'मायावती चाहतीं तो लागू हो जाता पदोन्नति में आरक्षण'
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
अगर सपा सरकार चाहती तो यूपी में भी दलित अधिकारियों व कर्मचारियों को उनके पद से रिवर्ट नहीं करना पड़ता। जैसा कि हरियाणा, राजस्थान और बिहार की सरकार ने अपने यहां एक भी दलित कर्मचारी को रिवर्ट नहीं किया।
दरअसल सपा सरकार ने राजनीतिक वैमनस्यता के कारण दलित कर्मचारियों को उनके पदों से रिवर्ट किया है। ये बातें रविवार को दिल्ली के भाजपा सांसद उदित राज ने लखनऊ में मीडिया से कही। उदित राज ने कहा कि मायावती चाहतीं तो पदोन्नति में आरक्षण को लागू कर सकती थीं लेकिन उन्होंने ऐसा नहीं किया।
उदित राज ने कहा कि वे जल्द ही लोकसभा में प्रमोशन में आरक्षण का बिल पास कराएंगे। इस संबंध में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी व पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह से बात हो चुकी है। राज्यसभा में यह बिल पहले ही पास हो चुका है।
उन्होंने कहा कि पदोन्नति में आरक्षण के लिए 85वां संविधान संशोधन अटल बिहारी वाजपेयी की सरकार ने ही किया था। इसे सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी गई थी।
हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच ने निर्णय पर लगाई रोक
वहीं हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच में 4 जनवरी 2011 को पदोन्नति में आरक्षण के निर्णय पर रोक लगा दी गई थी। जबकि तत्कालीन मुख्यमंत्री मायावती अगर चाहती तो एक समिति बनाकर उसकी रिपोर्ट लेकर पदोन्नति में आरक्षण को लागू कर सकती थीं लेकिन उन्होंने ऐसा नहीं किया।
उन्होंने कहा कि वे एससी-एसटी संगठनों का अखिल भारतीय परिसंघ के बैनर तले प्रमोशन में आरक्षण की लड़ाई लड़ेंगे। इसी महीने परिसंघ के संभागीय सम्मेलन में दलितों के हक की लड़ाई लड़ने की रणनीति बनाई जाएगी।
उदित राज ने कहा, दलितों से जो वादा किया था, उसी को निभाने के लिए लखनऊ आए हैं। अब यूपी में दलितों की लड़ाई परिसंघ लड़ेगा। इस मौके पर परिसंघ के प्रदेश अध्यक्ष जगजीवन प्रसाद भी उपस्थित थे।