यूपी: चुनाव से पहले भाजपा को बड़ी सफलता, राजभर व अनुप्रिया को साधा पर सीटों को लेकर मामला अटका
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पिछले डेढ़ साल से बगावती तेवर दिखाने वाली सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी (सुभासपा) और करीब छह महीने से तेवर दिखाने वाले अपना दल (एस) को आखिरकार भाजपा ने साध ही लिया।
योगी सरकार ने सुभासपा अध्यक्ष व कैबिनेट मंत्री ओमप्रकाश राजभर के बेटे अरविंद राजभर को जहां उप्र लघु उद्योग निगम लिमिटेड का अध्यक्ष बनाया, वहीं उनके 7 खास समर्थकों को भी समायोजित कर अपने पक्ष में खड़ा रहने पर राजी कर लिया। अपना दल (एस) के भी 9 कार्यकर्ताओं को सम्मान देकर उनकी शिकायतें भी दूर कर दी हैं।
सपा-बसपा गठबंधन बनने के बाद बदले सियासी समीकरण को साधने के लिए भाजपा के लिए भी जरूरी हो गया था कि वह कुर्मी और राजभर जैसी दो प्रमुख जातियों पर प्रभाव रखने वाले इन दोनों दलों को अपने पाले में बनाए रखे। पूर्वांचल की एक दर्जन से अधिक लोकसभा सीटों पर जहां राजभर जाति की अच्छी खासी संख्या है, वहीं करीब इतनी ही सीटों पर कुर्मी जाति का दबदबा है।
इसी सियासी समीकरण के साथ संतुलन बनाए रखने के लिए भाजपा ने अपना दल (एस) के 9 कार्यकर्ताओं की ताजपोशी की है, जिनमें से 7 कुर्मी जाति के हैं तो एक पाल समाज से और एक क्षत्रिय हैं। इसी तरह सुभासपा के सुझाव पर विभिन्न बोर्ड व आयोगों में समायोजित किए गए 8 कार्यकर्ताओं में से 5 राजभर, एक पटेल, एक ठाकुर और प्रजापति समाज के हैं। इस तरह भाजपा ने पिछड़ों के जातीय समीकरण साधने की कोशिश की है।
इन सीटों पर दावा कर रहे राजभर व अनुप्रिया पटेल
दोनों दलों के नेताओं की पिछले दिनों दिल्ली में भाजपा अध्यक्ष से वार्ता हो चुकी है और सीटों के बंटवारे का फॉर्मूला तय होने की बात भी कही जा रही है, लेकिन सीटों की संख्या को लेकर मामला अटका हुआ है। यह तय नहीं हो पाया है कि सुभासपा और अपना दल (एस) को कौन-कौन सी सीटें दी जाएंगी।
ओमप्रकाश राजभर घोसी, अंबेडकरनगर, जौनपुर, चंदौली और सलेमपुर पर दावा ठोक रहे हैं। हालांकि भाजपा दो सीटें देने को तैयार है। वहीं अनुप्रिया पटेल आधा दर्जन सीटों पर नजर गड़ाए बैठी हैं।
अनुप्रिया खुद अपनी मौजूदा सीट मिर्जापुर से लड़ने की तैयारी कर रही हैं। साथ ही जौनपुर, फूलपुर, रॉबर्ट्सगंज, डुमरियागंज व प्रतापगढ़ सीट लेने का प्रस्ताव भी भाजपा हाईकमान को सौंप चुकी हैं।