यूपी: पूर्वांचल की बंजर जमीन पर कमल खिलाने के लिए बेताब भाजपा
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मिशन 2017 की कामयाबी के लिए भाजपा की पूर्वांचल पर विशेष नजर है। इसके लिए न सिर्फ नेता दौरे कर रहे हैं, बल्कि केंद्र सरकारी योजनाओं के जरिये भी पूर्वांचल की सियासी गणित साधने की कोशिश कर रहा है। साथ ही सोशल इंजीनियरिंग को ध्यान में रखकर भी कार्यक्रम तय हो रहे हैं।
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी दो महीने में दूसरी बार पूर्वांचल के दौरे पर आ रहे हैं। गृहमंत्री राजनाथ सिंह पिछले महीने मऊ आए थे। भाजपा अध्यक्ष अमित शाह एक सप्ताह के भीतर दूसरी बार पूर्वांचल के दौरे पर हैं।
शाह ने शनिवार को पूर्वांचल में भारतीय समाज पार्टी के साथ रैली करके पूर्वांचल के राजभर वोटों को साधने के लिहाज से सोशल इंजीनियरिंग पर काम किया।
ओमप्रकाश राजभर की भारतीय समाज पार्टी की तरफ से आयोजित रैली में उन्होंने भाजपा व भासपा के गठबंधन की घोषणा की। प्रदेश में 54 प्रतिशत पिछड़ों की आबादी में राजभर व भर समाज की भागीदारी लगभग 3 प्रतिशत है।
इन जिलों में प्रभावी है इनका वोट बैंक
पूर्वांचल के मऊ , आजमगढ़, गाजीपुर, बलिया, वाराणसी, जौनपुर, चंदौली सहित लगभग 8 जिलों में ये प्रभावी स्थिति में हैं। इनका वोट जीत-हार में महत्वपूर्ण भूमिका अदा कर सकता है।
उधर, प्रधानमंत्री मोदी 22 जुलाई को गोरखपुर के जरिये पूर्वांचल के विकास की प्रतिबद्धता का संदेश देने वाले हैं। साथ ही यह भी बताने वाले हैं कि वह चुनाव के दौरान किए इस वादे को भूले नहीं हैं कि उनकी सरकार बनी तो पूर्वांचल का कर्ज उतारने का फर्ज पूरा करेंगे।
मोदी यहां 22 को जहां पूर्वांचल के लोगों के स्वास्थ्य सुविधाओं के लिहाज से काफी महत्वपूर्ण गोरखपुर में प्रस्तावित एम्स का शिलान्यास करेंगे।
साथ ही चुनाव के दौरान किए गए गोरखपुर के प्रमुख खाद कारखाने के पुनरुद्धार के काम की भी शुरुआत करेंगे। लगभग दो दशक से बंद इस कारखाने की चांद छाप यूरिया खाद एक समय देश भर में काफी मशहूर थी।
14 सालों से भाजपा के लिए बंजर साबित हो रहा ये इलाका
दरअसल, यह इलाका पिछले 14 सालों से भाजपा के ‘कमल’ के लिए बंजर साबित होता रहा है। पूर्वांचल में विधानसभा की 102 सीटों में भाजपा के पास इस समय 13 सीटें ही हैं।
पर, लोकसभा चुनाव में आजमगढ़ छोड़कर पूरे पूर्वांचल की सीटें जिस तरह भाजपा की झोली में आईं, उसने पार्टी के रणनीतिकारों को काफी उत्साहित कर दिया।
उन्हें शायद लग रहा है कि उन्होंने पूर्वांचल की जरूरतों पर काम और सोशल इंजीनियरिंग पर ध्यान दिया तो 2017 में विधानसभा की एक चौथाई सीटों को समेटे पूर्वांचल के कई इलाकों में कमल फिर खिल सकता है।
जिसका प्रमाण यह है कि प्रधानमंत्री बनने के बाद नरेंद्र मोदी चाहे अपनी संसदीय सीट वाराणसी में आए हों या और कहीं। उन्होंने यह बात जरूर कही है कि प्रदेश में भी अगर भाजपा की सरकार बन जाए तो वह पूर्वांचल का ज्यादा तेजी से विकास करा सकते हैं।
पूर्वांचल पर फोकस के लिए ये काम
- प्रधानमंत्री ने 1 मई को बलिया से उज्ज्वला योजना की शुरुआत की। उन्होंने इसी दिन वाराणसी में गरीबों को ई रिक्शा बांटे। दिव्यांगों को उनकी मदद के लिए सहायक उपकरण बांटे गए। प्रधानमंत्री बनने के बाद मोदी वाराणसी में अब तक छह बार आ चुके हैं। उन्होंने हर दौरे में पूर्वांचल के लिए केंद्र सरकार द्वारा किए जा रहे कामों को गिनाया है।
- केंद्रीय भूतल-परिवहन मंत्री नितिन गडकरी ने पूर्वांचल की कई सड़कों के निर्माण का शिलान्यास किया।
- केंद्रीय मंत्रिमंडल में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी सहित 5 मंत्री पूर्वांचल से हैं।
- पूर्वांचल में चुनाव के लिहाज से प्रभावी पिछड़ी जातियों को जोड़ने के लिए अमित शाह ने जहां शनिवार को रैली की। इससे ठीक एक महीने पहले गृहमंत्री राजनाथ सिंह ने मऊ में सामाजिक समरसता सम्मेलन को संबोधित किया था।
- अमित शाह ने 31 मई को इलाहाबाद में किसानों के सम्मेलन के जरिये भी 2017 के चुनावी समर के लिए लोगों का समर्थन जुटाने की कोशिश की थी। वह 11 से 14 जून तक फिर इलाहाबाद में पार्टी की राष्ट्रीय कार्यसमिति की बैठक के सिलसिले में रुके और कार्यकर्ताओं से संवाद किया।
इलाहाबाद में आयोजित सभा में मोदी ने मांगा समर्थन
- राष्ट्रीय कार्यसमिति की बैठक के बाद इलाहाबाद में आयोजित सभा में प्रधानमंत्री मोदी भी पूर्वांचल के लोगों से 2014 की तरह भाजपा के लिए समर्थन मांग चुके हैं। साथ ही लोगों को याद दिला चुके हैं कि प्रदेश में अनुकूल सरकार न होने के कारण केंद्रीय योजनाएं यूपी में रफ्तार नहीं पकड़ पा रही हैं।
लोगों को जोड़ने के लिए उन्होंने यह भी याद दिलाया कि केंद्र सरकार के महत्वपूर्ण मंत्रालय में उत्तर प्रदेश को किस तरह बड़ी भूमिका दी गई है। एक तरह से उन्होंने यहां के लोगों को यह संदेश देने की कोशिश की कि भले ही वह उत्तर प्रदेश के न हों लेकिन वाराणसी से लड़कर उन्होंने सूबे का सच्चा प्रतिनिधित्व होने का जो वादा किया था, वह उसे भूले नहीं।
- अमित शाह 1 जुलाई को बस्ती में कार्यकर्ताओं के सम्मेलन में पूर्वांचल के लोगों से 2017 में भाजपा के लिए समर्थन का वादा करा चुके हैं तो उन्होंने इसके अगले दिन वाराणसी की रोहनिया में अपना दल की रैली में भागीदारी करके कुर्मी वोटों का साधने की कोशिश की। इसी दिन शाम को उन्होंने जौनपुर में कार्यकर्ताओं के सम्मेलन में हिस्सा लेकर काशी क्षेत्र की जनता से भाजपा के लिए समर्थन मांगा।