गंगा यात्रा के सहारे गांवों व शहरों को केसरिया बनाने की तैयारी, घरों पर लगाए जाएंगे भगवा ध्वज
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प्रदेश सरकार और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ परिवार ने गंगा यात्रा के बहाने राष्ट्रवाद के सरोकारों पर निशाना साधने की तैयारी कर ली है। साथ ही यात्रा की राह में पड़ने वाले 26 जिलों, 1026 ग्राम पंचायतों और 1638 गांवों को केसरिया बनाकर सरोकारों को परवान चढ़ाते हुए सियासी समीकरण साधने की रणनीति भी बना ली है।
यात्राएं 27 जनवरी को बिजनौर और बलिया से शुरू होकर 31 जनवरी को कानपुर में मिलेंगी। बिजनौर से यात्रा का प्रारंभ मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ करेंगे तो बलिया से राज्यपाल आनंदी बेन पटेल इसका शुभारंभ करेंगी।
यात्रा के सहारे न सिर्फ गंगा की सफाई का संदेश देने की तैयारी है, बल्कि नागरिकता संशोधन अधिनियम (सीएए) पर भी लोगों को सच्चाई बताने और विरोध करने वालों की पोल खोलने की रणनीति बनाई गई है।
तैयारी कुछ उस तरह की है जैसे बाल गंगाधर तिलक ने गणेश उत्सव के जरिये महाराष्ट्र में न सिर्फ राष्ट्रवाद के भाव को मजबूत करने का काम किया था, बल्कि इन उत्सवों के जरिये अगड़ों व पिछड़ों को एक मंच पर लाकर अंग्रेजों के खिलाफ लड़ाई को निर्णायक स्वरूप प्रदान किया था। उसी तर्ज पर इस यात्रा में भगवा ध्वज फहराकर लोगों में राष्ट्रवाद की भावना को मजबूत करने की तैयारी है।
घर-घर जाकर लोगों को केसरिया ध्वज वितरित किया जाएगा
तय किया गया है कि वसंत पंचमी 29 जनवरी को यह यात्रा जहां-जहां से गुजरेगी, उन रास्तों पर पड़ने वाले गांवों और शहरों में प्रत्येक घर पर केसरिया ध्वज फहराया जाए। इसके लिए संघ और भाजपा कार्यकर्ता घर-घर जाकर लोगों को केसरिया ध्वज वितरित करेंगे। साथ ही सभी स्कूलों में सरस्वती पूजा होगी और छात्र-छात्राओं को राष्ट्रवाद का पाठ पढ़ाया जाएगा।
हिंदुत्व व राष्ट्रवाद के समीकरणों पर काम करने का संकेत भी दे दिया था
भारतीय संस्कृति में गंगा के महत्व को सभी जानते हैं। यह नदी प्रत्येक हिंदू की भावनाओं को प्रभावित करती है। तभी तो नरेंद्र मोदी ने वाराणसी से लोकसभा का चुनाव लड़ने का फैसला करने के साथ 2014 में नामांकन से पहले यह कहकर ‘मुझे मां गंगा ने बुलाया है’ न सिर्फ उत्तर प्रदेश के लोगों से भावनात्मक नाता जोड़ने की कोशिश की थी बल्कि प्रतीकों के सहारे हिंदुत्व व राष्ट्रवाद के समीकरणों पर काम करने का संकेत भी दे दिया था। उन्होंने गंगा की सफाई को मुद्दा बनाया था।
कहा था कि गंगा की इस दशा के लिए कांग्रेस, सपा और बसपा जैसे तुष्टीकरण की राजनीति करने वाले दल दोषी हैं क्योंकि इन्हें हिंदुत्व के सरोकारों की चिंता ही नहीं है। इसीलिए केंद्र में सरकार बनने के बाद मोदी ने ‘नमामि गंगे’ मिशन की घोषणा कर गंगा को अविरल व निर्मल बनाने का संकल्प जताया था। पर, पांच साल की सरकार के बावजूद गंगा की अविरलता व निर्मलता को लेकर उठने वाले सवाल खत्म नहीं हो पाए।
संभवत: इसीलिए मोदी ने दूसरी बार प्रधानमंत्री पद की शपथ लेने के बाद 14 दिसंबर को कानपुर में ‘गंगा परिषद’ की बैठक कर यह बताने की कोशिश की कि अब वह गंगा की निर्मलता व अविरलता का काम अपनी देखरेख में कराएंगे। इसी बैठक के बाद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और भाजपा नेताओं की बैठक में गंगा के किनारे के शहरों व गांवों से नदी में गिरने वाली गंदगी को रोकने के लिए लोगों को जागरूक करने को ‘गंगा यात्रा’ निकालने का फैसला किया गया।