अमित शाह ने यूपी के मंत्रियों को दिए सौ दिन, सांसदों-विधायकों को भी टार्गेट
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
भाजपा की प्रदेश कार्यसमिति की बैठक में एक दिन के लिए लखनऊ आए पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह न सिर्फ दल के पदाधिकारियों को आगे के काम का एजेंडा सौंप गए, बल्कि मंत्रियों, सांसदों व विधायकों को भी टास्क सौंप गए हैं। मंत्रियों के लिए सौ दिन में कुछ खास करने का लक्ष्य तय किया गया है।
सांसदों व विधायकों के लिए संपर्क और संवाद पर फोकस करते हुए कार्य तय किए गए हैं। मंत्रियों की सौ दिन बाद फिर क्लास लगेगी जिसमें उनके कामकाज की समीक्षा होगी। इसमें मंत्रियों को बताना होगा कि उन्होंने सौ दिन में क्या कुछ खास किया है।
जानकारी के मुताबिक, सभी मंत्रियों को सौ दिनों में अपने-अपने विभागों की कार्यसंस्कृति को बदलने और जनता से जुड़े काम लेकर को पूरी तरह पारदर्शी बनाने के उपाय करने को कहा गया है।
शाह ने यह सलाह भी दी है कि सरकार के सौ दिन पूरे होने के भीतर सभी विभाग कम से कम कोई एक ऐसा फैसला जरूर करें जो जनता को बदलाव का संदेश देने वाला हो।
जमीन संबंधित मामलों का त्वरित निपटारा करने का आदेश
कामकाज की प्रक्रिया को जटिलताओं से उबारने की कोशिश का संकेत निकले। राजस्व विभाग को खास तौर से ऐसी प्रक्रिया निर्धारित करने की जिम्मेदारी सौंपी गई है जिससे जमीन संबंधी विवादों का त्वरित निपटारा हो सके।
साथ ही लोगों को जाति, आय और अन्य प्रमाण पत्र भी आसानी से मुहैया हो सकें। इसी तरह स्वास्थ्य विभाग के लिए सौ दिन के भीतर जिला अस्पतालों से लेकर प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों तक लोगों के तत्काल इलाज और गंभीर मरीजों को बड़े अस्पताल पहुंचाने की व्यवस्था को और सुलभ करके दिखाने की सलाह दी गई है।
सभी विभागों से यह भी अपेक्षा की गई है कि सौ दिनों में अगर ब्लॉकों पर सभी विभागों के सिंगल विंडो सिस्टम के तहत रोजमर्रा के काम निपटाने की व्यवस्था हो जाए तो ज्यादा ठीक रहेगा।
सांसदों व विधायकों को जिम्मेदारी
प्रत्येक सांसद और विधायक को पांच दिन अपने क्षेत्र में अलग-अलग गुजारने होंगे। फिलहाल यह काम प्रयोग के तौर पर पंडित दीनदयाल उपाध्याय जन्म शताब्दी वर्ष के सिलसिले में ही शुरू होगा, पर भविष्य में इसे आगे बढ़ाने की भी योजना है, जिससे सांसदों और विधायकों का अपने क्षेत्र के लोगों के साथ निरंतर संपर्क और संवाद बना रहे।
याद रहे कि सांसदों और विधायकों को पहले ही अपने क्षेत्र के अलावा दूसरे इलाकों में जाकर निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार लोगों से संपर्क करने और वहां के बारे में फीडबैक जुटाने का काम सौंपा जा चुका है।
यह भी कहा जा चुका है कि सभी सांसद और विधायक दूसरे क्षेत्रों में प्रवास के दौरान बूथ स्तर तक जाएंगे और वहां रात भी गुजारेंगे। अब इसमें सांसदों और विधायकों के लिए अपने क्षेत्र में संपर्क और संवाद का कार्यक्रम भी जोड़कर इनकी जिम्मेदारी बढ़ाई गई है।
पेड़ों को भी बनाएं प्रतीक
हर बूथ पर भाजपा की पहचान को स्थायित्व देने के लिए विस्तारकों, कार्यकर्ताओं, विधायकों और सांसदों से संबंधित बूथ पर एक पौधा लगाने को भी कहा गया है, जिससे आगे भी लोगों को यह पता रहे कि संबंधित बूथ पर भाजपा के लोग सक्रिय हैं।
इस पौधे की देखरेख संबंधित बूथ कमेटी करेगी। अगर किसी बूथ पर पौधा नहीं लगाया गया है तो माना जाएगा कि वहां कमेटी सक्रिय नहीं है। बूथ पर किसी ने संपर्क नहीं किया है।
इस तरह करना होगा काम
सांसदों के लिए तय किया गया है कि वे दीनदयाल जन्म शताब्दी वर्ष के तहत होने वाले कार्यक्रमों के तहत महीने में कम से कम पांच दिन अपने क्षेत्र में आने वाले विधानसभा क्षेत्रों की अलग-अलग सीटों पर बूथ तक जाएं और वहां रात गुजारें।
इस दौरान वे केंद्र और प्रदेश सरकार की योजनाओं से लाभान्वित हुए लोगों से मिलें और उन्हें भाजपा के साथ जोड़ने की कोशिश करें। यह भी पता लगाएं कि संबंधित बूथ के तहत किस व्यक्ति को अपेक्षित योजना का लाभ नहीं मिल पाया है। इसका ब्योरा तैयार करके संबंधित व्यक्ति को उस योजना का लाभ दिलाएं।
बूथ पर जाकर ये भी करना होगा
कुछ ऐसे नए लोगों को जोड़ने की कोशिश करें जिनके सहयोग से संबंधित बूथ पर भाजपा के वोटों का आंकड़ा बढ़ सकता है। विधायकों के लिए भी उनके क्षेत्र में संपर्क के कार्यक्रम बनाए गए हैं। इसका नाम ‘पांच सेक्टर-पांच बूथ’ दिया गया है।
इसके तहत प्रत्येक विधायक को अपने निर्वाचन क्षेत्र के पांच सेक्टर के अलग-अलग पांच बूथों पर पांच दिन जाकर रुकना होगा तथा केंद्र और राज्य सरकार की योजनाओं का फीडबैक जुटाना होगा।
भाजपा के प्रदेश महामंत्री विजय बहादुर पाठक के अनुसार, पार्टी का लक्ष्य सिर्फ सत्ता परिवर्तन कर सरकार बना लेना नहीं, बल्कि जन सरोकारों से जुड़े मुद्दों पर संकल्प के साथ काम करना भी है। इसीलिए हमारी सरकार ने सौ दिन के एजेंडे पर काम शुरू किया है।
सौ दिन बाद हम जनता को काम का हिसाब देंगे। संगठन भी इस दिशा में कोशिश कर रहा है। प्रयास है कि लोक कल्याण संकल्प पत्र के मुताबिक जन अपेक्षाओं को पूरा किया जाए। लोगों की समस्याएं और अपेक्षाएं समझी जाएं तथा उन्हें सरकार तक पहुंचाकर समाधान कराया जाए।