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जानें, आखिर क्या सोच कर सीएम आदित्यनाथ ने मंत्रियों को दिए विभाग

Thu, 23 Mar 2017 05:13 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, लखनऊ
ब्यूरो/अमर उजाला, लखनऊ Updated Thu, 23 Mar 2017 05:13 PM IST
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BJP plan behind portfolio distribution in Uttar Pradesh.
मुख्यमंत्री आदित्यनाथ - फोटो : amar ujala

यूपी में विभागों के बंटवारे में मुख्यमंत्री आदित्यनाथ योगी ने नयों पर ज्यादा भरोसा दिखाया है तो विवादों से बचने की चिंता भी दिख रही है। शायद यही वजह रही कि सपा और उससे पहले बसपा सरकार में विवादों को जन्म देने और सरकारों की छवि पर असर डालने वाले खनन जैसे विभाग को मुख्यमंत्री ने अपने पास रख लिया है।

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वहीं, खाद्य-रसद विभाग को अपने पास रख प्रधानमंत्री मोदी की सूबे में गरीबों को सस्ता अनाज न मिल पाने की चिंता को दूर करने की कोशिश की है। साफ पता चलता है कि भाजपा के केंद्रीय नेतृत्व की भूमिका मंत्रियों के विभाग तय करने में काफी महत्वपूर्ण रही है।
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यह बात ठीक है कि सिद्धार्थनाथ सिंह, श्रीकांत शर्मा, आशुतोष टंडन, मुकुट बिहारी वर्मा, स्वाति सिंह, संदीप सिंह व अनुपमा जायसवाल जैसे उन चेहरों को जो कभी मंत्री नहीं रहे, महत्वपूर्ण विभाग दे दिए गए हैं। इनमें कोई किसी बड़े नेता का रिश्तेदार है तो किसी पर लंबे समय से पार्टी का कोई बड़ा नेता मेहरबान दिखता रहा है।
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इसके बावजूद संदेश यह भी दिख रहा है कि पार्टी हाईकमान महत्वपूर्ण जिम्मेदारियों के जरिये भविष्य के लिए बड़ी भूमिका वाले नेताओं की टीम खड़ी करना चाहता है। साथ ही वह नए चेहरों को काम करके दिखाने का मौका भी देना चाहता है।

मंत्रिपरिषद में चेक एंड बैलेंस रखने की कोशिश

BJP plan behind portfolio distribution in Uttar Pradesh.

यूपी के 47 सदस्यीय मंत्रिपरिषद में मुख्यमंत्री को छोड़ दें तो 46 में 34 चेहरे ऐसे हैं जो पहली बार मंत्री बने हैं। इनमें कई तो पहली व दूसरी बार के ही विधायक हैं।

पर, गहराई से नजर डालें तो संकेत मिलता है कि विभागों के बंटवारे में जहां साफ-सुथरी छवि का ध्यान रखा गया है, वहीं यह भी ख्याल रखा गया है कि महत्वपूर्ण विभाग संभालने वालों के बारे में पहले से कोई धारणा न हो। चेक एंड बैलेंस रखने की कोशिश की गई है।

यही वजह रही कि स्वतंत्र प्रभार के राज्यमंत्री के रूप में महत्वपूर्ण विभाग देने के बाद कैबिनेट में महत्वपूर्ण विभाग संभालने वाले किसी मंत्री को उसके साथ लगा दिया गया है।

महत्वपूर्ण विभाग देकर बढ़ाया केशव का कद

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प्रदेश अध्यक्ष से उप मुख्यमंत्री पद पर पहुंचे केशव प्रसाद मौर्य अभी तक कभी मंत्री नहीं रहे। पर, उन्हें उप मुख्यमंत्री के साथ लोक निर्माण जैसा महत्वपूर्ण विभाग सौंपकर उनका कद और बढ़ाने की कोशिश की गई है। साथ ही विकास के एजेंडे पर काम का संकेत दिया गया है।

डॉ. दिनेश शर्मा को माध्यमिक एवं उच्च शिक्षा विभाग सौंपकर पिछली सरकारों में इन विभागों के कामकाज पर उठे विवादों की पुनरावृत्ति रोकने की कोशिश की गई है। यह भी संदेश देने का प्रयास हुआ है कि इन विभागों में नियुक्तियों से लेकर परीक्षा केंद्र निर्धारण तक जो कुछ अतीत में हुआ वह अब नहीं होगा।

मथुरा से श्रीकांत शर्मा भले ही पहली बार विधायक बने हैं लेकिन पार्टी में लंबे समय से सक्रिय हैं। उन्हें ऊर्जा जैसा महत्वपूर्ण विभाग देकर कांग्रेस नेता व कई बार के विधायक प्रदीप माथुर को हराने का पुरस्कार भी दिया गया है।

सिद्धार्थनाथ सिंह भी पहली बार के विधायक हैं लेकिन उन्हें चिकित्सा एवं स्वास्थ्य जैसा विभाग सौंपकर पार्टी में लंबे समय से सक्रियता का पुरस्कार दिया गया है।

चुनौतियों से निपटने की जिम्मेदारी

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नए मंत्रियों को विभाग देते वक्त चुनौतियों से निपटने की जिम्मेदारी भी डालने का संदेश निकल रहा है। इसका प्रमाण मुकुट बिहारी वर्मा को सहकारिता, आशुतोष टंडन को प्राविधिक शिक्षा एवं चिकित्सा शिक्षा, जयप्रताप सिंह को आबकारी व मद्यनिषेध जैसे महत्वपूर्ण विभाग देना है।

यह सारे विभाग पिछली सरकारों में जब-तब विवाद का कारण रहे हैं। इन विभागों को नए चेहरों को सौंपकर पार्टी के रणनीतिकारों ने चुनौतियों से निपटने की जिम्मेदारी डाली है।

दारा सिंह चौहान को वन एवं पर्यावरण व डॉ. रीता बहुगुणा जोशी को महिला कल्याण तो राज्यमंत्री स्वतंत्र प्रभार स्वतंत्र देव सिंह को परिवहन, अनुपमा जायसवाल को बेसिक शिक्षा व बाल विकास एवं पुष्टाहार, स्वाति सिंह को एनआरआई, बाढ़ नियंत्रण, कृषि निर्यात व कृषि विपणन तथा डॉ. महेन्द्र सिंह को ग्रामीण विकास व समग्र ग्राम विकास जैसे विभाग देने के पीछे भी इन विभागों के कामकाज का ढर्रा ठीक करने की कवायद दिख रही है। तमाम वजहों से ये सभी विभाग पिछली सरकारों में विवाद का मुद्दा बनते रहे हैं।

बड़े नेताओं के कारण इन्हें मिला बड़ा पद

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आशुतोष टंडन - फोटो : amar ujala

एक और महत्वपूर्ण बात जो नजर आती है वह बड़ों के कारण बड़े बनने के समीकरण भी हैं। आशुतोष टंडन को महत्वपूर्ण विभाग मिलने की एक वजह उनके पिता लालजी टंडन का पार्टी में लंबे समय तक महत्वपूर्ण कद भी रहा है।

राज्यमंत्रियों में पहली बार की विधायक अर्चना पांडेय को खनन, आबकारी, मद्यनिषेध तो संदीप सिंह को बेसिक, माध्यमिक, उच्च, प्राविधिक एवं चिकित्सा शिक्षा जैसे महत्वपूर्ण विभाग सौंपने के पीछे भी इनके परिवार की पृष्ठभूमि बड़ी वजह लग रही है।

अर्चना पार्टी के बड़े नेता रहे स्व. रामप्रकाश त्रिपाठी की पुत्री हैं तो संदीप सिंह कल्याण सिंह के पौत्र हैं। सुरेश पासी को आवास एवं व्यावसायिक शिक्षा देने के पीछे केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी की भूमिका मानी जा रही है।

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