं।
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भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष पंकज चौधरी ने अवध के 14 जिलों के पार्टी पदाधिकारियों और जनप्रतिनिधियों को एसआईआर के दूसरे चरण में सहभागिता और गांव-गांव जाकर वीबी जी राम जी अधिनियम की खूबियां बताने का विशेष दायित्व सौंपा है। इसके साथ ही संगठन और जनप्रतिनिधियों के बीच बेहतर समन्वय की कार्यप्रणाली विकसित करने का भी मंत्र दिया है। इन बैठकों में देर हो जाने के चलते वह अयोध्या विधायक वेद प्रकाश गुप्त की ओर से आयोजित रात्रि भोज में शामिल हुए बगैर वापस लखनऊ लौट गए।
सोमवार को जिले की सीमा से रोड शो की शुरुआत करने के बाद हनुमानगढ़ी और राम मंदिर में दर्शन कर प्रदेश अध्यक्ष रात 8.30 बजे के करीब डॉ. राम मनोहर लोहिया अवध विश्वविद्यालय पहुंचे। यहां पर सबसे पहले स्वामी विवेकानंद सभागार में अवध क्षेत्र में निवास करने वाले प्रदेश व क्षेत्रीय पदाधिकारियों, जिलाध्यक्षों और जिला प्रभारियों सहित जनप्रतिनिधियों की संयुक्त बैठक में शामिल हुए। इसमें क्षेत्रीय अध्यक्ष कमलेश मिश्र के बाद उनका संबोधन हुआ।
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इसके बाद उन्होंने संगठन के पदाधिकारियों और जनप्रतिनिधियों के साथ अलग-अलग बैठकें की। सांगठनिक बैठक में अवध के सभी 14 जिलों के अध्यक्षों के साथ जिला प्रभारी व जिला महामंत्री सहित अन्य प्रमुख पदाधिकारी शामिल हुए। जबकि जनप्रतिनधियों की बैठक में 63 विधायक, एमएलसी, सांसद, महापौर, नगर पालिका अध्यक्ष, पूर्व सांसद, पूर्व विधायक और पूर्व एमएलसी ने शिरकत की। इन दोनों बैठकों का मुख्य एजेंडा एसआईआर और वीबी जी राम जी अधिनियम ही रहा।
गांव-गांव जाकर चौपाल आयोजित करेंगे पदाधिकारी व जनप्रतिनिधि
इन बैठकों में प्रदेश अध्यक्ष ने कहा कि उनकी नियुक्ति के बाद दो महत्वपूर्ण काम होने जा रहे हैं। पहला एसआईआर का दूसरा चरण शुरू हो गया है और दूसरा विकसित भारत जी राम जी अधिनियम लागू हुआ है। एसआईआर दूसरे चरण के महत्व के बारे में बताते हुए कहा कि वोटर लिस्ट का ड्राफ्ट आ चुका है। ऐसे में हमें एक बार फिर से बूथों पर पहुंच कर एक-एक व्यक्ति से संपर्क और संवाद करने के अभियान में जुटना है।
इस दौरान उन्होंने यह भी कहा कि वीबी जी रामजी अधिनियम को लेकर विपक्ष गांवों में भ्रम पैदा करने का प्रयास कर रहा है। इसलिए पदाधिकारी व कार्यकर्ताओं के साथ ही सभी जनप्रतिनिधियों की यह जिम्मेदारी है कि गांव-गांव जाकर चौपाल आयोजित कर अधिनियम की सच्चाई और श्रमिकों के हित में लिए गए ऐतिहासिक निर्णय के बारे में बताएं।